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चुनाव हारकर भी मुख्यमंत्री बनीं रह सकती हैं ममता?: इस्तीफा नहीं दिया तो क्या होगा, जानें क्या कहता है संविधान

Tue, 05 May 2026 06:02 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 05 May 2026 06:02 PM IST
सार

तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने भाजपा और चुनाव आयोग को घेरते हुए कहा कि उन्हें जनादेश से नहीं, बल्कि साजिश से हराया गया है।

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West Bengal Election Result 2026 Mamata Banerjee Assembly Polls Chief Minister Resignation TMC Government
बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने जा रही है। दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस का 15 साल के शासन का अब अंत हो चुका है। इस बीच मंगलवार को राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इसमें उन्होंने भाजपा पर गलत तरीके से चुनाव जीतने का आरोप लगाया। साथ ही चुनाव आयोग को भी घेरा। इस बीच उन्होंने एक सवाल पर कहा कि मैं इस्तीफा नहीं दूंगी, क्योंकि हमें जनादेश से नहीं, बल्कि साजिश से हराया गया है। 
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ममता ने इस बयान में यह भी जोड़ा कि वे चुनाव नहीं हारी हैं, इसलिए लोकभवन जाने का सवाल ही नहीं है। ममता ने चुनौती देते हुए कहा कि वह चाहें तो सांविधानिक नियमों से कार्रवाई कर सकते हैं। 
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर अगर कोई मुख्यमंत्री चुनाव में हार के बाद अपने पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दे तो क्या हो सकता है? संविधान में नई सरकार के गठन और चुनाव हारने वाले सीएम को हटाए जाने से जुड़े क्या नियम हैं? इन नियमों को लागू करने की जिम्मेदारी किसकी होती है? आइये जानते हैं...
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ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल: 'इस्तीफा देने नहीं जाऊंगी', नतीजों में मिली हार के बाद ममता ने चुनाव आयोग-BJP पर लगाए पांच आरोप

पहले जानें- कैसे अपने पद से हट सकता है कोई मुख्यमंत्री?

अगर कोई मुख्यमंत्री विधानसभा में बहुमत खोने या चुनाव हारने के बाद भी इस्तीफा देने से इनकार कर देता है, तो स्थिति को संभालने के लिए सांविधानिक और कानूनी रास्ते अपनाए जाते हैं।

1. विधानसभा में बहुमत खोने पर
अगर ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री के पास बहुमत बनाए रखने के लिए विधायकों का समर्थन नहीं है, तो उन्हें फ्लोर टेस्ट का सामना करना पड़ता है। राज्यपाल मुख्यमंत्री को सदन बुलाने और अपना बहुमत साबित करने का निर्देश दे सकते हैं। वहीं, विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है। अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिपरिषद को सांविधानिक रूप से तुरंत इस्तीफा देना पड़ता है।

अगर मुख्यमंत्री फ्लोर टेस्ट में विफल रहते हैं और फिर भी पद छोड़ने से इनकार करते हैं, तो राज्यपाल के पास मुख्यमंत्री को बर्खास्त करने की शक्तियां होती हैं। हालांकि, यह पूरी स्थिति तभी लागू होती है, अगर नई विधानसभा गठित हो चुकी है। पश्चिम बंगाल में फिलहाल ताजा चुनाव हुए हैं और अब तक विधानसभा का गठन नहीं हुआ है। 

2. चुनाव में हार या कार्यकाल खत्म होने पर
जब विधानसभा चुनाव में सत्तासीन दल हार जाता है तो आम प्रक्रिया यह कि उस दल का नेता खुद ही जाकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपता है, जिसके बाद राज्यपाल नई सरकार के गठन के लिए सबसे बड़े दल को आमंत्रित करते हैं। हालांकि, अगर कोई मुख्यमंत्री हार के बावजूद व्यक्तिगत रूप से इस्तीफा न भी दें तो पुरानी विधानसभा का कार्यकाल खत्म होते ही सरकार का कानूनी वजूद खत्म हो जाता है।

इस लिहाज से देखा जाए तो पश्चिम बंगाल में सरकार का कार्यकाल 7 मई तक ही है। इसके बाद चुनी हुई सरकार का कार्यकाल खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगा और इसी के साथ मुख्यमंत्री पद भी अपने आप ही खाली हो जाएगा। यानी ममता बनर्जी इस पद से बिना इस्तीफा दिए ही हट जाएंगी और राज्यपाल को नई सरकार के गठन के लिए सबसे बड़े दल को बुलाना पड़ेगा। इसके बाद नए मुख्यमंत्री के शपथ लेते ही पिछला प्रशासन अपने आप खत्म हो जाता है और नई सरकार का शासन शुरू होता है।

3. सांविधानिक संकट और राष्ट्रपति शासन
अगर किसी राज्य में सरकार के शासन के दौरान मुख्यमंत्री के इस्तीफा न देने से गतिरोध पैदा हो जाए और कोई अन्य दल सरकार बनाने की स्थिति में न हो तो...

अनुच्छेद 356: राज्यपाल राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेज सकते हैं कि राज्य का शासन संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता। ऐसी स्थिति में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। इसके बाद विधानसभा को भंग या स्थगित कर दिया जाता है और राज्य का सीधा नियंत्रण केंद्र सरकार (राज्यपाल के माध्यम से) के पास चला जाता है। इसके बाद सही समय को देखते हुए नई सरकार के गठन की कोशिश की जाती है। यह या तो दोबारा चुनाव कराकर संभव होता है या किसी दल के बहुमत के लिए जरूरी विधायकों को जुटाने के बाद। हालांकि, बंगाल को देखा जाए तो सामने आता है कि यहां चुनाव के बाद अब तक सरकार का गठन ही नहीं हुआ है।  

4. छह महीने के भीतर निर्वाचित न होने पर
अगर कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री बना है, लेकिन वह विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं है तो संविधान के अनुच्छेद 164(4) के मुताबिक, अगर वह शपथ लेने के छह महीने के अंदर सदन के सदस्य नहीं बन पाते, तो उसे अपने आप पद छोड़ना होगा। हालांकि, यह स्थिति भी तभी लागू होती है, जब राज्यपाल पहले ही किसी दल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर चुके हों और सीएम का शपथग्रहण राज्यपाल की ही मौजूदगी में पूरा हुआ हो। इन दोनों स्थितियों के बिना कोई व्यक्ति सीएम नहीं बन सकता।

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