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सेहत पर संकट: स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बना रहा अपशिष्ट जल, सिंचाई से सब्जियों को पर जमा हो रहा खतरनाक रसायन
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Shivam Garg
Updated Thu, 26 Mar 2026 07:09 AM IST
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सार
क्या अब हमारी थाली सुरक्षित रह गई है? पत्तेदार सब्जियों में अपशिष्ट जल से जमा हो रहे रसायन धीरे-धीरे स्वास्थ्य के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। टमाटर और पालक जैसी रोजमर्रा की सब्जियों के पत्तों में दवाओं के अवशेष कितने खतरनाक हो सकते हैं? क्या जल संकट के इस दौर में हमारी सेहत समझौते के दायरे में आ रही है? विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो पत्तेदार सब्जियां सिर्फ स्वाद और पोषण का स्रोत नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संकट की घंटी भी बजा सकती हैं।
पत्तेदार सब्जी
- फोटो : freepik
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विस्तार
जल संकट से जूझती दुनिया में खेतों की सिंचाई के लिए अपशिष्ट जल का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस पानी के साथ दवाओं के सूक्ष्म अंश भी फसलों तक पहुंच रहे हैं। अध्ययन बताते हैं कि ये रसायन मुख्य रूप से पत्तियों में जमा होते हैं।
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यह अब खाद्य सुरक्षा के लिए एक नई उभरती चुनौती के रूप में सामने आ रही है, क्योंकि बहुत सी सब्जियां ऐसी हैं जिनके पत्ते खाए जाते हैं। इसे देखते हुए अब यह सवाल टल नहीं सकता कि हमारी थाली कितनी सुरक्षित है। यह शोध सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या खाएं अब तक जिन पत्तीदार सब्जियों को स्वास्थ्य के लिए अच्छा बताया जाता था अब वही खतरे की घंटी बजा रही हैं।
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शोध में बताया गया है कि जल संकट के इस दौर में खेती के लिए पानी का हर स्रोत इस्तेमाल किया जा रहा है और अपशिष्ट जल अब एक जरूरी विकल्प बन चुका है। लेकिन इसी विकल्प ने एक नया और गंभीर जोखिम भी खड़ा कर दिया है। ऐसा जोखिम जो दिखता नहीं, लेकिन सीधे हमारी थाली तक पहुंच सकता है। दुनिया के कई हिस्सों में पानी की भारी किल्लत के चलते किसान शुद्ध किए गए अपशिष्ट जल से सिंचाई कर रहे हैं। यह तरीका जल संरक्षण के लिहाज से कारगर माना जा रहा है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि इस पानी में अदृश्य रूप से दवाओं और अन्य रसायनों के अंश मौजूद हो सकते हैं। यही अंश अब फसलों के जरिए खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करने लगे हैं, जो दीर्घकालिक रूप से एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रश्न में बदल सकता है।
चौंकाने वाले आंकड़े : पत्तियां बनीं हॉटस्पॉट
शोध में सामने आया कि टमाटर की पत्तियों में दवाओं की मात्रा उसके फल की तुलना में करीब 200 गुना तक अधिक हो सकती है। इसी तरह, गाजर की पत्तियों में यह स्तर उसकी जड़ से लगभग सात गुना ज्यादा पाया गया। यानी जो हिस्सा आमतौर पर खाया जाता है, उसमें इन रसायनों की मात्रा कम है, लेकिन पत्तियों में इनका उच्च स्तर एक गंभीर संकेत देता है कि पौधों के भीतर रसायनों का संचय किस हद तक हो सकता है।
हर दवा का असर अलग ज्यादा खतरनाक संकेत
अध्ययन में यह भी पाया गया कि सभी दवाएं एक जैसा व्यवहार नहीं करतीं। कुछ दवाएं बहुत कम मात्रा में पाई गईं, लेकिन कार्बामाजेपीन जैसी दवाएं पौधे के हर हिस्से में अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में जमा होती दिखीं, यहां तक कि खाने योग्य हिस्सों में भी। यह संकेत देता है कि कुछ रसायन भविष्य में ज्यादा गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं।
संवेदनशील हैं पत्तेदार सब्जियां
अध्ययन के निष्कर्षों को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि जिन सब्जियों के पत्ते सीधे खाए जाते हैं वे अपेक्षाकृत अधिक संवेदनशील हो सकती हैं, क्योंकि दवाओं के अंश मुख्य रूप से पत्तियों में ही जमा होते हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि पत्तेदार सब्जियों के संदर्भ में जोखिम का आकलन अलग से और अधिक गहराई से किया जाना चाहिए।