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बंगाल नाव हादसा: आठ दिन पहले कैसे डूबी 15 मछुआरों से भरी नौका? नौ के मिले शव, छह अभी भी लापता; मुआवजे का एलान

Tue, 14 Jul 2026 12:14 AM IST
Devesh Tripathi पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता Published by: Devesh Tripathi Updated Tue, 14 Jul 2026 12:14 AM IST
सार

बंगाल की खाड़ी में डूबे एक मछली पकड़ने वाले ट्रॉलर से नौ मछुआरों के शव बरामद किए गए हैं, जबकि छह अन्य की तलाश जारी है। आठ दिन तक चले खोज अभियान के बाद ट्रॉलर को समुद्र से निकालकर तट पर लाया गया। शुरुआती जांच में खराब मौसम को हादसे की संभावित वजह माना जा रहा है, हालांकि अंतिम कारण जांच के बाद स्पष्ट होगा। शवों की हालत खराब होने के कारण उनकी पहचान डीएनए जांच से की जाएगी।

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बंगाल नाव हादसा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI

विस्तार

बंगाल की खाड़ी में हुए एक नाव हादसे में सोमवार को पश्चिम बंगाल के नौ मछुआरों की मौत हो गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बंगाल नाव हादसे में हुई मौतों पर शोक व्यक्त किया। एक व्यापक तलाशी अभियान के बाद बंगाल की खाड़ी में डूबी एक नाव से मछुआरों के नौ शव बरामद किए गए।
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एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दक्षिण 24 परगना तट के पास बंगाल की खाड़ी में डूबे एक ट्रॉलर से नौ मछुआरों के शव बरामद किए गए हैं, जबकि छह अन्य अब भी लापता हैं। अधिकारी ने बताया कि शव इतने अधिक सड़ चुके हैं कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है।
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कब हुआ था बंगाल में नाव हादसा?
'जय मां काली' नाम का ट्रॉलर दो जुलाई को पूर्व मेदिनीपुर जिले के शंकरपुर मछली बंदरगाह से 15 मछुआरों को लेकर मछली पकड़ने के लिए निकला था। इनमें पड़ोसी राज्य ओडिशा के तीन मछुआरे भी शामिल थे। छह जुलाई के बाद से ट्रॉलर से संपर्क टूट गया था।
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पीएम मोदी ने हादसे पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर दुख जताया। पीएमओ ने एक्स पर पोस्ट में कहा, "पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में नाव दुर्घटना में लोगों की मौत बेहद दुखद है। शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदनाएं। घायल जल्द स्वस्थ हों। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से प्रत्येक मृतक के परिजन को दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे।"

आठ दिन तक चला तलाशी अभियान
आठ दिन तक चले तलाश अभियान के बाद शनिवार को पुलिस और भारतीय तटरक्षक बल ने बक्खाली तट से करीब 35 किलोमीटर दूर बाघेर चार के पास डूबे हुए ट्रॉलर का पता लगाया। रविवार को कई मछली पकड़ने वाले ट्रॉलरों की मदद से इसे खींचकर पाथरप्रतिमा के सीतारामपुर तट तक लाया गया। इसके बाद पूरी रात चले बचाव अभियान में ट्रॉलर के अंदर से नौ मछुआरों के शव बरामद किए गए।

लापता मछुआरों की तलाश जारी
दक्षिण 24 परगना के एक अधिकारी ने बताया कि छह मछुआरों का अब भी कोई पता नहीं चल सका है और उनकी तलाश जारी है। उन्होंने पीटीआई से कहा, "तटरक्षक बल, पुलिस और स्थानीय मछुआरे लापता मछुआरों की तलाश के लिए गहन अभियान चला रहे हैं। शवों को पोस्टमार्टम के लिए काकद्वीप उपमंडलीय अस्पताल भेज दिया गया है और जिला प्रशासन शोकाकुल परिवारों को हरसंभव सहायता दे रहा है।"

बंगाल की खाड़ी में कैसे डूबी नाव?
अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि बंगाल की खाड़ी में खराब मौसम का सामना करने के बाद ट्रॉलर पलट गया होगा। हालांकि, हादसे के सही कारण का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। उन्होंने कहा कि नौ शव इतने अधिक सड़ चुके हैं कि उनकी पहचान करना मुश्किल है।

उन्होंने कहा, "डीएनए जांच के बाद ही उनकी पहचान हो सकेगी। तब तक यह नहीं कहा जा सकता कि मृतकों में कितने पश्चिम बंगाल के हैं और कितने ओडिशा के।" अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में इस ट्रॉलर से 16 लोगों को मछली पकड़ने जाना था, लेकिन किसी कारणवश एक व्यक्ति नहीं गया।

लापता लोगों में ओडिशा के मछुआरे भी शामिल
लापता लोगों में ओडिशा के बालासोर जिले के तीन सगे भाई रवींद्र माझी (52), जयराम माझी (49) और जगन्नाथ माझी (45) शामिल हैं। उनके रिश्तेदार सन्यासी माझी ने बताया कि तीनों पहले की तरह इस बार भी मछली पकड़ने के काम के लिए शंकरपुर गए थे।

उन्होंने कहा, "उनके बुजुर्ग माता-पिता, पत्नियां और छोटे बच्चे अब बिना सहारे के रह गए हैं। हमें उम्मीद है कि सरकार इन परिवारों के साथ खड़ी होगी।" बाकी मृतक और लापता मछुआरे पूर्व मेदिनीपुर, हावड़ा और नदिया जिलों के रहने वाले हैं। काकद्वीप उपमंडलीय अस्पताल की मोर्चरी के बाहर उनके परिजन मौजूद हैं, जबकि बाकी छह मछुआरों की तलाश जारी है।


इस बीच, ओडिशा के बालासोर जिले से मिली एक रिपोर्ट में बताया गया कि राज्य के भोगराई ब्लॉक के उलुदा गांव के रहने वाले तीन मछुआरों के परिजनों को प्रशासन ने काकद्वीप भेजा है। बालासोर के जिलाधिकारी सूर्यवंशी मयूर विकास ने कहा कि मछुआरों की पहचान के लिए प्रशासन की ओर से हर तरह की जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
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