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केरल का सियासी गणित: क्या ईरान में जंग के कारण बिगड़े समीकरण, खाड़ी देशों में फंसे कितने भारतीय मतदान से दूर?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: Shubham Kumar Updated Fri, 03 Apr 2026 07:42 AM IST
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सार

केरल के 2.42 लाख पंजीकृत एनआरआई मतदाता इस बार मतदान केंद्रों से दूर रहेंगे। पश्चिम एशिया में तनाव और हवाई टिकटों की बढ़ी कीमतें प्रवासियों की वतन वापसी कठिन बना रही हैं। कई एयरस्पेस बंद होने से यात्रा लंबी और महंगी हो गई है, जिससे मध्य और निम्न आय वर्ग के श्रमिक मतदान नहीं कर पाएंगे।

West Asia Absence of Migrants Disrupts Kerala Electoral Calculus Gulf-Based Voters to Stay Away from Elections
केरल विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

केरल के 2.42 लाख पंजीकृत एनआरआई मतदाताओं का बड़ा हिस्सा इस बार मतदान केंद्रों से नदारद रहेगा। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और हवाई टिकटों के दामों में लगी आग ने प्रवासियों की वतन वापसी कठिन कर दी है।  कई एयरस्पेस बंद होने से यात्रा मार्ग लंबा हुआ है और सामान्य दिनों में 24 हजार रुपये वाले टिकट की कीमत लगभग एक लाख रुपये तक पहुंच रही है। मध्य और निम्न-आय वर्ग के श्रमिकों के लिए यह पहुंच से बाहर है। केरल में चुनाव के दौरान हजारों प्रवासी वोटिंग के लिए विशेष चार्टर्ड विमानों से आते थे। लेकिन इस बार हवाई क्षेत्र बंद होने से नहीं आ पाए हैं।

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नजदीकी मुकाबलों पर संकट
प्रवासी मतदाता उत्तर मालाबार और मध्य केरल के मुस्लिम-बहुल निर्वाचन क्षेत्रों से ज्यादा हैं। यह यूएई, सऊदी अरब, कुवैत, कतर, बहरीन और ओमान जैसे देशों में काम करते हैं।  ऐतिहासिक रूप से ये मतदाता कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ व आईयूएमएल के प्रति वफादार रहे हैं। इनकी अनुपस्थिति का सीधा अर्थ यूडीएफ के वोट बैंक में कटौती होना है। यह नतीजे में फर्क डाल सकता है।
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कहां पड़ेगा फर्क?
सबसे ज्यादा एनआरआई मतदाता केरल के कोझिकोड, मल्लपुरम और कन्नूर जैसे जिलों से हैं। कोझिकोड में लगभग 60 हजार, मल्लपुरम में 40 हजार और कन्नूर में 52 हजार हैं। इन मतदाताओं की गैर-मौजूदगी असर डाल सकती है। प्रवासियों का वोट न डाल पाना, परिवारों में बढ़ती आर्थिक चिंता और भविष्य का डर, यह सभी नतीजे पर असर डालने वाले हैं।

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गैस की किल्लत
पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण केरल में वाणिज्यिक गैस की भी बढ़ती किल्लत व बढ़ती कीमतों ने छोटे दुकानदारों, रेस्तरां और पर्यटन उद्योग को संकट में डाल दिया है। दिहाड़ी मजदूर सीधे तौर पर प्रभावित हैं। खाड़ी संकट के कारण रसोईघर का बिगड़ता अर्थशास्त्र भी चुनाव में भूमिका निभाएगा। मतदाता भावनात्मक मुद्दों की बजाय मंहगाई और आजीविका जैसे मुद्दों पर वोट डाल सकते हैं। यह स्थिति राज्य में राजनीतिक दलों की चुनावी रणनीतियों को  भी आकार दे रही है।
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