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लाल किले के पास धमाका: UN की रिपोर्ट में दावा- आतंकी संगठन जैश से जुड़े हैं तार, महिला दहशतगर्दों पर भी चिंता

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र Published by: शुभम कुमार Updated Thu, 12 Feb 2026 10:36 AM IST
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सार

बीते साल 9 नवंबर को लाल किले के पास हुए धमाके ने देशभर को झकझोर कर रख दिया था। इस हमले में 15 लोगों की मौत हो गई थी। ऐसे में यूएन की एक ताजा रिपोर्ट ने मामले में कई गंभीर सवाल और नई चिंताओं को जन्म दिया है। रिपोर्ट में जैश-ए-मोहम्मद को हमले का जिम्मेदार बताया गया और संगठन की नई साजिश के तहत महिला दहशतगर्दों को लेकर चिंता भी जताई गई है। 

UN Report Jaish-e-Mohammed responsible for Red Fort blast what is the new women's wing concern growing
लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास धमाका - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पुरानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास 9 नवंबर को हुआ जोरदार धमाका पूरे देश के लिए गहरे सदमे की तरह था। इस हमले में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए। ऐसे में अब संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की आतंकवाद निगरानी टीम की ताजा रिपोर्ट ने इस हमले से पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के जुड़े होने का दावा किया है। रिपोर्ट में संगठन की नई साजिशों पर भी चिंता जताई गई है, जिसमें महिलाओं के लिए अलग विंग बनाना और आतंकी गतिविधियों में उनकी भागीदारी शामिल है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि इससे संगठन का नेटवर्क बढ़ सकता है और सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने में मदद मिल सकती है। दूसरी ओर यूएन सुरक्षा परिषद को सौंपी गई रिपोर्ट में एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शंस मॉनिटरिंग टीम ने बताया कि एक सदस्य देश ने जानकारी दी है कि जैश-ए-मोहम्मद ने 9 नवंबर को नई दिल्ली के लाल किले पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी। इस हमले में 15 लोगों की मौत हुई थी। 
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यूएन की रिपोर्ट में क्या-क्या?

  • 9 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर हुए हमले में 15 लोगों की मौत हुई।
  • संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद निगरानी टीम ने दावा किया कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद इस हमले से जुड़ा है।
  • जैश ने 8 अक्तूबर को महिलाओं के लिए ‘जमात उल-मुमिनात’ नामक विंग बनाया, जिसका उद्देश्य आतंकी गतिविधियों में सहयोग करना है।
  • इस कदम से संगठन नए भर्ती और संचालन मॉडल अपना रहा है, महिलाओं को सहायक और सक्रिय भूमिकाओं में शामिल कर सुरक्षा जांच से बचने की कोशिश कर रहा है।
  • यह संगठन 2000 में बना, मुख्य रूप से भारत, विशेषकर जम्मू-कश्मीर में सक्रिय रहा, और कई हाई-प्रोफाइल हमलों के लिए जिम्मेदार है।
  • जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर पर यूएन द्वारा यात्रा प्रतिबंध और संपत्ति फ्रीज जैसी पाबंदियां लगी हैं।


क्या है इस नए विंग का मकसद?
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 8 अक्तूबर को जैश प्रमुख मसूद अजहर ने ‘जमात उल-मुमिनात’ नाम से महिलाओं के लिए एक अलग विंग बनाने की घोषणा की। यूएन टीम के अनुसार, इस विंग का मकसद आतंकी गतिविधियों में सहयोग करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह महिलाओं को शामिल करना संगठन की नई साजिश का हिस्सा हो सकता है, ताकि वह अपने नेटवर्क को बढ़ा सके और सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बच सके।



जैश-एक मोहम्मद पर संयुक्त राष्ट्र का रुख
बता दें कि जैश-ए-मोहम्मद को संयुक्त राष्ट्र ने अल-कायदा से जुड़ा आतंकी संगठन घोषित कर रखा है। इसकी स्थापना साल 2000 में हुई थी और यह खासकर जम्मू-कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों में कई बड़े हमलों के लिए जिम्मेदार रहा है। इसके सरगना मसूद अजहर पर यूएन ने यात्रा प्रतिबंध और संपत्ति फ्रीज जैसी पाबंदियां लगा रखी हैं।

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यूएन के देशों की अलग-अलग राय

हालांकि, दूसरी ओर रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सदस्य देशों के बीच जैश की मौजूदा स्थिति को लेकर अलग-अलग राय है। कुछ देश इसे अभी भी सक्रिय और खतरनाक मानते हैं, जबकि एक सदस्य देश ने इसे निष्क्रिय बताया है। इन अलग-अलग आकलनों की वजह से दक्षिण एशिया में आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग में मुश्किलें आती रही हैं।

रिपोर्ट में मध्य और दक्षिण एशिया आतंकी खतरे का जिक्र
यूएन की रिपोर्ट में मध्य और दक्षिण एशिया में बदलते आतंकी खतरे का भी जिक्र है। इसमें कहा गया है कि कई चरमपंथी संगठन क्षेत्रीय अस्थिरता और सीमापार नेटवर्क का फायदा उठा रहे हैं। लगातार दबाव के बावजूद जैश जैसे संगठन नए तरीके अपनाकर खुद को फिर से संगठित करने और बड़े हमले करने की क्षमता दिखा रहे हैं। इसके साथ ही अलग से, रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक अन्य हमले में शामिल तीन संदिग्धों को जुलाई में सुरक्षा बलों ने मार गिराया था।

गौरतलब है कि यह क्षेत्र में जारी आतंक विरोधी अभियानों को दर्शाता है। कुल मिलाकर देखा जाए तो यूएन की इस रिपोर्ट ने साफ किया है कि भले ही कुछ आतंकी संगठन कमजोर पड़े हों, लेकिन उनकी नई साजिश और प्रतीकात्मक ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता अब भी क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है।

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