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Goa: 'न्याय व्यवस्था हमें सदियों के संघर्ष, बहस से मिली...'; CJI बोले- निरंतरता और परिवर्तन के बीच संतुलन अहम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी Published by: पवन पांडेय Updated Mon, 26 Jan 2026 04:09 AM IST
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सार

देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने गोवा में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था हमें सदियों के संघर्ष, बहस से मिली विरासत है। उन्होंने आगे कहा कि न्याय एक जीवंत संस्था, इसमें निरंतरता और परिवर्तन के बीच संतुलन जरूरी है।

'The judicial system is a legacy inherited from centuries of struggle and debate.' CJI Suryakant in Goa
जस्टिस सूर्यकांत - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि न्याय एक जीवंत संस्था है, जिसे निरंतरता और परिवर्तन के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए। कानून को न तो परिवर्तन का विरोध करना चाहिए और न ही बिना सोचे-समझे नवीनता को अपना चाहिए। वह रविवार को यहां दो दिवसीय एससीएओआरए अंतरराष्ट्रीय विधि सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। एससीएओआर सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (सहायक वकील) का संगठन है।
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सीजेआई ने कहा कि सवाल हमेशा यही रहेगा कि एक ऐसी दुनिया में न्याय अपने आप के प्रति वफादार कैसे रह सकता है जो अस्थिर है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह साझा खोज ही उन्हें न्याय के विषय की ओर ले जाती है, जो समय और परिवर्तन की कसौटी पर खरी उतरती है और इसमें सेवा करने वालों के सामूहिक अनुशासन के कारण कायम रहती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कानूनी व्यवस्था एक विरासत है। हमने न उन अदालतों को बनाया है, जिसमें कार्य करते हैं, न उस प्रक्रिया को जिस पर हम भरोसा करते हैं।

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'हम न्याय संस्था के स्वामी नहीं, संरक्षक'
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि स्पष्ट है कि हम न्याय संस्था के स्वामी नहीं हैं, बल्कि केवल अस्थायी संरक्षक हैं। एक जीवंत संस्था कोई संग्रहालय की वस्तु नहीं है, बल्कि अपने उद्देश्य को संरक्षित करके ही जीवित रहती है। उन्होंने आगे कहा, जो कानून परिवर्तन से दूर रहता है, वह शुद्ध नहीं रहता, वहीं जो कानून बिना सोचे-समझे हर नवीनता को अपना लेता है, वह अपने नैतिक केंद्र को खोने का जोखिम भी उठाता है। उन्होंने कहा कि निरंतरता और अनुकूलन के बीच यह नाजुक संतुलन इस सम्मेलन में लगभग हर बातचीत में अलग-अलग रूप में सामने आया है।
 
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