उपराष्ट्रपति चुनाव: वेंकैया नयाडु बनाम गोपालकृष्ण गांधी
आज देश के 15वें उपराष्ट्रपति के लिए चुनाव हो रहा है। इस चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी समेत संदन में लगभग सभी सदस्यों ने वोटिंग में हिस्सा लिया। इस चुनाव में एनडीए की ओर से एम वेंकैया नायडु को उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि यूपीए ने इस पद के गोपालकृष्ण गांधी का नाम आगे किया है।
वहीं लोगों का मानना है कि यह चुनाव महज एक औपचारिकता है, क्योंकि आकंड़ों पर नजर डाले तो एनडीए उम्मीदवार वेंकैया नायडु जीत रहे हैं। लेकिन इस पूरे मुद्दे पर विपक्ष उम्मीदवार गोपालकृष्ण गांधी का कहना है कि कोई भी चुनाव एक तरफा नहीं होता है। चुनाव में दो लोग खड़े हैं तो वह एक तरफा कैसे हो सकता है। जीत किसी एक की होती है।
आईए एक नजर डालते हैं इस चुनाव के आंकड़ों पर। इस चुनाव में 777 सांसद अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। इनमें लोकसभा में एनडीए के 340 तो राज्यसभा में 85 सांसद हैं। इसके अलावा एआईएडीएमके के दोनों धड़ों, इनेलो, टीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस ने भी एनडीए उम्मीदवार वेंकैया नायडू को समर्थन देने की घोषणा की है। इन दलों के सांसदों की संख्या 26 है।
इस प्रकार एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में घोषित तौर पर 451 सांसद हैं, जबकि भाजपा कुछ निर्दलीय सांसदों को भी साधने की कोशिश कर रही है। ऐसे में विपक्ष के उम्मीदवार गोपाल कृष्ण गांधी की उम्मीदवारी महज औपचारिकता ही है। जबकि कांग्रेस के पास राज्यसभा में 57 सांसद हैं।
हमेशा की तरह इस बार भी उपराष्ट्रपति चुनाव में सीक्रेट बैलेट और विशेष कलम का इस्तेमाल होगा। वोट देने के लिए सांसदों को आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए विशेष कलम का ही उपयोग करना होगा। ऐसा नहीं करने की स्थिति में सांसदों के वोट अमान्य हो जाएंगे।
कैसा रहा अब तक का सफर
वेकैंया नायडू
जन्म- जुलाई, 1949, नेल्लोर, आंध्रप्रदेश
शिक्षा- लॉ ग्रेजुएट
राजनीति- 1977-80 में जनता पार्टी छात्र शाखा का अध्यक्ष
1980-80, आंध्र प्रदेश में भाजपा विधायक दल का नेता
1998- पहली बार कर्नाटक से राज्यसभा सांसद
2000 में एनडीए सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री
गोपाल कृष्ण गांधी
जन्म- अप्रैल, 1945
शिक्षा- एमए (अंग्रेजी)
प्रशासनिक अनुभव
1968 से 1992 आईएएस के रूप में कार्य
1985-87, उप राष्ट्रपति के सचिव, 1987-92, राष्ट्रपति के संयुक्त सचिव
1997 में राष्ट्रपति के सचिव
ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका नार्वे में भारतीय राजनयिक के रूप में कार्य
2004- 2009 पश्चिम बंगाल के राज्यपाल