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सीट का समीकरण: 50 साल के ब्रेक के बाद फिर अस्तित्व में आई बुढाना सीट, बीते तीन चुनाव में तीन दलों को मिली जीत
Sat, 15 Aug 2026 06:03 AM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
Published by: अमन तिवारी
Updated Sat, 15 Aug 2026 06:03 AM IST
सार
मुजफ्फरनगर की बुढ़ाना विधानसभा सीट का सियासी इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। 2022 में आरएलडी ने भाजपा को बड़े अंतर से हराया। मुस्लिम, जाट और एससी मतदाता यहां अहम भूमिका निभाते हैं। जानिए बुढ़ाना सीट का चुनावी इतिहास और जातीय समीकरण...
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बुढ़ाना विधानसभा सीट का समीकरण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में अगले साल यानी 2027 में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इन चुनावों को लेकर अभी से राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको उत्तर प्रदेश की हर विधानसभा सीट के इतिहास, सामाजिक ताने-बाने और उसके राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से हमारी खास सीरीज 'सीट का समीकरण' में बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात मुजफ्फरनगर जिले की बुढ़ाना विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इसका अब तक का इतिहास क्या रहा है।
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पहले जानते हैं बुढ़ाना सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं। इन जिलों में एक जिला मुजफ्फरनगर है। जिले में कुल छह विधानसभा सीटें हैं। इनमें- बुढ़ाना, चरथावल, पुरकाजी, मुजफ्फरनगर, खतौली और मीरापुर शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम बुढ़ाना विधानसभा सीट की बात करेंगे। बुढ़ाना विधानसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आई थी। इस क्षेत्र में पहला विधानसभा चुनाव भी वर्ष 1957 में ही आयोजित किया गया था। इस विधानसभा क्षेत्र के पहले विधायक कुंवर असगर अली थे, जिन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी।
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बुढ़ाना विधानसभा सीट का समीकरण
- फोटो : अमर उजाला
सबसे पहले बात 2022 चुनाव की
2022 के चुनावों की बात करें तो, इन चुनावों में बुढ़ाना से भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में बुढ़ाना विधानसभा सीट से राष्ट्रीय लोक दल के राजपाल सिंह बालियान ने जीत हासिल की। उन्होंने भाजपा के उमेश मलिक को 28,000 से अधिक वोटों से हराया। इस चुनाव में आरएलडी के राजपाल को 1,31,093 वोट मिले, जबकि भाजपा के उमेश मलिक को 1,02,783 वोट मिले। वहीं बसपा के अनीस 10,397 वोट के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
बुढ़ाना विधानसभा सीट का जातीय समीकरण कैसा है?
बुढ़ाना विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में मुस्लिम, जाट और अनुसूचित जाति (SC) की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सबसे ज्यादा आबादी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो लगभग 40% हैं। दूसरे स्थान पर करीब 20% जाट मतदाता और तीसरे स्थान पर करीब 11% अनुसूचित जाति के मतदाता हैं। ये तीनों समुदाय मिलकर कुल मतदाताओं का लगभग 71% हिस्सा बनते हैं, जिसके कारण इस सीट पर जीत का मार्ग इन्हीं के सियासी रुझान से तय होता है। वहीं, बाकी बचे अन्य जातियों के मतदाता हैं।
2022 के चुनावों की बात करें तो, इन चुनावों में बुढ़ाना से भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में बुढ़ाना विधानसभा सीट से राष्ट्रीय लोक दल के राजपाल सिंह बालियान ने जीत हासिल की। उन्होंने भाजपा के उमेश मलिक को 28,000 से अधिक वोटों से हराया। इस चुनाव में आरएलडी के राजपाल को 1,31,093 वोट मिले, जबकि भाजपा के उमेश मलिक को 1,02,783 वोट मिले। वहीं बसपा के अनीस 10,397 वोट के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
बुढ़ाना विधानसभा सीट का जातीय समीकरण कैसा है?
बुढ़ाना विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में मुस्लिम, जाट और अनुसूचित जाति (SC) की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सबसे ज्यादा आबादी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो लगभग 40% हैं। दूसरे स्थान पर करीब 20% जाट मतदाता और तीसरे स्थान पर करीब 11% अनुसूचित जाति के मतदाता हैं। ये तीनों समुदाय मिलकर कुल मतदाताओं का लगभग 71% हिस्सा बनते हैं, जिसके कारण इस सीट पर जीत का मार्ग इन्हीं के सियासी रुझान से तय होता है। वहीं, बाकी बचे अन्य जातियों के मतदाता हैं।
बुढ़ाना विधानसभा सीट का समीकरण
- फोटो : अमर उजाला
बुढ़ाना विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
1957 में अस्तित्व में आई बुढ़ाना विधानसभा सीट पर पहले चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशी कुंवर असगर अली ने जीत हासिल की थी। इन चुनावों में उन्होंने कांग्रेस के श्री चंद को हराया। चुनावों में असगर अली को 32,725 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के श्री चंद को 28,425 वोटों से संतोष करना पड़ा था।
इसके बाद 1962 में बुढ़ाना विधानसभा सीट से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के विजय पाल सिंह को जीत मिली। उन्होंने कांग्रेस के मोहकम सिंह को 27,208 वोटों के भारी अंतर से हराया। इन चुनावों में सीपीआई के विजय पाल को 45,404 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के मोहकम सिंह को 18,196 वोटों से संतोष करना पड़ा।
बुढ़ाना विधानसभा सीट हुई समाप्त
इन चुनावों के बाद 1967 के परिसीमन में बुढ़ाना विधानसभा सीट को समाप्त कर दिया गया था। हालांकि, साल 2008 में नए परिसीमन के बाद इस सीट का फिर से पुनर्गठन किया गया और साल 2012 में यहां दोबारा चुनाव हुए।
1957 में अस्तित्व में आई बुढ़ाना विधानसभा सीट पर पहले चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशी कुंवर असगर अली ने जीत हासिल की थी। इन चुनावों में उन्होंने कांग्रेस के श्री चंद को हराया। चुनावों में असगर अली को 32,725 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के श्री चंद को 28,425 वोटों से संतोष करना पड़ा था।
इसके बाद 1962 में बुढ़ाना विधानसभा सीट से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के विजय पाल सिंह को जीत मिली। उन्होंने कांग्रेस के मोहकम सिंह को 27,208 वोटों के भारी अंतर से हराया। इन चुनावों में सीपीआई के विजय पाल को 45,404 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के मोहकम सिंह को 18,196 वोटों से संतोष करना पड़ा।
बुढ़ाना विधानसभा सीट हुई समाप्त
इन चुनावों के बाद 1967 के परिसीमन में बुढ़ाना विधानसभा सीट को समाप्त कर दिया गया था। हालांकि, साल 2008 में नए परिसीमन के बाद इस सीट का फिर से पुनर्गठन किया गया और साल 2012 में यहां दोबारा चुनाव हुए।
पुनर्गठन के बाद कैसे रहे नतीजे?
2008 में बुढ़ाना विधानसभा सीट के पुनर्गठन के बाद 2012 में यहां चुनाव हुए। इन चुनावों में समाजवादी पार्टी (सपा) के नवाजिश आलम खान ने जीत हासिल की। उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के राजपाल सिंह बालियान को 10,588 वोटों से हराया। इन चुनावों में सपा के आलम खान को 68,210 वोट मिले तो वहीं आरएलडी के राजपाल सिंह बालियान को 57,622 वोटों से संतोष करना पड़ा।
2012 के बाद उत्तर प्रदेश में 2017 में चुनाव हुआ। इन चुनावों में राज्य में भाजपा का बोलबाला रहा, जिसका असर बुढ़ाना विधानसभा सीट पर भी पड़ा। इन चुनावों में बुढ़ाना विधानसभा सीट से भाजपा के उमेश मलिक ने जीत हासिल की। उन्होंने सपा के प्रमोद त्यागी और बसपा की सईदा बेगम को हराया। चुनावों में भाजपा के उमेश मलिक को 97,781 वोट मिले, जबकि सपा के प्रमोद त्यागी को 84,580 और बसपा की सईदा बेगम को 30,034 वोटों से संतोष करना पड़ा।
2008 में बुढ़ाना विधानसभा सीट के पुनर्गठन के बाद 2012 में यहां चुनाव हुए। इन चुनावों में समाजवादी पार्टी (सपा) के नवाजिश आलम खान ने जीत हासिल की। उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के राजपाल सिंह बालियान को 10,588 वोटों से हराया। इन चुनावों में सपा के आलम खान को 68,210 वोट मिले तो वहीं आरएलडी के राजपाल सिंह बालियान को 57,622 वोटों से संतोष करना पड़ा।
2012 के बाद उत्तर प्रदेश में 2017 में चुनाव हुआ। इन चुनावों में राज्य में भाजपा का बोलबाला रहा, जिसका असर बुढ़ाना विधानसभा सीट पर भी पड़ा। इन चुनावों में बुढ़ाना विधानसभा सीट से भाजपा के उमेश मलिक ने जीत हासिल की। उन्होंने सपा के प्रमोद त्यागी और बसपा की सईदा बेगम को हराया। चुनावों में भाजपा के उमेश मलिक को 97,781 वोट मिले, जबकि सपा के प्रमोद त्यागी को 84,580 और बसपा की सईदा बेगम को 30,034 वोटों से संतोष करना पड़ा।