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Rashtrapati Bhavan: टीएमसी प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात का नहीं मिला समय, फिर लिखा पत्र

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Nirmal Kant Updated Thu, 12 Mar 2026 08:15 PM IST
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सार

Rashtrapati Bhavan: टीएमसी प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय मांगा था, लेकिन राष्ट्रपति भवन ने समय की कमी का हवाला देकर अनुरोध खारिज कर दिया। यह प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति को राज्य की कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देना चाहता था। पढ़िए रिपोर्ट-

TMC MPs sought appointment with President Murmu, turned down: Sources
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू - फोटो : एक्स/भारत की राष्ट्रपति
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विस्तार

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए समय मांगा था, ताकि वे पश्चिम बंगाल सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के बारे में उन्हें जानकारी दे सकें। लेकिन राष्ट्रपति भवन ने 'समय की कमी' का हवाला देते हुए उनके मिलने के अनुरोध खारिज कर दिया। एक सूत्र ने गुरुवार को यह जानकारी दी। 
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यह विवाद उस समय बढ़ा, जब शनिवार को राष्ट्रपति ने यह देखकर नाराजगी जताई कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या उनके कोई मंत्री बागडोगरा हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करने नहीं पहुंचे। राष्ट्रपति मुर्मू एक अंतरराष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन में शामिल होने के लिए पहुंची थीं। इस घटना ने राजनीतिक बहस छेड़ दी।
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किसने लिखा था राष्ट्रपति को पत्र?
सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी के एक वरिष्ठ टीएमसी नेता ने नौ मार्च को राष्ट्रपति मुर्मू को पत्र लिखा था, जिसमें 12 से 15 सदस्यीय पार्टी प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात के लिए समय मांगा गया था। इनस प्रतिनिधिमंडल में सांसद और राज्य मंत्री शामिल थे। 

मुलाकात का मकसद क्या था?
पत्र में कहा गया कि प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति को पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से सभी वर्गों के समावेशी विकास के लिए उठाए गए कल्याणकारी कदमों के बारे में जानकारी देना चाहता है। हालांकि, यह अनुरोध खारिज कर दिया गया।

राष्ट्रपति भवन ने क्या जवाब दिया?
राष्ट्रपति भवन ने टीएमसी को सूचित किया कि उनका अनुरोध देखा गया, लेकिन 'समय की कमी' के कारण इसे पूरा नहीं किया जा सका। सूत्र ने कहा कि टीएमसी ने फिर से राष्ट्रपति कार्यालय को पत्र लिखा है और अगले सप्ताह मिलने का समय मांगा है।

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सम्मेलन में कम उपस्थिति पर राष्ट्रपति की नाराजगी
राजनीतिक विवाद उस समय और बढ़ गया, जब शनिवार को राष्ट्रपति ने संत समाज के सम्मेलन में कम उपस्थिति पर अपनी असंतोष जताया। उन्होंने राज्य सरकार के निर्णय पर सवाल उठाया कि सम्मेलन स्थल को विधाननगर से बागडोगरा हवाई अड्डे के पास क्यों स्थानांतरित किया गया। उन्होंने पूछा कि क्या प्रशासन ने सोचा था कि कोई भी इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होगा। इसके अलावा, उन्होंने ममता बनर्जी या उनके मंत्रियों की कार्यक्रम में अनुपस्थिति पर भी गौर किया। 

ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति पर क्या आरोप लगाए?
इसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति पर आरोप लगाया कि वह भाजपा की सलाह पर बोल रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने मणिपुर और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में आदिवासियों पर अत्याचारों पर राष्ट्रपति की कथित चुप्पी पर भी सवाल उठाया था। भाजपा ने टीएमसी सरकार पर राष्ट्रपति का अपमान करने का आरोप लगाया था। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे शर्मनाक और अभूतपूर्व बताया था। उन्होंने कहा था कि विपक्षी पार्टी ने सभी हदें पार कर दी हैं। 
 
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