सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   west bengal assembly election ground report hot seat nandigram suvendu vs mamata banerjee

Ground Report: नंदीग्राम में पसरी शांति, जहां बदली थी सियासत, क्या फिर पलटेगा खेल; पवित्र कर के सहारे टीएमसी

Rajkishor राजकिशोर
Updated Sat, 18 Apr 2026 05:40 AM IST
विज्ञापन
सार

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट पर पिछली बार की तरह इस बार भी लोगों की निगाहें हैं। हालांकि इस बार नंदीग्राम में माहौल शांत है और शुभेंदु अधिकारी एक बार फिर इस सीट से ताल ठोक रहे हैं। नंदीग्राम में इस बार मुकाबला ममता का इनसाइडर दांव बनाम शुभेंदु का दुर्ग है और देखना होगा कि जनमत किस करवट बैठेगा।

west bengal assembly election ground report hot seat nandigram suvendu vs mamata banerjee
पश्चिम बंगाल चुनाव। - फोटो : Amar Ujala Graphics
विज्ञापन

विस्तार

नंदीग्राम की जमीन पर इस बार शोर कम और खामोशी ज्यादा है। कभी वामपंथी शासन की चूलें हिलाने वाला यह रणक्षेत्र इस बार अपनी चिर-परिचित उत्तेजना और तीखेपन से दूर, एक रहस्यमयी शांति ओढ़े हुए है। पिछले चुनाव में ममता बनाम शुभेंदु का सबसे हाईप्रोफाइल संघर्ष देख चुके इस इलाके में ऐसी शांति पसरी है कि चुनाव होता ही नहीं दिख रहा है। न ममता और न ही उनका कोई दिग्गज, बल्कि शुभेंदु के सामने उनके ही एक खासमखास को मोहरा बनाकर तृणमूल ने जुआ खेला है। इस जुए में भी फिलहाल मोहरे या पत्ते शुभेंदु के पास ही भारी दिखाई पड़ रहे हैं।
Trending Videos


साख बनाम प्रभाव 
2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों में भाजपा को मिली 6 हजार की बढ़त बताती है कि शुभेंदु का किला अब भी मजबूत है। तामलुक संसदीय क्षेत्र की सात सीटें, जिसमें से एक नंदीग्राम भी है, सभी में भाजपा को बढ़त रही है। अब पिछले  चुनाव तक शुभेंदु के पालिटिकल एजेंट रहे पवित्र कर हिंदू संहति के नेता रहे हैं। तृणमूल की उम्मीद यही है कि वह कुछ पुराने हिंदू वोट जुटा सकेंगे और मुस्लिम वोट उनको पार्टी के नाम पर मिलेंगे तो खेला हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


रणनीति बदली : इस बार बड़ा चेहरा नहीं
नंदीग्राम में नजारा बदला हुआ है। ममता बनर्जी की पार्टी का कोई भी बड़ा नेता या कद्दावर मंत्री शुभेंदु के खिलाफ ताल ठोकने की हिम्मत नहीं जुटा सका। ममता ने इस बार इनसाइड अटैक की रणनीति अपनाते हुए पवित्र कर को मैदान में उतारा है। ठीक वैसे ही जैसे भाजपा ने शुभेंदु को उनके खिलाफ खड़ा कर दिया। हालांकि, सिर्फ रणनीति नहीं, उसे अमल में लाने वाला किरदार भी अहम होता है। अब सवाल यह है कि ममता के मोहरे पवित्र कर का हकीकत में कितना असर होगा।  पवित्र कर कभी शुभेंदु के सबसे करीबी और उनके चुनावी तंत्र के मैनेजर हुआ करते थे। शुभेंदु के पॉलिटिकल एजेंट रहे हैं। ऐसे में तृणमूल को उम्मीद है कि शुभेंदु के घर में उन्हीं के पुराने सिपहसालार को खड़ा कर वे वोटों में सेंध लगा पाएंगे।

हार में छिपी थी जीत 2021 का वो अधूरा सच
  • नंदीग्राम को लेकर अक्सर शुभेंदु अधिकारी की जीत की चर्चा होती है, लेकिन इसके पीछे के बड़े सच को नजरअंदाज कर दिया जाता है। ममता ने जिस तरह से हिम्मत  दिखाई और खतरा लिया, उसका सीधा फायदा पूर्वी मिदनापुर जिले में तृणमूल को हुआ।
  • 2021 में ममता अपनी सुरक्षित सीट भवानीपुर के साथ ही चुनाव लड़ने नंदीग्राम आईं। वह शुभेंदु से महज 1,956 वोटों से हार गईं, लेकिन उनकी मौजूदगी ने शुभेंदु को उनके ही क्षेत्र में फंसा दिया। शुभेंदु का परिवार यानी अधिकारी परिवार पूर्वी मिदनापुर की सियासत के मूल में रहा है। अधिकारी परिवार का यहां सिक्का चलता रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस तथ्य को समझती थीं। शुभेंदु कभी उनके सबसे प्रिय और विश्वासपात्र थे।
  • पश्चिम बंगाल की सियासत का चरित्र समझते हुए ममता ने शुभेंदु की मांद पर जाकर ही चुनौती दी।  ममता की इस सक्रियता का असर जिले की अन्य सीटों पर पड़ा। पूर्वी मिदनापुर की 16 में से 9 सीटों पर तृणमूल ने कब्जा जमाया, जबकि भाजपा 7 पर ही सिमट गई। यानी नंदीग्राम में ममता की व्यक्तिगत हार ने जिले में तृणमूल कांग्रेस की सामूहिक जीत की पटकथा लिखी थी।

बड़ा सवाल : क्या जिले में कम होगा दीदी का जादू
पिछली बार ममता खुद यहां मौजूद थीं, जिससे पूरे जिले का कार्यकर्ता उत्साहित था और शुभेंदु को नंदीग्राम से बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। इस दफा ममता खुद यहां नहीं हैं और न ही उनका कोई बड़ा चेहरा मैदान में है। वहीं, शुभेंदु खासे आक्रामक हैं। वह नंदीग्राम के भरोसे नहीं बैठे हैं। वे खुद ममता की सुरक्षित सीट भवानीपुर में उन्हें चुनौती देने पहुंच गए हैं। शुभेंदु के भवानीपुर जाने और नंदीग्राम में तृणमूल के बड़े चेहरे की कमी का सीधा असर पूरे पूर्वी मिदनापुर जिले पर पड़ता दिख रहा है। जिले में शुभेंदु का प्रभाव और जलवा पहले से कहीं ज्यादा बढ़ता महसूस किया जा रहा है।

संदेह की छाया : भरोसे की जंग
इतना ही नहीं, ममता के मोहरे पवित्र कर को लेकर भी सवाल है। नंदीग्राम की गलियों में पवित्र कर को लेकर एक ही चर्चा है कि क्या वह वाकई शुभेंदु को हराने आए हैं? इलाके में तृणमूल के पुराने कार्यकर्ताओं से लेकर आम लोगों के बीच एक धारणा घर कर गई है। यहां चुटकुला जैसा चल रहा है कि पवित्र दिन में तृणमूल और रात में शुभेंदु के संपर्क में रहते हैं। यह विश्वसनीयता का संकट ममता के इनसाइड अटैक वाले दांव को कमजोर कर सकता है। हालांकि, पवित्र तमाम साक्षात्कारों और रैलियों में खुद को ममता का सिपाही बता रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed