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Unmute Bharat: 'संविधान पर पूरा विश्वास पर राजनीतिक सेक्युलरिज्म अब गाली बन चुका', विपक्षियों पर बरसे ओवैसी
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सार
देश में चुनावी सरगर्मियों के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कई ज्वलंत राजनीतिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी है। कई मोर्चों पर एक साथ सियासी निशाने साधे हैं।
असदुद्दीन ओवैसी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमर उजाला डिजिटल के विशेष पॉडकास्ट 'अनम्यूट भारत' में असदुद्दीन ओवैसी ने बंगाल-असम की राजनीति से लेकर ममता बनर्जी पर तीखा प्रहार किया और राजनीतिक सेक्युलरिज्म को गाली करार देते हुए विपक्षी दलों की नीतियों पर सवाल उठाए। इस खास बातचीत में ओवैसी ने अपने राजनीतिक रुख, सेक्युलरिज्म की मौजूदा स्थिति और खुद पर लगने वाले आरोपों का खुलकर जवाब दिया। बातचीत के दौरान उन्होंने देश के सर्वोच्च पद को लेकर अपनी एक ऐसी दिली ख्वाहिश भी जाहिर की, जो आने वाले समय में राजनीतिक गलियारों में बड़ी चर्चा का विषय बन सकती है।
पश्चिम बंगाल और टीएमसी के सेक्युलर रवैये पर बात करते हुए ओवैसी ने तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में दर्ज सेक्युलरिज्म पर उन्हें पूरा विश्वास है, लेकिन आजकल का ‘पॉलिटिकल सेक्युलरिज्म’ महज एक गाली बनकर रह गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए उन्होंने याद दिलाया कि 2004 में जब वह पहली बार सांसद बने थे, तब ममता खुद भाजपा को समर्थन दे रही थीं। राज्य में मुसलमानों की बदहाली का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि 29 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले बंगाल में सरकारी नौकरियों में उनकी हिस्सेदारी सिर्फ 8% है, और मालदा-मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में पानी में आर्सेनिक की भारी मात्रा उनकी जमीनी हकीकत बयां करती है।
राष्ट्रनीति और राजनीति पर दोहरे चेहरे से इनकार
कार्यक्रम की शुरुआत में जब ओवैसी से उनके तीखे बयानों और चुनावी रुख को लेकर दोहरे चेहरे पर सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। ओवैसी ने स्पष्ट किया कि उनका कोई दोहरा चेहरा नहीं है और वे जैसे हैं, वैसे ही जनता के सामने रहते हैं। उन्होंने कहा कि जब भारत की सुरक्षा और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की बात आती है, तो पूरा देश एक सुर में बोलता है और राष्ट्रनीति के मसले पर उनमें कोई विरोधाभास नहीं है। वहीं, जब देश में चुनाव होते हैं, तो राजनीतिक दलों के बीच अपनी पार्टी को जिताने और दूसरों को हराने की होड़ होती है, जो महज जम्हूरियत (लोकतंत्र) का तकाजा है।
भाजपा की बी-टीम वाले आरोपों पर बेपरवाह
सियासी गलियारों में ओवैसी और उनकी पार्टी पर अक्सर ‘भाजपा की बी-टीम’ होने का आरोप लगता है। इस पर बिल्कुल बेफिक्री जताते हुए ओवैसी ने कहा कि विरोधियों के इन आरोपों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि लोग जो बोलते हैं बोलें, इससे न उनकी रात की नींद खराब होती है और न ही दिन का चैन छिनता है। ओवैसी ने दृढ़ता से कहा कि उन्हें जो काम करना है वह करते रहेंगे और जब तक उनकी जिंदगी है, वह बिना किसी की परवाह किए अपने रास्ते पर चलते रहेंगे।
यूएपीए कानून पर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया
2019 में अमित शाह द्वारा यूएपीए कानून को और सख्त बनाए जाने और कांग्रेस द्वारा उसका समर्थन करने के सवाल पर ओवैसी ने कांग्रेस को ही आईना दिखा दिया। उन्होंने कहा कि इस कानून की नींव 2008 में पी. चिदंबरम ने पोटा के प्रावधानों को उठाकर रखी थी। ओवैसी ने याद दिलाया कि उस वक्त यूपीए सरकार को समर्थन देने के बावजूद, उन्होंने संसद में इस आतंकवाद निरोधी कानून का कड़ा विरोध किया था और इसके खिलाफ वोट डाला था।
मोदी सरकार की विदेश नीति पर हमला
विदेश नीति के मोर्चे पर ओवैसी ने मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी दशकों पुरानी गुटनिरपेक्ष नीति को तबाह कर दिया है। ओवैसी ने सरकार की कूटनीतिक विफलताओं को गिनाते हुए कहा कि एक तरफ भारत ने ईरान के साथ चाबहार पोर्ट बनाया और उनके जहाजों का स्वागत किया, लेकिन दूसरी तरफ अमेरिकी दबाव में ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया। साथ ही उन्होंने मालदीव जैसे पड़ोसी देशों से भारत के रणनीतिक प्रभाव कम होने और वहां से बाहर निकलने पर भी चिंता जताई।
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पश्चिम बंगाल और टीएमसी के सेक्युलर रवैये पर बात करते हुए ओवैसी ने तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में दर्ज सेक्युलरिज्म पर उन्हें पूरा विश्वास है, लेकिन आजकल का ‘पॉलिटिकल सेक्युलरिज्म’ महज एक गाली बनकर रह गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए उन्होंने याद दिलाया कि 2004 में जब वह पहली बार सांसद बने थे, तब ममता खुद भाजपा को समर्थन दे रही थीं। राज्य में मुसलमानों की बदहाली का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि 29 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले बंगाल में सरकारी नौकरियों में उनकी हिस्सेदारी सिर्फ 8% है, और मालदा-मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में पानी में आर्सेनिक की भारी मात्रा उनकी जमीनी हकीकत बयां करती है।
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राष्ट्रनीति और राजनीति पर दोहरे चेहरे से इनकार
कार्यक्रम की शुरुआत में जब ओवैसी से उनके तीखे बयानों और चुनावी रुख को लेकर दोहरे चेहरे पर सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। ओवैसी ने स्पष्ट किया कि उनका कोई दोहरा चेहरा नहीं है और वे जैसे हैं, वैसे ही जनता के सामने रहते हैं। उन्होंने कहा कि जब भारत की सुरक्षा और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की बात आती है, तो पूरा देश एक सुर में बोलता है और राष्ट्रनीति के मसले पर उनमें कोई विरोधाभास नहीं है। वहीं, जब देश में चुनाव होते हैं, तो राजनीतिक दलों के बीच अपनी पार्टी को जिताने और दूसरों को हराने की होड़ होती है, जो महज जम्हूरियत (लोकतंत्र) का तकाजा है।
भाजपा की बी-टीम वाले आरोपों पर बेपरवाह
सियासी गलियारों में ओवैसी और उनकी पार्टी पर अक्सर ‘भाजपा की बी-टीम’ होने का आरोप लगता है। इस पर बिल्कुल बेफिक्री जताते हुए ओवैसी ने कहा कि विरोधियों के इन आरोपों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि लोग जो बोलते हैं बोलें, इससे न उनकी रात की नींद खराब होती है और न ही दिन का चैन छिनता है। ओवैसी ने दृढ़ता से कहा कि उन्हें जो काम करना है वह करते रहेंगे और जब तक उनकी जिंदगी है, वह बिना किसी की परवाह किए अपने रास्ते पर चलते रहेंगे।
यूएपीए कानून पर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया
2019 में अमित शाह द्वारा यूएपीए कानून को और सख्त बनाए जाने और कांग्रेस द्वारा उसका समर्थन करने के सवाल पर ओवैसी ने कांग्रेस को ही आईना दिखा दिया। उन्होंने कहा कि इस कानून की नींव 2008 में पी. चिदंबरम ने पोटा के प्रावधानों को उठाकर रखी थी। ओवैसी ने याद दिलाया कि उस वक्त यूपीए सरकार को समर्थन देने के बावजूद, उन्होंने संसद में इस आतंकवाद निरोधी कानून का कड़ा विरोध किया था और इसके खिलाफ वोट डाला था।
मोदी सरकार की विदेश नीति पर हमला
विदेश नीति के मोर्चे पर ओवैसी ने मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी दशकों पुरानी गुटनिरपेक्ष नीति को तबाह कर दिया है। ओवैसी ने सरकार की कूटनीतिक विफलताओं को गिनाते हुए कहा कि एक तरफ भारत ने ईरान के साथ चाबहार पोर्ट बनाया और उनके जहाजों का स्वागत किया, लेकिन दूसरी तरफ अमेरिकी दबाव में ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया। साथ ही उन्होंने मालदीव जैसे पड़ोसी देशों से भारत के रणनीतिक प्रभाव कम होने और वहां से बाहर निकलने पर भी चिंता जताई।
ओवैसी का सबसे बड़ा ख्वाब ओवैसी से जब पूछा गया कि क्या भविष्य में भारत का प्रधानमंत्री कोई मुस्लिम चेहरा बन सकता है? इस पर उन्होंने अपने दिल की बात साझा करते हुए कहा कि उनकी ख्वाहिश देश में एक मुस्लिम महिला हिजाब पहनकर भारत की प्रधानमंत्री बने। उन्होंने दृढ़ता के साथ कहा कि ऐसा बिल्कुल हो सकता है।
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