भगवा जर्सी पर बवाल: 'आज हॉकी, कल सेना की वर्दी भी हो सकती है', विपक्ष ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
भारतीय हॉकी टीम की भगवा जर्सी को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस और टीएमसी नेताओं ने इसे खेलों के भगवाकरण की कोशिश बताया। प्रियंका गांधी ने आरएसएस और शिक्षा नीति पर सवाल उठाए।
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भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदलकर भगवा करने पर विपक्ष ने सरकार की आलोचना की। विपक्षी नेताओं ने गुरुवार को चिंता व्यक्त की कि भारतीय सेना की वर्दी का रंग भी बदला जा सकता है।इसके साथ ही उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर हर जगह भगवा रंग थोपने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
प्रियंका वाड्रा ने क्या कहा?
संसद परिसर में विपक्षी नेताओं की ये टिप्पणियां भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों द्वारा अपनी पारंपरिक नीली किट के बजाय भगवा जर्सी अपनाने के जवाब में आईं। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि भले ही सरकार आरएसएस से प्रभावित शिक्षा नीति के माध्यम से वर्दी और यहां तक कि इतिहास में भी बदलाव कर सकती है, लेकिन इन मामलों पर युवाओं के विचारों को समझना आवश्यक है।
उन्होंने कहा, 'इस देश की आजादी की लड़ाई सत्य और अहिंसा पर आधारित थी। इसमें आरएसएस का कोई नामोनिशान नहीं था।' प्रियंका ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्र सत्य को पहचानता है, और जो लोग इसे नहीं पहचानते हैं वे भाजपा-आरएसएस के असली इरादों को समझने लगे हैं।
'उन पर कोई कैसे भरोसा कर सकता है?'
कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा हर चीज का भगवाकरण करना चाहती है। इसके साथ ही चेतावनी दी कि हॉकी की जर्सी बदलने के बाद वे सेना की वर्दी के साथ भी ऐसा ही कर सकते हैं। उन्होंने कहा, 'आज उन्होंने हॉकी के साथ ऐसा किया है; कल वे सेना के साथ भी ऐसा ही कर सकते हैं। उन पर कोई कैसे भरोसा कर सकता है? वे हर जगह भगवा रंग चाहते हैं।'
इस कदम को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सिंह ने जोर देकर कहा कि सत्ता में आने पर किसी भी राजनीतिक दल को ऐसे प्रतीकों में बदलाव नहीं करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, 'हर चीज का अपना इतिहास और महत्व होता है। लेकिन ये बदलाव रुकते नहीं हैं। हम क्या कर सकते हैं?'
भाजपा की संकीर्ण विचारधारा को दर्शाता है
कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने भी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि यह विवाद भाजपा की संकीर्ण विचारधारा को दर्शाता है। उन्होंने कहा, 'चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो या अन्य क्षेत्र, हर जगह एक विशेष विचारधारा थोपने का प्रयास किया जा रहा है। यह विवाद उसी संकीर्ण सोच का प्रतीक है।'
टीएमसी नेता ने क्या कहा?
टीएमसी नेता कीर्ति आजाद ने कहा, 'भगवा बनाम हरे रंग का सवाल ही मायने नहीं रखता। मैदान पर प्रदर्शन मायने रखता है। क्रिकेट में भी हम सफेद कपड़े पहनकर खेलते थे। रंग मायने नहीं रखता; प्रदर्शन मायने रखता है।' उन्होंने कहा, 'याद रखिए, आप किसी मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे या चर्च में जाकर सौ रुपये चढ़ा सकते हैं और प्रार्थना कर सकते हैं, 'हे भगवान, कल मुझे शतक बनाने में मदद कीजिए।' ऐसा नहीं होता। यह आप अपने स्वयं के प्रयासों से हासिल करते हैं। इसलिए, यह कपड़ों के रंग के बारे में नहीं है। यह खेल में आपकी क्षमता के बारे में है।'
इसी दौरान, आजाद ने पारंपरिक नीली जर्सी को बदलने की आवश्यकता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, 'अगर नीला रंग परंपरागत रूप से हमारे खेलों से जुड़ा रंग रहा है, तो ऐसा ही रहना चाहिए। इस पर धार्मिक रंग क्यों थोपा जाए?'