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पश्चिम एशिया संघर्ष: सर्वदलीय बैठक को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच तीखी बहस, विदेश नीति पर उठे सवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: Nirmal Kant
Updated Wed, 25 Mar 2026 04:55 PM IST
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सार
पश्चिम एशिया संकट पर सर्वदलीय बैठक को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। कांग्रेस ने बैठक में देरी का आरोप लगाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाए। वहीं, भाजपा ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार सभी जरूरी कदम उठा रही है। पढ़िए रिपोर्ट-
मणिकम टैगोर, प्रह्लाद जोशी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्ष के बीत तीखी बहस देखने को मिली। केंद्र सरकार की ओर सर्वदलीय बैठक बुलाने के फैसले को लेकर कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने इसे 'देरी से उठाया गया कदम' बताया। उन्होंने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए और यह भी पूछा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस अहम बैठक में क्यों शामिल नहीं हुए।
राजनाथ सिंह कर सकते हैं सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता
भाजपा ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि वह एक संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज शाम इस बैठक की अध्यक्षता की। जबकि, विदेश मंत्री एस जयशंकर भी इसमें मौजूद रहे। इस सर्वदलीय बैठक से पहले प्रधानमंत्री ने संसद में पश्चिम एशिया की स्थिति पर बयान दिया था।
विपक्षी दलों ने कहा, यह बैठक काफी पहले हो जानी चाहिए थी। उन्होंने बैठक में प्रधानमंत्री की गैरमौजूदगी को लेकर भी सवाल किए। उन्होंने कहा कि ऐसे बड़े वैश्विक संकट के दौरान होने वाली बैठकों में आमतौर पर प्रधानमंत्री खुद शामिल होते हैं।
बैठक को लेकर कांग्रेस ने क्या कहा?
लोकसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक मणिकम टैगोर ने सरकार की विदेश नीति की आलोचना की। उन्होंने कहा, यह समझौता की हुई लगती है और बाहरी प्रभाव का खतरा है। टैगोर ने कहा, पश्चिम एशिया के मुद्दे पर कांग्रेस ने सर्वदलीय बैठक में भाग लिया। हमारा मानना है कि यह पहले होनी चाहिए थी। प्रधानमंत्री को इस बैठक में शामिल होना चाहिए था।
संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में टैगोर ने कहा, जब भी ऐसे गंभीर मुद्दों पर बैठक होती है, तो प्रधानमंत्री हमेशा शामिल होते रहे हैं, चाहे मनमोहन सिंह हों, अटल बिहारी वाजपेयी हों या पीवी नरसिम्हा राव। यह पहली बार है, जब प्रधानमंत्री इसमें हिस्सा नहीं ले रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। टैगोर ने आगे कहा, राहुल गांधी पहले ही कह चुके हैं कि विदेश नीति मजाक बन गई है। एक समझौता कर चुके प्रधानमंत्री की वजह से देश इस स्थिति में है।
ये भी पढ़ें: ईरान-इस्राइल तनाव के बीच किसानों के लिए सरकार ने बनाया बड़ा प्लान,चौहान करेंगे बड़ी बैठक
कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने क्या कहा?
कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने कहा, भारत को ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत पर शोक व्यक्त करना चाहिए था। भारत को अपनी विदेश नीति में स्वतंत्रता दिखानी चाहिए, न कि दूसरों पर निर्भर नजर आना चाहिए। उन्होंने कहा, जब प्रधानमंत्री ने संसद में बात की, तो उन्हें कम से कम ईरानी नेता की हत्या पर कुछ कहना चाहिए था, जो 36 साल से सत्ता में थे। उन्हें शोक व्यक्त करना चाहिए था,क्योंकि ईरान ने मुश्किल समय में भारत का साथ दिया है। उन्होंने कहा, हमारी चुप्पी कहीं न कहीं यह दिखाती है कि हमारी विदेश नीति प्रभावित हो गई है। हमें ऐसी नीति नहीं अपनानी चाहिए, जो दूसरों पर निर्भर हो। भारत एक संप्रभु देश है और उसे अपनी नीतियां खुद तय करनी चाहिए।
सांसद डिंपल यादव और महुआ माझी ने क्या कहा?
बैठक से पहले, समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा, ईरान के प्रति सरकार के रवैये से देश में समस्या पैदा हुई है। उन्होंने कहा, हम शुरू से कह रहे हैं कि इस पर चर्चा होनी चाहिए और सरकार को युद्ध के कारण देश को होने वाली मुश्किलों के लिए तैयार रहना चाहिए। ईरान दशकों से हमारा मित्र देश रहा है। उसके प्रति सरकार के रवैये से समस्याएं पैदा हुई हैं। इसकी वजह से एलपीजी आपूर्ति में दिक्कत आई है और लोगों को सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। हम देखेंगे कि सर्वदलीय बैठक में सरकार क्या पेश करती है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माझी ने कहा कि हमारे देश को बहुत सावधानी से आगे बढ़ना चाहिए और सभी की राय लेनी चाहिए। सरकार को सांसदों को भरोसे में लेकर उनसे सलाह के बाद कदम उठाने चाहिए।
भाजपा ने क्या प्रतिक्रिया दी?
वहीं, भाजपा ने विपक्ष के इन आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सरकार सभी जरूरी कदम उठा रही है और एकजुटता की अपील की है। उन्होंने कहा, सर्वदलीय बैठक अहम है। सरकार तय करती है कि ऐसी बैठक कब बुलानी है। जब दुनिया इतना बड़ा संकट झेल रही है, तो सभी का कर्तव्य है कि इसमें भाग लें। लेकिन गैर-जिम्मेदाराना बयान दिए जा रहे हैं। इसे विफल विदेश नीति या मृत अर्थव्यवस्था कहा जा रहा है। सवाल यह है कि राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं या देश के खिलाफ विपक्ष के नेता नेता बन गए हैं। रचनात्मक होने के बजाय वह देश और उसके लोगों के विरोध में खड़े हो गए हैं। जोशी ने ईंधन की कमी को लेकर उठ रही चिंताओं को भी खारिज किया। उन्होंने कहा, एलपीजी की कोई समस्या नहीं है, बल्कि विपक्ष के नेता ही देश के लिए समस्या बन गए हैं।
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने भी सरकार का बचाव करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री हमेशा सामूहिक तरीके से काम करते हैं। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री ने हमेशा विपक्ष को साथ लेकर काम किया है। राज्यसभा में उनका भाषण भी इसी दिशा में था कि हमें टीम भावना के साथ काम करना चाहिए और सभी राज्यों को साथ लेना चाहिए। आज प्रधानमंत्री मोदी विश्व राजनीति में एक अहम नेता बन चुके हैं और शांतिदूत के रूप में उभरे हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर हमला करते हुए कहा कि उनके लिए राजनीति एक पार्ट-टाइम गतिविधि है।
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राजनाथ सिंह कर सकते हैं सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता
भाजपा ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि वह एक संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज शाम इस बैठक की अध्यक्षता की। जबकि, विदेश मंत्री एस जयशंकर भी इसमें मौजूद रहे। इस सर्वदलीय बैठक से पहले प्रधानमंत्री ने संसद में पश्चिम एशिया की स्थिति पर बयान दिया था।
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विपक्षी दलों ने कहा, यह बैठक काफी पहले हो जानी चाहिए थी। उन्होंने बैठक में प्रधानमंत्री की गैरमौजूदगी को लेकर भी सवाल किए। उन्होंने कहा कि ऐसे बड़े वैश्विक संकट के दौरान होने वाली बैठकों में आमतौर पर प्रधानमंत्री खुद शामिल होते हैं।
बैठक को लेकर कांग्रेस ने क्या कहा?
लोकसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक मणिकम टैगोर ने सरकार की विदेश नीति की आलोचना की। उन्होंने कहा, यह समझौता की हुई लगती है और बाहरी प्रभाव का खतरा है। टैगोर ने कहा, पश्चिम एशिया के मुद्दे पर कांग्रेस ने सर्वदलीय बैठक में भाग लिया। हमारा मानना है कि यह पहले होनी चाहिए थी। प्रधानमंत्री को इस बैठक में शामिल होना चाहिए था।
संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में टैगोर ने कहा, जब भी ऐसे गंभीर मुद्दों पर बैठक होती है, तो प्रधानमंत्री हमेशा शामिल होते रहे हैं, चाहे मनमोहन सिंह हों, अटल बिहारी वाजपेयी हों या पीवी नरसिम्हा राव। यह पहली बार है, जब प्रधानमंत्री इसमें हिस्सा नहीं ले रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। टैगोर ने आगे कहा, राहुल गांधी पहले ही कह चुके हैं कि विदेश नीति मजाक बन गई है। एक समझौता कर चुके प्रधानमंत्री की वजह से देश इस स्थिति में है।
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कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने क्या कहा?
कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने कहा, भारत को ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत पर शोक व्यक्त करना चाहिए था। भारत को अपनी विदेश नीति में स्वतंत्रता दिखानी चाहिए, न कि दूसरों पर निर्भर नजर आना चाहिए। उन्होंने कहा, जब प्रधानमंत्री ने संसद में बात की, तो उन्हें कम से कम ईरानी नेता की हत्या पर कुछ कहना चाहिए था, जो 36 साल से सत्ता में थे। उन्हें शोक व्यक्त करना चाहिए था,क्योंकि ईरान ने मुश्किल समय में भारत का साथ दिया है। उन्होंने कहा, हमारी चुप्पी कहीं न कहीं यह दिखाती है कि हमारी विदेश नीति प्रभावित हो गई है। हमें ऐसी नीति नहीं अपनानी चाहिए, जो दूसरों पर निर्भर हो। भारत एक संप्रभु देश है और उसे अपनी नीतियां खुद तय करनी चाहिए।
सांसद डिंपल यादव और महुआ माझी ने क्या कहा?
बैठक से पहले, समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा, ईरान के प्रति सरकार के रवैये से देश में समस्या पैदा हुई है। उन्होंने कहा, हम शुरू से कह रहे हैं कि इस पर चर्चा होनी चाहिए और सरकार को युद्ध के कारण देश को होने वाली मुश्किलों के लिए तैयार रहना चाहिए। ईरान दशकों से हमारा मित्र देश रहा है। उसके प्रति सरकार के रवैये से समस्याएं पैदा हुई हैं। इसकी वजह से एलपीजी आपूर्ति में दिक्कत आई है और लोगों को सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। हम देखेंगे कि सर्वदलीय बैठक में सरकार क्या पेश करती है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माझी ने कहा कि हमारे देश को बहुत सावधानी से आगे बढ़ना चाहिए और सभी की राय लेनी चाहिए। सरकार को सांसदों को भरोसे में लेकर उनसे सलाह के बाद कदम उठाने चाहिए।
भाजपा ने क्या प्रतिक्रिया दी?
वहीं, भाजपा ने विपक्ष के इन आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सरकार सभी जरूरी कदम उठा रही है और एकजुटता की अपील की है। उन्होंने कहा, सर्वदलीय बैठक अहम है। सरकार तय करती है कि ऐसी बैठक कब बुलानी है। जब दुनिया इतना बड़ा संकट झेल रही है, तो सभी का कर्तव्य है कि इसमें भाग लें। लेकिन गैर-जिम्मेदाराना बयान दिए जा रहे हैं। इसे विफल विदेश नीति या मृत अर्थव्यवस्था कहा जा रहा है। सवाल यह है कि राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं या देश के खिलाफ विपक्ष के नेता नेता बन गए हैं। रचनात्मक होने के बजाय वह देश और उसके लोगों के विरोध में खड़े हो गए हैं। जोशी ने ईंधन की कमी को लेकर उठ रही चिंताओं को भी खारिज किया। उन्होंने कहा, एलपीजी की कोई समस्या नहीं है, बल्कि विपक्ष के नेता ही देश के लिए समस्या बन गए हैं।
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने भी सरकार का बचाव करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री हमेशा सामूहिक तरीके से काम करते हैं। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री ने हमेशा विपक्ष को साथ लेकर काम किया है। राज्यसभा में उनका भाषण भी इसी दिशा में था कि हमें टीम भावना के साथ काम करना चाहिए और सभी राज्यों को साथ लेना चाहिए। आज प्रधानमंत्री मोदी विश्व राजनीति में एक अहम नेता बन चुके हैं और शांतिदूत के रूप में उभरे हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर हमला करते हुए कहा कि उनके लिए राजनीति एक पार्ट-टाइम गतिविधि है।
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