Bengal SIR Deadline: सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर की डेडलाइन एक सप्ताह बढ़ाई; बंगाल सरकार और DGP से मांगा जवाब
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश पारित किए। कोर्ट ने डेडलाइन बढ़ाने के साथ-साथ सरकार और डीजीपी से जवाब भी मांगा। अदालत ने कहा कि एसआईआर में लगे 8500 से अधिक अफसर जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) को रिपोर्ट करें। जानिए कोर्ट ने और क्या बातें कहीं?
विस्तार
पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करा रहा है। मतदाता सूची से जुड़ा यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। कोर्ट ने आज इस मामले में अहम दिशा-निर्देश दिए। चीफ जस्टिस ने एसआईआर की समयसीमा बढ़ाने का भी निर्देश दिया। सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) की डेडलाइन एक सप्ताह और बढ़ाई जा रही है।
डेडलाइन एक सप्ताह बढ़ाई गई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, निर्वाचन आयोग (ECI) को पश्चिम बंगाल एसआईआर प्रक्रिया के बाद फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश करने के लिए और समय दिया जा रहा है। एसआईआर की डेडलाइन 14 फरवरी से एक हफ्ते आगे बढ़ाई जा रही है।
तीन जजों की पीठ ने बंगाल सरकार को दिए अहम आदेश
तारीख बढ़ाने का आदेश पारित करने से पहले चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया में लगे सभी अधिकारी जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) को रिपोर्ट करेंगे। कोर्ट ने मुकदमे की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील को अनुशासन का पाठ भी पढ़ाया। चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली इस पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और एनवी अंजरिया भी शामिल हैं।
महिला वकील की दलील पर नाराज हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत
दरअसल, ममता बनर्जी की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा, बीते चार फरवरी को अदालत ने नोटिस जारी किया, जिसमें कई टिप्पणियां थीं। बीते हफ्ते में कई बदलाव हुए हैं। इसी बीच सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी के हस्तक्षेप पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि ये कोई बाजार नहीं है। कोर्ट में अनुशासन और गरिमा बनाए रखें। मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि मंदिरों की देखरेख करने वाले एक संगठन ने एक याचिका दायर की है। उनका इस मामले में क्या हित हो सकता है? उनकी इस दलील पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, बारी-बारी से सुनते हैं। अगर अनुशासन बनाए नहीं रखा गया तो आपको चीफ जस्टिस के का स्वभाव पता होना चाहिए। तल्ख लहजे में जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा- आप किसी बाजार में बैठे हैं या अदालत में हैं?
बंगाल के डीजीपी को हलफनामा दायर करने का निर्देश
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कहा कि कुछ बदमाशों / असामाजिक तत्वों ने अपने नोटिस जला डाले। इस आरोप पर कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ और बातों पर भी जोर दिया। कोर्ट की टिप्पणियों पर बिंदुवार एक नजर:
- किसी को भी पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर में रुकावट डालने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
- राज्य सरकार ने चुनाव आयोग को 8,505 ग्रुप B अधिकारियों की लिस्ट दी है। उन्हें ट्रेनिंग देकर SIR की प्रक्रिया में लगाया जा सकता है।
- चुनाव आयोग के आरोपों पर पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) हलफनामा दाखिल करें।
- निर्वाचन आयोग ने फॉर्म 7 (आपत्ति फॉर्म) जलाने का आरोप लगाया है। डीजीपी इस संबंध में जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब दें और बताएं कि पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाए हैं।
- बदमाशों के खिलाफ अब तक कोई FIR दर्ज नहीं किए जाने का चुनाव आयोग का आरोप चिंताजनक है।
निर्वाचन आयोग के वकील ने क्या दलीलें दीं?
सुनवाई के दौरान सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, अदालत के फैसले से यह संदेश जाना चाहिए कि भारत का संविधान सभी राज्यों पर लागू होता है। निर्वाचन आयोग ने एक हफ्ते पहले ही विस्तृत हलफनामा फाइल किया है। इसमें बहुत चिंताजनक बातें है। एक सांविधानिक संस्था शीर्ष कोर्ट को कुछ बताना चाहती है।
ये भी पढ़ें:- Supreme Court: 'SIR मामले में ममता बनर्जी की व्यक्तिगत पेशी कानूनी रूप से अनुचित', शीर्ष कोर्ट में याचिका दायर
सीएम की याचिका में क्या-क्या?
गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने अपनी याचिका में विशेष गहन मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाया है। उन्होंने चुनाव आयोग पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया और कहा कि इस प्रक्रिया में समाज के कमजोर वर्गों के लाखों मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान किसी भी मतदाता का नाम न हटाया जाए, खासकर उन लोगों के जो तार्किक विसंगतियां श्रेणी में हैं।
वहीं पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया था और मामले की अगली सुनवाई सोमवार के लिए निर्धारित की थी। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने कहा था कि स्थानीय बोलियों के कारण नामों की वर्तनी में अंतर पूरे देश में होता है और इसे मतदाता को बाहर करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
ये भी पढ़ें:- SC में बोलीं ममता: 'व्हाट्सएप आयोग जैसा है चुनाव आयोग, सिर्फ नाम काटने के लिए हो रहा SIR, निशाने पर बंगाल'
ममता बनर्जी ने क्या कहा था?
गौरतलब है कि सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि शादी के बाद नाम बदलने वाली महिलाएं और जिन लोगों ने अपने निवास स्थान बदले हैं, वे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल को लक्षित किया जा रहा है और असम जैसे अन्य राज्यों में ऐसी मतदाता संशोधन प्रक्रिया नहीं चल रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को बार-बार शिकायतें भेजी गईं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आश्वासन दिया कि कोई भी वास्तविक मतदाता अपना अधिकार नहीं खोएगा और व्यावहारिक समाधान निकाला जाएगा।
संबंधित वीडियो
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.