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युद्ध और महंगे ईंधन ने बिगाड़ा एयरलाइन का गणित:जेट फ्यूल महंगा होने से घट सकता है मुनाफा, क्या बढ़ेगा किराया?
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar
Updated Tue, 09 Jun 2026 07:27 PM IST
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सार
एयरलाइन उद्योग पहले से ही कम मुनाफे वाले कारोबार के रूप में जाना जाता है, ऐसे में बढ़ती लागत और भू-राजनीतिक चुनौतियों ने कंपनियों की वित्तीय स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।
जेट फ्यूल
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष और जेट फ्यूल की कीमतों में भारी उछाल के कारण 2026 में ग्लोबल एयरलाइन इंडस्ट्री का मुनाफा आधा रह सकता है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में एयरलाइंस को 23 बिलियन डॉलर का नेट प्रॉफिट होने की उम्मीद है। यह साल 2025 के 45 बिलियन डॉलर के अनुमान से काफी ज्यादा कम है। यह 41 बिलियन डॉलर के पहले के पूर्वानुमान से भी काफी ज्यादा नीचे है।
आईएटीए के अनुसार, खाड़ी देश में युद्ध से जुड़ी रुकावटों और ईंधन की बढ़ती लागत ने एयरलाइंस इंडस्ट्री के आउटलुक को खराब कर दिया है। वैश्विक एयरलाइन उद्योग का मुनाफा वर्ष 2026 में 2025 के मुकाबले लगभग आधा रह सकता है। 2025 में 45 अरब डॉलर रहने का अनुमानित शुद्ध लाभ इस साल घटकर 23 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
एयरलाइंस का नेट प्रॉफिट मार्जिन भी 4.2 प्रतिशत से गिरकर करीब 2 प्रतिशत रह जाने की संभावना है। वहीं, प्रति यात्री होने वाला शुद्ध लाभ पिछले वर्ष के 9.10 डॉलर से घटकर 4.50 डॉलर पर आ सकता है। एयरलाइन कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती विमानन ईंधन (फ्यूल) की बढ़ती लागत है, जिसने उद्योग की लाभप्रदता पर दबाव बढ़ा दिया है। वर्ष 2026 में विमानन ईंधन (जेट फ्यूल) की औसत कीमत 152 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। यह 2025 के औसत 90 डॉलर प्रति बैरल की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत अधिक है, जिससे एयरलाइंस की परिचालन लागत में बड़ा इजाफा होने की आशंका है।
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आईएटीए के अनुसार, जेट फ्यूल की कीमतों में करीब 70 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी का असर दुनिया भर की एयरलाइंस की कमाई पर पड़ रहा है। एयरलाइंस किरायों में समायोजन और परिचालन दक्षता बढ़ाकर अतिरिक्त लागत की भरपाई करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन इससे पिछले वर्ष के स्तर का मुनाफा बनाए रखना संभव नहीं होगा। हालांकि, मुनाफे में गिरावट के बावजूद वर्ष 2026 में एयरलाइन उद्योग का कुल राजस्व रिकॉर्ड 1.165 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2025 के 1.065 ट्रिलियन डॉलर की तुलना में 9.4 प्रतिशत अधिक होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में हवाई यात्रियों की संख्या 2.4 प्रतिशत बढ़कर 5.1 अरब तक पहुंच सकती है। साथ ही, एयरलाइंस द्वारा उपलब्ध कराई गई सीटों में से रिकॉर्ड 84 प्रतिशत सीटों के भरे रहने की उम्मीद है। वहीं, यात्री टिकटों से होने वाला राजस्व बढ़कर 839 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। आईएटीए का मानना है कि टिकट यील्ड में अनुमानित 7 प्रतिशत बढ़ोतरी इस राजस्व वृद्धि को समर्थन देगी, क्योंकि एयरलाइंस बढ़ती ईंधन लागत के प्रभाव को कम करने के लिए किरायों में समायोजन कर रही हैं।
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि, एयरलाइन उद्योग पहले से ही कम मुनाफे वाले कारोबार के रूप में जाना जाता है, ऐसे में बढ़ती लागत और भू-राजनीतिक चुनौतियों ने कंपनियों की वित्तीय स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। क्षेत्रीय प्रदर्शन की बात करें तो रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व को छोड़कर दुनिया के लगभग सभी प्रमुख विमानन बाजारों के 2026 में लाभ में बने रहने की उम्मीद है। हालांकि, खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष, उड़ानों में व्यवधान, हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध और ट्रांजिट यात्रियों की घटती संख्या के कारण वहां की एयरलाइंस को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2026 में एयरलाइन उद्योग के सामने कई अतिरिक्त जोखिम भी बने रहेंगे। इनमें वैश्विक आर्थिक वृद्धि की धीमी रफ्तार, बढ़ती महंगाई, विमान निर्माण और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी समस्याएं तथा भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं प्रमुख हैं, जो उद्योग की कमाई और परिचालन पर असर डाल सकती हैं।
आईएटीए के अनुसार, खाड़ी देश में युद्ध से जुड़ी रुकावटों और ईंधन की बढ़ती लागत ने एयरलाइंस इंडस्ट्री के आउटलुक को खराब कर दिया है। वैश्विक एयरलाइन उद्योग का मुनाफा वर्ष 2026 में 2025 के मुकाबले लगभग आधा रह सकता है। 2025 में 45 अरब डॉलर रहने का अनुमानित शुद्ध लाभ इस साल घटकर 23 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
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एयरलाइंस का नेट प्रॉफिट मार्जिन भी 4.2 प्रतिशत से गिरकर करीब 2 प्रतिशत रह जाने की संभावना है। वहीं, प्रति यात्री होने वाला शुद्ध लाभ पिछले वर्ष के 9.10 डॉलर से घटकर 4.50 डॉलर पर आ सकता है। एयरलाइन कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती विमानन ईंधन (फ्यूल) की बढ़ती लागत है, जिसने उद्योग की लाभप्रदता पर दबाव बढ़ा दिया है। वर्ष 2026 में विमानन ईंधन (जेट फ्यूल) की औसत कीमत 152 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। यह 2025 के औसत 90 डॉलर प्रति बैरल की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत अधिक है, जिससे एयरलाइंस की परिचालन लागत में बड़ा इजाफा होने की आशंका है।
आईएटीए के अनुसार, जेट फ्यूल की कीमतों में करीब 70 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी का असर दुनिया भर की एयरलाइंस की कमाई पर पड़ रहा है। एयरलाइंस किरायों में समायोजन और परिचालन दक्षता बढ़ाकर अतिरिक्त लागत की भरपाई करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन इससे पिछले वर्ष के स्तर का मुनाफा बनाए रखना संभव नहीं होगा। हालांकि, मुनाफे में गिरावट के बावजूद वर्ष 2026 में एयरलाइन उद्योग का कुल राजस्व रिकॉर्ड 1.165 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2025 के 1.065 ट्रिलियन डॉलर की तुलना में 9.4 प्रतिशत अधिक होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में हवाई यात्रियों की संख्या 2.4 प्रतिशत बढ़कर 5.1 अरब तक पहुंच सकती है। साथ ही, एयरलाइंस द्वारा उपलब्ध कराई गई सीटों में से रिकॉर्ड 84 प्रतिशत सीटों के भरे रहने की उम्मीद है। वहीं, यात्री टिकटों से होने वाला राजस्व बढ़कर 839 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। आईएटीए का मानना है कि टिकट यील्ड में अनुमानित 7 प्रतिशत बढ़ोतरी इस राजस्व वृद्धि को समर्थन देगी, क्योंकि एयरलाइंस बढ़ती ईंधन लागत के प्रभाव को कम करने के लिए किरायों में समायोजन कर रही हैं।
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि, एयरलाइन उद्योग पहले से ही कम मुनाफे वाले कारोबार के रूप में जाना जाता है, ऐसे में बढ़ती लागत और भू-राजनीतिक चुनौतियों ने कंपनियों की वित्तीय स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। क्षेत्रीय प्रदर्शन की बात करें तो रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व को छोड़कर दुनिया के लगभग सभी प्रमुख विमानन बाजारों के 2026 में लाभ में बने रहने की उम्मीद है। हालांकि, खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष, उड़ानों में व्यवधान, हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध और ट्रांजिट यात्रियों की घटती संख्या के कारण वहां की एयरलाइंस को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2026 में एयरलाइन उद्योग के सामने कई अतिरिक्त जोखिम भी बने रहेंगे। इनमें वैश्विक आर्थिक वृद्धि की धीमी रफ्तार, बढ़ती महंगाई, विमान निर्माण और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी समस्याएं तथा भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं प्रमुख हैं, जो उद्योग की कमाई और परिचालन पर असर डाल सकती हैं।