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तमिलनाडु: बस स्टैंड पर वीसीके और डीएमके कार्यकर्ताओं के बीच झड़प, एक-दूसरे पर किया पथराव
पीटीआई/एएनआई, पेरम्बलुर (तमिलनाडु)
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 26 May 2026 04:28 PM IST
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सार
तमिलनाडु के पेरम्बलूर में वीसीके और डीएमके कार्यकर्ताओं के बीच प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़प हो गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पथराव और हाथापाई की, जिसके बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। पढ़िए रिपोर्ट-
डीएमके और वीसीके के कार्यकर्ताओं में झड़प
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
तमिलनाडु के पेरम्बलूर के कुन्नम बस स्टैंड पर मंगलवार को वीसीके और डीएमके के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई। दोनों दलों के समर्थक अलग-अलग प्रदर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में वहां पहुंचे थे। इसी दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पथराव किया।
पुलिस ने नहीं दी थी प्रदर्शन की अनुमति
पुलिस ने पहले ही दोनों दलों को प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। पुलिस को चिंता थी कि इससे कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। इसके बावजूद दोनों दलों के कार्यकर्ता बस स्टैंड के पास इकट्ठा हो गए। टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल विदुथलाई चिरुथइगल काची (वीसीके) और उसकी पुरानी सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प शुरू हो गई। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कि पुलिस ने बीच-बचाव कर दोनों पक्षों को अलग किया और उन्हें वहां से हटाया।
कार्यकर्ताओं ने हाथापाई और पथराव किया
अधिकारी के मुताबिक, दोनों दलों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर पत्थर फेंके। कुछ लोग आपस में हाथापाई भी करने लगे, जिससे तनाव बढ़ गया। घटना के बाद कुन्नम बाजार इलाके की सभी दुकानें बंद कर दी गईं और पूरे शहर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
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दोनों दलों के बीच तनाव तब से चल रहा है, जब वीसीके ने पहले टीवीके सरकार को समर्थन दिया और बाद में मुख्यमंत्री सी. विजय जोसेफ की कैबिनेट में शामिल हो गई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद सरकार को बहुमत साबित करने में वीसीके ने टीवीके का समर्थन किया था। इसके बाद वीसीके के विधायक वन्नियारासु को आदि द्रविड़ कल्याण मंत्री बनाया गया। इसका डीएमके के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध किया।
ये भी पढ़ें: सरकार के खजाने की स्थिति ठीक नहीं? आरबीआई की ओर से लाभांश दिए जाने के बाद रमेश ने उठाए सवाल
डीएमके ने वीसीके पर साधा निशाना
डीएमके के उप महासचिव ए. राजा ने वीसीके की आलोचना करते हुए कहा कि वह आंगन में लगे टेड़े नारियल की पेड़ की तरह है, जो अपने घर की बजाय पड़ोसी को नारियल देता है। इसके जवाब में वीसीके ने कहा कि डीएमके को भी गठबंधन का लाभ हुआ था और कई विधानसभा सीटों पर जीत दिलाने में वीसीके ने मदद की थी।
ए राजा ने की झगड़ा आगे न बढ़ाने की अपील
हिंसा के बीच ए. राजा ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, रचनात्मक बहस लोकतंत्र की ताकत है। झगड़े और मारपीट लोकतंत्र के खिलाफ हैं। यह बेवकूफी है। हमें हिंसा से बचना चाहिए और गरीबी को खत्म करने पर फोकस करना चाहिए, जैसाकि हमारे नेता एम. करुणानिधि हमेशा कहते थे।
पुलिस ने नहीं दी थी प्रदर्शन की अनुमति
पुलिस ने पहले ही दोनों दलों को प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। पुलिस को चिंता थी कि इससे कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। इसके बावजूद दोनों दलों के कार्यकर्ता बस स्टैंड के पास इकट्ठा हो गए। टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल विदुथलाई चिरुथइगल काची (वीसीके) और उसकी पुरानी सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प शुरू हो गई। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कि पुलिस ने बीच-बचाव कर दोनों पक्षों को अलग किया और उन्हें वहां से हटाया।
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कार्यकर्ताओं ने हाथापाई और पथराव किया
अधिकारी के मुताबिक, दोनों दलों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर पत्थर फेंके। कुछ लोग आपस में हाथापाई भी करने लगे, जिससे तनाव बढ़ गया। घटना के बाद कुन्नम बाजार इलाके की सभी दुकानें बंद कर दी गईं और पूरे शहर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
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डीएमके ने वीसीके पर साधा निशाना
डीएमके के उप महासचिव ए. राजा ने वीसीके की आलोचना करते हुए कहा कि वह आंगन में लगे टेड़े नारियल की पेड़ की तरह है, जो अपने घर की बजाय पड़ोसी को नारियल देता है। इसके जवाब में वीसीके ने कहा कि डीएमके को भी गठबंधन का लाभ हुआ था और कई विधानसभा सीटों पर जीत दिलाने में वीसीके ने मदद की थी।
ए राजा ने की झगड़ा आगे न बढ़ाने की अपील
हिंसा के बीच ए. राजा ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, रचनात्मक बहस लोकतंत्र की ताकत है। झगड़े और मारपीट लोकतंत्र के खिलाफ हैं। यह बेवकूफी है। हमें हिंसा से बचना चाहिए और गरीबी को खत्म करने पर फोकस करना चाहिए, जैसाकि हमारे नेता एम. करुणानिधि हमेशा कहते थे।