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PM की मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक: राज्यों को सप्लाई चेन दुरुस्त रखने के निर्देश, टीम इंडिया की भावना पर जोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: Nirmal Kant
Updated Fri, 27 Mar 2026 06:55 PM IST
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सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ डिजिटल माध्यम से बैठक की, जिसमें पश्चिम एशिया में जारी हालात के असर से निपटने और तैयारियों पर चर्चा की गई। पढ़िए रिपोर्ट-
पीएम नरेंद्र मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की। यह बैठक डिजिटल माध्यम से हुई। बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की गई। आदर्श आचार संहिता के कारण चुनावी राज्य इस बैठक में शामिल नहीं हुए। चुनावी राज्यों के मुख्य सचिवों के लिए एक अलग बैठक होगी, जो कैबिनेट सचिवालय के माध्यम से की जाएगी।
बैठक में प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि 'टीम इंडिया' की भावना से मिलकर काम करने पर देश इस स्थिति से सफलतापूर्वक उबर जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार की प्राथमिकताएं आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता बनाए रखना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, नागरिकों के हितों की रक्षा करना और उद्योग व आपूर्ति श्रृखंलाओं को मजूबत करना है।
उन्होंने राज्यों से आपूर्ति श्रंखलाओं के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने और जमाखोरी व मुनाफाखोरी के खिलाफ सख्त कदम उठाने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में अग्रिम योजना बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया, खासकर उर्वरक भंडारण और वितरण की निगरानी में।
प्रधानमंत्री मोदी ने सभी स्तरों पर मजबूत समन्वय तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि बदलते हालात में तत्काल प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने सीमा और तटीय राज्यों में खास ध्यान देने का निर्देश दिया, ताकि नौवहन, आवश्यक आपूर्ति और समुद्री संचालन से जुड़ी नई चुनौतियों का समाधान किया जा सके। प्रधानमंत्री ने गलत सूचनाओं व अफवाहों से सतर्क रहने का भी आग्रह किया और सही व विश्वसनीय जानकारी फैलाने पर जोर दिया।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, डिजिटल माध्यम से यह बैठक 'टीम इंडिया' की भावना के तहत राज्यों और केंद्र के बीच तालमेल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। यह पहली बार है, जब प्रधानमंत्री ने 28 फरवरी को अमेरिका-इस्राइल के ईरान पर हमले से शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर मुख्यमंत्रियों के साथ इस तरह की बैठक की। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अपने खाड़ी पड़ोसी देशों और इजराइल पर हमले किए।
बैठक में कौन-कौन मुख्यमंत्री शामिल हुए?
बैठक में आंध्र प्रदेश के एन चंद्रबाबू नायडू, उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ, तेलंगाना के रेवंत रेड्डी, पंजाब के भगवंत मान, गुजरात के भूपेंद्र पटेल, जम्मू-कश्मीर के उमर अब्दुल्ला, हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह सुक्खू और अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू सहित कई मुख्यमंत्री शामिल हुए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह भी इस बैठक में मौजूद थे।
एक सूत्र ने बताया, प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये मुख्यमंत्रियों से बातचीत की और राज्यों की तैयारियों व योजनाओं की समीक्षा की। बैठक का फोकस 'टीम इंडिया' की भावना के तहत तालमेल सुनिश्चित करना था। आचार संहिता लागू होने के कारण चुनाव वाले राज्यों के मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं हुए। कैबिनेट सचिवालय चुनाव वाले राज्यों तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के मुख्य सचिवों के साथ अलग बैठक करेगा।
मुख्यमंत्रियों ने बैठक में क्या कहा?
वहीं, मुख्यमंत्रियों ने स्थिति से निपटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की सराहना की। उन्होंने वैश्विक अनिश्चितता के बीच ईंधन पर उत्पाद शुल्क कम करने और राज्यों को वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन बढ़ाने के फैसलों का स्वागत किया। मुख्यमंत्रियों ने भरोसा जताया कि उनके राज्यों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उलब्धता के कारण स्तिति स्थिर बनी हुई है।
उसी दिन एक मीडिया कार्यक्रम में मोदी ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद भी चुनौतियां लगातार बढ़ती रही हैं और ऐसा कोई साल नहीं रहा जब भारत और भारतीयों की परीक्षा न हुई हो। लेकिन 140 करोड़ भारतीयों के संयुक्त प्रयास से भारत हर आपदा का सामना करते हुए आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और चुनौतियों को टालने के बजाय सीधे उनका सामना कर रहा है।
संकट पर पहले हुई थी सर्वदलीय बैठक
सरकार ने 25 मार्च को पश्चिम एशिया की स्थिति पर राजनीतिक दलों के नेताओं को जानकारी देने के लिए सर्वदलीय बैठक भी की थी, जिसमें स्थिति से निपटने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी दी गई। 23 मार्च को लोकसभा में बयान देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि पश्चिम एशिया संघर्ष से पैदा हुई वैश्विक परिस्थितियां लंबे समय तक बनी रह सकती हैं और उन्होंने देश से एकजुट और तैयार रहने का आह्वान किया था, जैसे कोविड-19 महामारी के दौरान रहा था।
उन्होंने संकट के आंतरिक सुरक्षा पहलू की ओर भी ध्यान दिलाते हुए कहा कि कुछ तत्व ऐसी स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि सभी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है और तटीय, सीमा, साइबर और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा, चाहे तटीय सुरक्षा हो, सीमा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा या रणनीतिक प्रतिष्ठान, सभी की सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है।
पीएम मोदी ने धैर्य, संयम और सतर्कता बरतने की अपील की और अफवाह फैलाने, कालाबाजारी या जमाखोरी करने वालों के खिलाफ चेतावनी दी और सभी राज्य सरकारों से सख्त निगरानी और तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। लोकसभा में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश की सामूहिक ताकत पर भरोसा जताते हुए कहा कि जब देश की हर सरकार और हर नागरिक साथ चलता है, तो हम हर चुनौती का सामना कर सकते हैं, यही हमारी पहचान और ताकत है।
मुख्यमंत्रियों ने भरोसा जताया कि उनके राज्यों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता के कारण स्थिति स्थिर बनी हुई है। साथ ही, उन्होंने केंद्र के साथ मिलकर प्रभावी प्रबंधन के लिए तालमेल बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत के पास 60 दिन का ईंधन: सरकार
इससे पहले सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया था कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद कोई तात्कालिक खतरा नहीं है। सरकार ने बताया कि देश के पास 60 दिनों का ईंधन उपलब्ध है। लोगों से ईंधन की कमी से जुड़ी अटकलों पर ध्यान न देने की अपील की गई। सरकार ने पुष्टि की कि देश की ऊर्जा आपूर्ति स्थिर और अच्छी तरह प्रबंधित है और मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, कच्चे तेल की आपूर्ति अगले लगभग दो महीने के लिए पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल बाजार कंपनियों ने पहले से ही आयात की व्यवस्था कर ली है, जिससे आपूर्ति में निरंतरता बनी रहे। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के बावजूद भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है, जिससे किसी एक मार्ग या क्षेत्र पर निर्भरता कम हो जाती है।
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बैठक में प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि 'टीम इंडिया' की भावना से मिलकर काम करने पर देश इस स्थिति से सफलतापूर्वक उबर जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार की प्राथमिकताएं आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता बनाए रखना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, नागरिकों के हितों की रक्षा करना और उद्योग व आपूर्ति श्रृखंलाओं को मजूबत करना है।
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उन्होंने राज्यों से आपूर्ति श्रंखलाओं के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने और जमाखोरी व मुनाफाखोरी के खिलाफ सख्त कदम उठाने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में अग्रिम योजना बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया, खासकर उर्वरक भंडारण और वितरण की निगरानी में।
प्रधानमंत्री मोदी ने सभी स्तरों पर मजबूत समन्वय तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि बदलते हालात में तत्काल प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने सीमा और तटीय राज्यों में खास ध्यान देने का निर्देश दिया, ताकि नौवहन, आवश्यक आपूर्ति और समुद्री संचालन से जुड़ी नई चुनौतियों का समाधान किया जा सके। प्रधानमंत्री ने गलत सूचनाओं व अफवाहों से सतर्क रहने का भी आग्रह किया और सही व विश्वसनीय जानकारी फैलाने पर जोर दिया।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, डिजिटल माध्यम से यह बैठक 'टीम इंडिया' की भावना के तहत राज्यों और केंद्र के बीच तालमेल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। यह पहली बार है, जब प्रधानमंत्री ने 28 फरवरी को अमेरिका-इस्राइल के ईरान पर हमले से शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर मुख्यमंत्रियों के साथ इस तरह की बैठक की। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अपने खाड़ी पड़ोसी देशों और इजराइल पर हमले किए।
बैठक में कौन-कौन मुख्यमंत्री शामिल हुए?
बैठक में आंध्र प्रदेश के एन चंद्रबाबू नायडू, उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ, तेलंगाना के रेवंत रेड्डी, पंजाब के भगवंत मान, गुजरात के भूपेंद्र पटेल, जम्मू-कश्मीर के उमर अब्दुल्ला, हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह सुक्खू और अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू सहित कई मुख्यमंत्री शामिल हुए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह भी इस बैठक में मौजूद थे।
एक सूत्र ने बताया, प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये मुख्यमंत्रियों से बातचीत की और राज्यों की तैयारियों व योजनाओं की समीक्षा की। बैठक का फोकस 'टीम इंडिया' की भावना के तहत तालमेल सुनिश्चित करना था। आचार संहिता लागू होने के कारण चुनाव वाले राज्यों के मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं हुए। कैबिनेट सचिवालय चुनाव वाले राज्यों तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के मुख्य सचिवों के साथ अलग बैठक करेगा।
मुख्यमंत्रियों ने बैठक में क्या कहा?
वहीं, मुख्यमंत्रियों ने स्थिति से निपटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की सराहना की। उन्होंने वैश्विक अनिश्चितता के बीच ईंधन पर उत्पाद शुल्क कम करने और राज्यों को वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन बढ़ाने के फैसलों का स्वागत किया। मुख्यमंत्रियों ने भरोसा जताया कि उनके राज्यों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उलब्धता के कारण स्तिति स्थिर बनी हुई है।
उसी दिन एक मीडिया कार्यक्रम में मोदी ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद भी चुनौतियां लगातार बढ़ती रही हैं और ऐसा कोई साल नहीं रहा जब भारत और भारतीयों की परीक्षा न हुई हो। लेकिन 140 करोड़ भारतीयों के संयुक्त प्रयास से भारत हर आपदा का सामना करते हुए आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और चुनौतियों को टालने के बजाय सीधे उनका सामना कर रहा है।
संकट पर पहले हुई थी सर्वदलीय बैठक
सरकार ने 25 मार्च को पश्चिम एशिया की स्थिति पर राजनीतिक दलों के नेताओं को जानकारी देने के लिए सर्वदलीय बैठक भी की थी, जिसमें स्थिति से निपटने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी दी गई। 23 मार्च को लोकसभा में बयान देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि पश्चिम एशिया संघर्ष से पैदा हुई वैश्विक परिस्थितियां लंबे समय तक बनी रह सकती हैं और उन्होंने देश से एकजुट और तैयार रहने का आह्वान किया था, जैसे कोविड-19 महामारी के दौरान रहा था।
उन्होंने संकट के आंतरिक सुरक्षा पहलू की ओर भी ध्यान दिलाते हुए कहा कि कुछ तत्व ऐसी स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि सभी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है और तटीय, सीमा, साइबर और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा, चाहे तटीय सुरक्षा हो, सीमा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा या रणनीतिक प्रतिष्ठान, सभी की सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है।
पीएम मोदी ने धैर्य, संयम और सतर्कता बरतने की अपील की और अफवाह फैलाने, कालाबाजारी या जमाखोरी करने वालों के खिलाफ चेतावनी दी और सभी राज्य सरकारों से सख्त निगरानी और तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। लोकसभा में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश की सामूहिक ताकत पर भरोसा जताते हुए कहा कि जब देश की हर सरकार और हर नागरिक साथ चलता है, तो हम हर चुनौती का सामना कर सकते हैं, यही हमारी पहचान और ताकत है।
मुख्यमंत्रियों ने भरोसा जताया कि उनके राज्यों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता के कारण स्थिति स्थिर बनी हुई है। साथ ही, उन्होंने केंद्र के साथ मिलकर प्रभावी प्रबंधन के लिए तालमेल बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत के पास 60 दिन का ईंधन: सरकार
इससे पहले सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया था कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद कोई तात्कालिक खतरा नहीं है। सरकार ने बताया कि देश के पास 60 दिनों का ईंधन उपलब्ध है। लोगों से ईंधन की कमी से जुड़ी अटकलों पर ध्यान न देने की अपील की गई। सरकार ने पुष्टि की कि देश की ऊर्जा आपूर्ति स्थिर और अच्छी तरह प्रबंधित है और मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, कच्चे तेल की आपूर्ति अगले लगभग दो महीने के लिए पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल बाजार कंपनियों ने पहले से ही आयात की व्यवस्था कर ली है, जिससे आपूर्ति में निरंतरता बनी रहे। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के बावजूद भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है, जिससे किसी एक मार्ग या क्षेत्र पर निर्भरता कम हो जाती है।
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