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Venus Lava Tube Discovery: शुक्र ग्रह के नीचे विशाल खाली लावा सुरंग के संकेत, रडार डाटा ने खोला भूगर्भीय राज

अमर उजाला नेटवर्क Published by: हिमांशु चंदेल Updated Thu, 12 Feb 2026 05:21 AM IST
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सार

शुक्र ग्रह की सतह के नीचे विशाल खाली लावा सुरंग के संकेत मिले हैं। रडार डाटा के विश्लेषण से वैज्ञानिकों ने यह संरचना पहचानी। अनुमान है कि सुरंग करीब एक किलोमीटर चौड़ी और दर्जनों किलोमीटर लंबी हो सकती है। यह खोज शुक्र पर पुराने ज्वालामुखीय गतिविधि के प्रमाण देती है। 

Venus lava tube discovery underground tunnel radar data mapping study Magellan geology research
राहु ग्रह - फोटो : freepik
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विस्तार

शुक्र ग्रह की तपती सतह के नीचे एक विशाल खाली ज्वालामुखीय सुरंग के प्रमाण मिलने से वैज्ञानिक जगत में हलचल मच गई है। रडार डाटा के गहन विश्लेषण पर शोधकर्ताओं ने संकेत पाए हैं कि शुक्र के भीतर भी शक्तिशाली ज्वालामुखीय गतिविधियां हुई हैं, जिन्होंने ग्रह की सतह को आकार दिया। यह खोज न केवल शुक्र की भूगर्भीय संरचना को नए सिरे से समझने का रास्ता खोलती है, बल्कि सौरमंडल के अन्य पथरीले ग्रहों के विकास पर भी नई रोशनी डालती है।

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इटली के ट्रेंटो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का यह अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित किया गया है। शोध नासा के मैगलन मिशन की ओर से 1990 से 1992 के बीच एकत्र किए गए रडार आंकड़ों पर आधारित है। शुक्र ग्रह को लंबे समय से पृथ्वी का जुड़वां ग्रह कहा जाता रहा है, क्योंकि उसका आकार और संरचना पृथ्वी से मिलती-जुलती है। लेकिन वहां का वातावरण बेहद घना है और तापमान अत्यधिक ऊंचा रहता है।
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मोटे बादल पूरे ग्रह को ढके रहते हैं, जिससे सतह को सीधे कैमरों से देखना लगभग असंभव हो जाता है। इसी वजह से वैज्ञानिक शुक्र का अध्ययन रडार तकनीक से करते हैं। रडार तरंगें घने बादलों को पार कर सतह की बनावट की जानकारी देती हैं। जब किसी ग्रह पर ज्वालामुखी से पिघला हुआ लावा बहता है, तो कुछ समय बाद उसकी ऊपरी परत ठंडी होकर सख्त हो जाती है, जबकि अंदर का लावा बहता रहता है। जब यह अंदरूनी लावा पूरी तरह निकल जाता है, तो उसके पीछे एक खोखली सुरंग बच जाती है। इसी संरचना को लावा ट्यूब या लावा सुरंग कहा जाता है। पृथ्वी, मंगल और चंद्रमा पर पहले ही ऐसी लावा सुरंगों के संकेत मिल चुके हैं।

सुरंग एक किलोमीटर चौड़ी और सैकड़ों मीटर गहरी
शोधकर्ताओं के अनुसार यह लावा सुरंग लगभग एक किलोमीटर चौड़ी हो सकती है। इसकी छत की मोटाई कम से कम 150 मीटर आंकी गई है, जबकि अंदर का खाली हिस्सा लगभग 375 मीटर गहरा हो सकता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह सुरंग करीब 45 किलोमीटर तक फैली हो सकती है, हालांकि फिलहाल उसके केवल एक हिस्से की ही स्पष्ट पुष्टि हो सकी है।

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अंतरिक्ष यात्रियों के लिए प्राकृतिक सुरक्षित आश्रय
वैज्ञानिक मानते हैं कि भविष्य में ऐसी विशाल लावा सुरंगें अंतरिक्ष यात्रियों के लिए प्राकृतिक सुरक्षित आश्रय का काम कर सकती हैं। शुक्र ग्रह की सतह पर तापमान 460 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और वहां घातक विकिरण तथा माइक्रोमीटियोराइट्स का खतरा भी रहता है, लेकिन भूमिगत लावा ट्यूब इन खतरों से सुरक्षा प्रदान कर सकती हैं।

मंगल और चंद्रमा के लिए भी इसी तरह की सुरंगों को संभावित मानव ठिकानों के रूप में देखा जा रहा है। अगर शुक्र पर मौजूद इन विशाल संरचनाओं की भविष्य के मिशनों में पुष्टि हो जाती है तो ये दीर्घकालिक वैज्ञानिक अभियानों और रोबोटिक बेस स्थापित करने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

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