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Mumbai: उद्धव का BJP पर हमला, कहा- अटल जी ने जब ‘राजधर्म’ की बात की थी तो बाल ठाकरे ने पीएम मोदी को बचाया था
पीटीआई, मुंबई।
Published by: देव कश्यप
Updated Mon, 13 Feb 2023 03:42 AM IST
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सार
उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना ने 25-30 वर्षों तक एक राजनीतिक नेतृत्व की रक्षा की, लेकिन वे (भाजपा) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पूर्व सहयोगी शिवसेना और अकाली दल को नहीं चाहते थे। उन्होंने मुंबई में उत्तर भारतीयों की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मैं भाजपा से अलग हो गया, लेकिन मैंने हिंदुत्व को कभी नहीं छोड़ा।
उद्धव ठाकरे।
- फोटो : ANI
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विस्तार
शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर 'विभाजनकारी' हिंदुत्व को लेकर निशाना साधा। उद्धव ठाकरे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां तक नहीं पहुंचते अगर बाल ठाकरे ने उन्हें तब बचाया नहीं होता जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें ‘‘राजधर्म’’ का पालन करने की नसीहत दी थी।
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ठाकरे ने भाजपा पर हिंदुओं के बीच दरार पैदा करने का आरोप लगाया
उन्होंने कहा कि शिवसेना ने 25-30 वर्षों तक एक राजनीतिक नेतृत्व की रक्षा की, लेकिन वे (भाजपा) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पूर्व सहयोगी शिवसेना और अकाली दल को नहीं चाहते थे। उन्होंने मुंबई में उत्तर भारतीयों की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मैं भाजपा से अलग हो गया, लेकिन मैंने हिंदुत्व को कभी नहीं छोड़ा। भाजपा हिंदुत्व नहीं है। हिंदुत्व क्या है, उत्तर भारतीय इसका जवाब चाहते हैं। एक-दूसरे से नफरत करना हिंदुत्व नहीं है। ठाकरे ने भाजपा पर हिंदुओं के बीच दरार पैदा करने का आरोप लगाया।
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भाजपा अकाली दल और शिवसेना को नहीं चाहते थे: उद्धव
उन्होंने कहा कि 25-30 साल तक शिवसेना ने राजनीतिक मित्रता की रक्षा की। हिंदुत्व का मतलब हमारे बीच गर्मजोशी है। वे (भाजपा) किसी को नहीं चाहते थे। वे अकाली दल और शिवसेना को नहीं चाहते थे। ठाकरे ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी को ‘राजधर्म’ के पालन की वाजपेयी की नसीहत का संदर्भ देते हुए कहा कि यह बाला साहेब ठाकरे थे जिन्होंने वर्तमान प्रधानमंत्री को तब बचाया था जब अटलजी (तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी) चाहते थे कि बाल ठाकरे ‘राजधर्म’ का सम्मान करें। तब बालासाहेब ने यह कहते हुए हस्तक्षेप किया था कि यह समय की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं हुआ होता तो वह (मोदी) यहां तक नहीं पहुंच पाते। गौरतलब है कि वाजपेयी ने ‘राजधर्म’ की नसीहत वर्ष 2002 के गुजरात दंगों के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी को बचाने के लिए दी थी। उन्होंने कहा कि शिवसेना के संस्थापक ने कभी नफरत नहीं पाली।
उन्होंने कहा कि हिंदू होने का मतलब कभी भी मराठी होना और उत्तर भारतीयों से नफरत करना नहीं था। बालासाहेब ठाकरे ने कभी भी हिंदुओं और मुसलमानों के बीच अंतर नहीं किया। उनका मानना था कि जो लोग देश के खिलाफ काम करते हैं, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो, उन्हें सजा मिलनी चाहिए। और यही हमारा हिंदुत्व है। भाजपा का मतलब हिंदुत्व नहीं है; मैं हिंदुत्व के उनके संस्करण में विश्वास नहीं करता।
अपनी गरिमा की रक्षा के लिए भाजपा से अलग हुआ: उद्धव
ठाकरे ने कहा कि वह अपनी गरिमा की रक्षा के लिए भाजपा के साथ गठबंधन से बाहर चले गए और 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के बाद महा विकास अघाड़ी (एमवीए) की सरकार बनाने के लिए राकांपा और कांग्रेस से हाथ मिला लिया। उन्होंने बाला साहेबंची शिवसेना गुट से संबंधित मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के बागी विधायकों के संदर्भ में कहा कि अगर मैं भाजपा से अलग नहीं हुआ होता, तो मैं अपने गले में पट्टा बांधकर रखने वाला गुलाम होता, जैसे मेरे कुछ लोग अब बन गए हैं।
बदनाम करने वाले एक अभियान के शिकार हो गए हैं: ठाकरे
ठाकरे ने कहा कि वह बदनाम करने वाले एक अभियान के शिकार हो गए हैं। जब भी वह उत्तर भारतीयों या मुसलमानों से मिलते हैं, तो उनके हिंदुत्व पर सवाल उठाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि आपसे मेरी मुलाकात की आलोचना की जाती है। अगर मैं मुसलमानों से मिलता हूं, तो कहा जाता है कि मैंने हिंदुत्व छोड़ दिया है। दो दिन पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुंबई आए तो किसकी रसोई में गए? अगर मैंने ऐसा किया होता तो मुझे हिंदू विरोधी कहा जाता, लेकिन अगर प्रधानमंत्री ऐसा करते हैं तो यह कहा जाता है कि उनका दिल बड़ा है। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि हमारे मन में बोहरा समुदाय के खिलाफ कुछ भी नहीं है। वे हमारे साथ हैं।
बता दें कि 10 फरवरी को मुंबई की अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बोहरा समुदाय के एक प्रमुख शैक्षणिक संस्थान अलजामिया-तुस-सैफियाह अरबी अकादमी के नए मरोल परिसर का उद्घाटन किया था और कहा था कि वह समुदाय के एक परिवार के सदस्य के रूप में यहां आए हैं।
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