Bengal: फलता हिंसा मामले में बढ़ी टीएमसी नेता जहांगीर खान की मुश्किलें, कलकत्ता हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत वापस ली
कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी नेता जहांगीर खान को दी गई अंतरिम राहत खत्म कर दी है। अदालत ने उनके खिलाफ किसी भी तरह की कड़ी कार्रवाई पर लगी रोक को हटाते हुए जांच एजेंसियों को आगे की कार्रवाई की अनुमति दे दी।
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी नेता जहांगीर खान को मिली अंतरिम राहत वापस ले ली है। अदालत ने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई पर लगी रोक हटा दी है। अब जांच एजेंसियां मामले में आगे की कार्रवाई कर सकेंगी। यह सुनवाई जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ में हुई। इस फैसले के बाद अब जहांगीर खान के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया सामान्य तरीके से आगे बढ़ सकेगी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और जांच से जुड़े पहलुओं पर विचार करने के बाद यह निर्णय सुनाया।
क्या है मामला?
जहांगीर खान के खिलाफ 29 अप्रैल को हुए नियमित मतदान से पहले और मतदान के दिन मतदाताओं को डराने-धमकाने के आरोप में कई एफआईआर दर्ज की गई थीं। गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए खान ने 18 मई को कलकत्ता हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। उसी दिन मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस भट्टाचार्य ने उन्हें 24 मई तक गिरफ्तारी समेत किसी भी कठोर पुलिस कार्रवाई से अंतरिम राहत दे दी थी। साथ ही अदालत ने 26 मई को अगली सुनवाई की तारीख तय की थी। मंगलवार को यह मामला अदालत के पहले सत्र के अंत या दूसरे सत्र की शुरुआत में सुना जा सकता है।
पुनर्मतदान से पहले जहांगीर खान हुए चुनावी रेस से बाहर
इस बीच 21 मई को हुए पुनर्मतदान से पहले जहांगीर खान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनावी मुकाबले से हटने का एलान किया था। उन्होंने कहा था कि वह नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा फलता के लिए घोषित विशेष विकास पैकेज के समर्थन में यह फैसला ले रहे हैं। हालांकि उनका यह फैसला केवल प्रतीकात्मक रहा, क्योंकि पुनर्मतदान के दिन भी उनका नाम ईवीएम पर मौजूद था और वे आधिकारिक तौर पर उम्मीदवार बने रहे।
किसने हासिल की जीत?
24 मई को घोषित चुनाव परिणामों में बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने एक लाख से अधिक वोटों के अंतर से शानदार जीत दर्ज की। सीपीएम उम्मीदवार शंभूनाथ कुर्मी दूसरे स्थान पर रहे। वहीं तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान चौथे स्थान पर खिसक गए। उन्हें सिर्फ 7,783 वोट मिले और उनकी जमानत भी जब्त हो गई।