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Bengal: बंगाल में सिंगूर मुद्दे को भुनाने की कोशिश में भाजपा, पीएम मोदी की रैली से बड़ा संदेश देने की तैयारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 15 Jan 2026 03:47 PM IST
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सार

पश्चिम बंगाल का चुनावी रण बेहद रोचक होने वाला है। सत्ताधारी टीएमसी और भाजपा के बीच अभी से ही रस्साकशी शुरू हो गई है। जहां टीएमसी सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ लड़ाई, एसआईआर के मुद्दे पर चुनाव में जाने की तैयारी कर रही है। वहीं भाजपा ने घुसपैठ के साथ ही एक और अहम मुद्दे पर चुनाव लड़ने की तैयारी की है। तो आइए जानते हैं कि क्या है वो मुद्दा, जो चुनाव का पासा पलट सकता है।

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ममता बनर्जी और पीएम मोदी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल में राजनीति एक बार फिर उसी जगह पर आ गई है, जहां से कभी ममता बनर्जी की राजनीति का उदय हुआ था और अब भाजपा भी वहीं पर संभावनाएं तलाश रही है। दरअसल वह जगह है हुगली जिले का सिंगूर क्षेत्र, जहां कभी टाटा नैनो की फैक्ट्री हुआ करती थी। अब भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 18 जनवरी को होने वाली रैली के लिए इसी जगह को चुना है। माना जा रहा है कि इसके जरिए भाजपा बंगाल के औद्योगिक विकास की रेस में पिछड़ने और छूटे हुए आर्थिक अवसरों को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है।
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औद्योगिक विकास को मुद्दा बनाने की तैयारी
  • भाजपा नेताओं का मानना है कि सिंगूर में रैली आयोजित करने से एक प्रतीकात्मक संदेश लोगों के बीच जाएगा कि टाटा नैनो प्रोजेक्ट के जाने के बाद से बंगाल में कोई नई इंडस्ट्री नहीं आई है।
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  • आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा औद्योगिक विकास के मुद्दे पर ममता बनर्जी सरकार को घेरने की कोशिश कर सकती है।
  • भाजपा नेताओं का कहना है कि अगर भाजपा राज्य की सत्ता में आई तो औद्योगिक विकास पर फोकस किया जाएगा। 
'राज्य की प्रतिभा के जबरन पलायन को रोकना जरूरी' 
  • प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सिंगूर की नैनो साइट को औद्योगिक भूमि में बदल दिया गया था, जिस वजह से वहां अब लगभग न के बराबर कृषि गतिविधि है। इसलिए भारी उद्योगों को आकर्षित करने के लिए हमें एक व्यापक भूमि नीति की आवश्यकता है। इससे राज्य की प्रतिभा और कार्यबल के जबरन पलायन रोका जा सकता है।
  • उन्होंने कहा कि उद्योगों के विकास में किसानों की प्रत्यक्ष भागीदारी होनी बेहद जरूरी है। आवश्यकता पड़ने पर किसानों को भी अपनी भूमि छोड़नी पड़ सकती है।
  • उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के "कृषि-उद्योग सह-अस्तित्व सिद्धांत" को खारिज कर दिया।
  • भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य की 82% भूमि छोटे किसानों के पास है और बड़े उद्योग सिर्फ कृषि भूमि पर ही स्थापित किए जा सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि 'बंगाल एक खनिज-समृद्ध राज्य है और इसकी भौगोलिक स्थिति भी अनूठी है। इसलिए अगर हम राज्य के औद्योगिक विकास को राजनीतिक दबाव से मुक्त रखें तो निवेशकों को आसानी से यहां आकर्षित किया जा सकता है।'
सिंगूर आंदोलन से ही ममता बनर्जी ने बंगाल की राजनीति में बनाई थी पैठ
  • बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार द्वारा सिंगूर में टाटा नैनो प्रोजेक्ट के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई थी। जिसका ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने विरोध किया।
  • टीएमसी ने उपजाऊ कृषि भूमि के जबरन अधिग्रहण के खिलाफ किसानों को एकजुट कर विरोध प्रदर्शन किया।
  • इस विरोध प्रदर्शन के दौरान जमकर आगजनी और हिंसा हुई।  जिसके बाद टाटा मोटर्स को 2008 में सिंगूर परियोजना को बंद करने और बाद में इसे गुजरात में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर होना पड़ा। 
  • तत्कालीन टाटा संस के चेयरमैन रतन टाटा ने 3 अक्टूबर, 2008 को सिंगूर से बाहर निकलने की आधिकारिक घोषणा करते हुए उन्होंने ममता बनर्जी उनके फैसले का एकमात्र कारण बताया था।
  • सिंगूर आंदोलन के बाद ही ममता बनर्जी की बंगाल की राजनीति में पैठ बनी और टीएमसी साल 2011 में तीन दशक लंबे वामपंथी शासन का अंत कर बंगाल की सत्ता पर काबिज हुई। 

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