West Bengal: भाजपा ने बंगाल पुलिस की ओर से एक्स को भेजे नोटिस पर उठाए सवाल, जानें क्या है पूरा मामला
भाजपा ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स को भेजे गए उस नोटिस पर सवाल उठाए हैं, जिसमें तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद से जुड़ी चैट वाले पोस्ट हटाने की मांग की गई थी। जानें क्या है पूरा मामला।
विस्तार
भाजपा ने बुधवार को पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के कार्यालय को भेजे गए नोटिस पर सवाल उठाए। इस नोटिस में तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद की बातचीत से संबंधित कुछ पोस्ट को माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट से हटाने की मांग की गई थी। भाजपा के सूचना प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ के प्रमुख और पश्चिम बंगाल के लिए पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक अमित मालवीय ने बुधवार सुबह अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर पश्चिम बंगाल पुलिस के साइबर अपराध विंग द्वारा एक्स के मुख्य अनुपालन अधिकारी को जारी किए गए नोटिस को साझा किया।
संबंधित सांसद का नाम नहीं
हालांकि, राज्य पुलिस की साइबर क्राइम विंग द्वारा एक्स के मुख्य अनुपालन अधिकारी को जारी किए गए नोटिस में मालवीय द्वारा इस मामले में जारी पोस्ट में तृणमूल कांग्रेस के संबंधित सांसद का नाम नहीं था। अपने पोस्ट में मालवीय ने बताया था कि तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद और दूसरे व्यक्ति के बीच हुई चैट को साझा करने वाली पोस्ट को रोकने के लिए जारी किए गए नोटिस में राज्य पुलिस ने खुद स्वीकार किया था। यह विवाद एक मौजूदा सांसद की निजी चैट को बिना सहमति के साझा करने से संबंधित था।
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मालविया ने सवाल किया “इस तरह से यह बात साफ हो जाती है कि चैट असली हैं। न कि फर्जी जैसा कि सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ दर्ज एफआईआर में दावा किया गया था। अगर ऐसा है, तो कई गंभीर सवाल उठते हैं। चैट को फर्जी बताकर नागरिकों को आपराधिक कार्यवाही के जरिए निशाना क्यों बनाया गया और डराया क्यों गया? क्या एफआईआर जल्दबाजी में दर्ज की गई थी? और किसके निर्देश पर?” उनके अनुसार, इस घटनाक्रम के महत्वपूर्ण कानूनी परिणाम हो सकते हैं, क्योंकि ऐसी जानकारी सामने आई है कि याचिकाकर्ताओं के पास चैट की प्रामाणिकता को स्थापित करने वाले दस्तावेजी साक्ष्य हैं।
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कानून का शासन चुनिंदा रूप से लागू नहीं किया जा सकता- मालवीय
मालवीय ने आगे कहा “पुलिस की ओर से मिले पत्र से उनका मामला और भी मजबूत हो गया है। कृष्णानगर पुलिस को स्पष्ट करना होगा कि उन्होंने स्वतंत्र रूप से कार्रवाई की या राजनीतिक दबाव में। संबंधित सांसद और पश्चिम बंगाल के प्रभारी डीजीपी को अदालत के समक्ष इन कार्रवाइयों का स्पष्टीकरण देना होगा। कानून का शासन चुनिंदा रूप से लागू नहीं किया जा सकता। यदि नागरिकों को निशाना बनाते हुए राजनीतिक हितों की रक्षा के लिए राज्य तंत्र का दुरुपयोग किया गया है, तो जवाबदेही तय होनी चाहिए,”
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