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Vikram Sood: 'भारत की तरक्की नहीं चाहता अमेरिकी डीप स्टेट, ट्रंप इसका हिस्सा नहीं', रॉ के पूर्व प्रमुख का बयान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 02 Oct 2025 03:11 PM IST
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सार

Vikram Sood: खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग के पूर्व प्रमुख विक्रम सूद ने कहा कि अमेरिका-पाकिस्तान संबंध राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यक्तिगत नाराजगी से गहरे हुए हैं, क्योंकि भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' में उनकी भूमिका को खारिज कर दिया था। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका का डीप स्टेट भारत की आर्थिक प्रगति रोकना चाहता है और चीन के बाद भारत को उभरती ताकत मानता है।

'US-Pak ties result of Trump's personal pique': Ex-RAW chief Vikram Sood hints at deep state against India
विक्रम सूद - फोटो : एएनआई
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विस्तार

भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (आरएंडएडब्ल्यू) के पूर्व प्रमुख विक्रम सूद ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका और पाकिस्तान के संबंध हाल ही में इसलिए मजबूत हुए, क्योंकि भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान संघर्षविराम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका के दावे को खंडन कर दिया था। 
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'भारत की आर्थिक प्रगति नहीं चाहता अमेरिका'
विक्रम सूद ने एक इंटरव्यू में कहा, अमेरिका में एक 'डीप स्टेट' (गोपनीय तरीके से काम करने वाली ताकत) काम करती है, जो भारत की आर्थिक प्रगति में बाधा डालती है। उन्होंने कहा, अमेरिका-पाकिस्तान संबंध ट्रंप की व्यक्तिगत नाराजगी से शुरू हुए। जब हमने उन्हें संघर्षविराम का श्रेय देने से कथित तौर पर इनकार किया, तब पाकिस्तान कहा- धन्यवाद सर, आप नोबेल पुरस्कार के लायक हैं। यही डीप स्टेट करती है। वह नहीं चाहती कि भारत आर्थिक रूप से विकास करे। 
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'अमेरिका ने चीन से सीख लिया सबक'
उन्होंने आगे कहा, अमेरिका को भारत की आर्थिक प्रगति से डर लगता है, क्योंकि अब भारत और चीन दोनों बड़ी आर्थिक ताकत बन रही हैं। सूद ने कहा, उनके लिए राष्ट्रवादी हित कोई चीज नहीं है, क्योंकि जब भी हम राष्ट्रवाद की बात करते हैं, तो वह इसे 'हिंदू राष्ट्रवाद' कहते हैं। डर यह है कि चीन के बाद अब एक और बड़ी आर्थिक ताकत भारत है। उसने (अमेरिका) चीन से अपना सबक सीख लिया है।

पहली बार तुर्किये में इस्तेमाल हुआ था 'डीप स्टेट' शब्द
विक्रम सूद की यह टिप्पणी ऐसे समय आई, जब डोनाल्ड ट्रंप ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को डिनर पर बुलाया। मंगलवार को ट्रंप ने फिर पाकिस्तान के नेतृत्व की तारीफ की और असीम मुनीर को 'बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति' बताया। जब सूद से डीप स्टेट और भारत के पड़ोसी देशों में अस्थिरता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, यह शब्द पहली बार तुर्किये में इस्तेमाल हुआ था, जब खुफिया एजेंसी, सेना और पुलिस के अधिकारी एक कार दुर्घटना में मारे गए थे। उनके साथ एक ड्रग डीलर भी था, जिसके पास उसका पैसा, ड्रग्स और हथियार थे। इसका मतलब यही है कि डीप स्टेट  एक-दूसरे से मिलकर ऐसे काम करता है। 

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'डीप स्टेट का हिस्सा नहीं डोनाल्ड ट्रंप'
सूद ने कहा कि अब डीप स्टेट का मतलब बदल गया है। इसमें कॉरपोरेट, सैन्य खुफिया एजेंसियां और अन्य ताकतवर लोग शामिल होते हैं, जो पीछे से डोरियां खींचते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप इस डीप स्टेट का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने कहा, इसका मतलब यह समय के साथ बदला है। अब इसमें वे सभी लोग शामिल हैं जो पर्दे के पीछे से ताकत हैं- कॉरपोरेट, सैन्य खुफिया एजेंसी। अमेरिका में केवल व्हाइट हाउस या कांग्रेस (संसद) नहीं, बल्कि वे कंपनियां भी (डीप स्टेट को) तय करती हैं जो हथियार बनाती हैं। उनके राज्य के सांसद उनके इशारों पर काम करते हैं और सरकार पर दबाव डालते हैं कि वे कोई खास कदम उठाए, ताकि उनका सामान बिके। इसी तरह तय होता है कि इस्राइल को कैसे संभालना है, पाकिस्तान को कैसे, भारत को कैसे… वहां बड़े-बड़े थिंक टैंक हैं।  

सूद ने कहा, अगर आप उनका चार्ट देखें तो उसमें लगभग हर ताकतवर व्यक्ति शामिल है, बस डोनाल्ड ट्रंप नहीं। इन्हें वॉल स्ट्रीट स्टेट डिपार्टमेंट भी कहा जाता है। यही उनका पर्दे के पीछे से काम करने का तरीका है। 



 
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