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TMC Rift Updates: केंद्रीय मंत्री के संपर्क में तृणमूल के बागी सांसद! ममता बनर्जी से अलग हुई बैठक के बाद हलचल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
Published by: Jyoti Bhaskar
Updated Mon, 08 Jun 2026 03:15 PM IST
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सार
TMC Rift Updates: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ तृणमूल कांग्रेस के कई बागी सांसद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मिलने पहुंचे हैं। विपक्षी दल में दरार की खबरों के बीच अब नजरें पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी पर हैं। इस मुलाकात से पहले बागी सांसदों के गुट ने अलग बैठक भी की।
टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/PTI
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विस्तार
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर मचा सियासी घमासान अब दिल्ली तक पहुंच गया है। विपक्षी दलों के गठबंधन- INDIA ब्लॉक में शामिल दलों की अहम बैठक से पहले ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगने के संकेत हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक बागी सांसदों का एक गुट केंद्रीय मंत्री के संपर्क में है।
अलग गुट बनाने की संभावना पर चर्चा
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक ममता बनर्जी की नीतियों से असहमत कई सांसद अलग गुट बनाने की संभावना पर चर्चा कर रहे हैं। सोमवार को हुई इस बैठक में तृणमूल के लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बसुनिया, कालीपद सारेन खेरवाल और अरूप चक्रवर्ती शामिल रहे।
14 TMC सांसदों और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की मुलाकात का सच क्या?
समाचार एजेंसी से इतर मीडिया में आई अन्य खबरों के मुताबिक, लोकसभा में पार्टी के 29 सांसदों में से 14 सांसदों ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इस दौरान कई रिपोर्ट्स में अपुष्ट दावा किया गया कि मुलाकात के दौरान सीएम शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे। हालांकि, इस मुलाकात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इस घटनाक्रम को बंगाल में नए राजनीतिक तूफान का संकेत माना जा रहा है। अब सबकी नजरें ममता बनर्जी की अगली रणनीति पर टिकी है।
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कितनी गंभीर है तृणमूल की सियासी हलचल?
दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल के 60 विधायकों ने एक अलग समूह बनाने की पहल की है। नाराज धड़े ने पूर्व सीएम ममता बनर्जी की तरफ से नामित व्यक्ति के स्थान पर ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना है। हालांकि, इस बाबत इस्तीफा देने वाले वरिष्ठ तृणमूल सांसद सुखेंदु शेखर राय ने कहा कि राज्यसभा और पार्टी से उनका इस्तीफा राज्य विधानसभा में हुई घटना से अलग है क्योंकि वहां के विधायकों ने इस्तीफा नहीं दिया है।
वरिष्ठ तृणमूल सांसद के इस्तीफे से हलचल
इससे पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा के मुख्य सचेतक रहे सुखेंदु शेखर रॉय ने सांसद पद और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया। सुखेंदु के इस्तीफे के बाद टीएमसी के भीतर बगावत और तेज होती दिखाई दे रही है। टीएमसी के अंदर यह संकट ऐसे समय उभर रहा है, जब पार्टी को 15 साल बाद सत्ता गंवानी पड़ी है। खुद ममता बनर्जी भी अपनी सीट बचाने में सफल नहीं रहीं, इसके बाद से पार्टी लगातार दबाव में है।
ये भी पढ़ें- TMC को बड़ा झटका: राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने दिया इस्तीफा, पार्टी के 15 साल के शासन को बताया अराजक
क्या भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था के मुद्दे ने टीएमसी को घेरा?
अपने इस्तीफे में सुखेंदु शेखर रॉय ने ममता बनर्जी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने भ्रष्टाचार, महिलाओं पर अत्याचार और शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, रोजगार तथा कानून व्यवस्था में फैली अराजकता के खिलाफ फैसला दिया है। उन्होंने भाजपा की तारीफ करते हुए लिखा कि पहली बार बंगाल में भाजपा को ऐतिहासिक समर्थन मिला है और नई सरकार विकास के वादों को लागू करने में जुटी है। उनके इस बयान ने साफ कर दिया कि अब टीएमसी के अंदर से ही नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं।
क्या विधानसभा के बाद अब संसद में भी तृणमूल का बिखराव?
बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए गए। इसके बाद से ही टीएमसी दो गुटों में बंटने की आशंका से जूझ रही है। बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने 80 में से 61 विधायकों का समर्थन होने का दावा किया है। अब रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि 23 तृणमूल सांसद बागी गुट के संपर्क में हैं। अगर यह संख्या और बढ़ती है तो संसद में अलग गुट बनाने की संभावना मजबूत हो सकती है। तृणमूल के संख्याबल को देखते हुए लोकसभा में अलग दल के रूप में मान्यता के लिए 22 सांसदों का एकजुट होना जरूरी है।
अलग गुट बनाने की संभावना पर चर्चा
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक ममता बनर्जी की नीतियों से असहमत कई सांसद अलग गुट बनाने की संभावना पर चर्चा कर रहे हैं। सोमवार को हुई इस बैठक में तृणमूल के लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बसुनिया, कालीपद सारेन खेरवाल और अरूप चक्रवर्ती शामिल रहे।
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14 TMC सांसदों और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की मुलाकात का सच क्या?
समाचार एजेंसी से इतर मीडिया में आई अन्य खबरों के मुताबिक, लोकसभा में पार्टी के 29 सांसदों में से 14 सांसदों ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इस दौरान कई रिपोर्ट्स में अपुष्ट दावा किया गया कि मुलाकात के दौरान सीएम शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे। हालांकि, इस मुलाकात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इस घटनाक्रम को बंगाल में नए राजनीतिक तूफान का संकेत माना जा रहा है। अब सबकी नजरें ममता बनर्जी की अगली रणनीति पर टिकी है।
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कितनी गंभीर है तृणमूल की सियासी हलचल?
दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल के 60 विधायकों ने एक अलग समूह बनाने की पहल की है। नाराज धड़े ने पूर्व सीएम ममता बनर्जी की तरफ से नामित व्यक्ति के स्थान पर ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना है। हालांकि, इस बाबत इस्तीफा देने वाले वरिष्ठ तृणमूल सांसद सुखेंदु शेखर राय ने कहा कि राज्यसभा और पार्टी से उनका इस्तीफा राज्य विधानसभा में हुई घटना से अलग है क्योंकि वहां के विधायकों ने इस्तीफा नहीं दिया है।
वरिष्ठ तृणमूल सांसद के इस्तीफे से हलचल
इससे पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा के मुख्य सचेतक रहे सुखेंदु शेखर रॉय ने सांसद पद और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया। सुखेंदु के इस्तीफे के बाद टीएमसी के भीतर बगावत और तेज होती दिखाई दे रही है। टीएमसी के अंदर यह संकट ऐसे समय उभर रहा है, जब पार्टी को 15 साल बाद सत्ता गंवानी पड़ी है। खुद ममता बनर्जी भी अपनी सीट बचाने में सफल नहीं रहीं, इसके बाद से पार्टी लगातार दबाव में है।
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क्या भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था के मुद्दे ने टीएमसी को घेरा?
अपने इस्तीफे में सुखेंदु शेखर रॉय ने ममता बनर्जी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने भ्रष्टाचार, महिलाओं पर अत्याचार और शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, रोजगार तथा कानून व्यवस्था में फैली अराजकता के खिलाफ फैसला दिया है। उन्होंने भाजपा की तारीफ करते हुए लिखा कि पहली बार बंगाल में भाजपा को ऐतिहासिक समर्थन मिला है और नई सरकार विकास के वादों को लागू करने में जुटी है। उनके इस बयान ने साफ कर दिया कि अब टीएमसी के अंदर से ही नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं।
क्या विधानसभा के बाद अब संसद में भी तृणमूल का बिखराव?
बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए गए। इसके बाद से ही टीएमसी दो गुटों में बंटने की आशंका से जूझ रही है। बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने 80 में से 61 विधायकों का समर्थन होने का दावा किया है। अब रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि 23 तृणमूल सांसद बागी गुट के संपर्क में हैं। अगर यह संख्या और बढ़ती है तो संसद में अलग गुट बनाने की संभावना मजबूत हो सकती है। तृणमूल के संख्याबल को देखते हुए लोकसभा में अलग दल के रूप में मान्यता के लिए 22 सांसदों का एकजुट होना जरूरी है।