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West Bengal: पश्चिम बंगाल में लॉटरी के खिलाफ बढ़ी आवाजें, फालाकाटा के लोग बोले- गरीबों पर बोझ, बंद हो सिस्टम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: Shubham Kumar Updated Fri, 17 Apr 2026 11:56 PM IST
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सार

पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के फालाकाटा में लॉटरी सिस्टम के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोग इसे गरीबों के लिए नुकसानदायक और लत फैलाने वाला बता रहे हैं। विक्रेताओं का कहना है कि रोज 800-900 रुपये की बिक्री के बावजूद कमाई तय नहीं होती। वहीं खरीदार भी कर्ज और नुकसान में डूब रहे हैं।

West Bengal Voices Rise Against Lottery System People Call It a Burden on the Poor Demand Its Abolition
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ani
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विस्तार

पश्चिम बंगाल में आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अलीपुरद्वार जिले के फालाकाटा इलाके में लॉटरी सिस्टम के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। यहां के लोग अब खुलकर इस सिस्टम को बंद करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि लॉटरी गरीब लोगों के लिए नुकसान, कर्ज और लत का कारण बन गई है। फालाकाटा के रहने वाले कई लोगों ने बताया कि लॉटरी से उन्हें कोई फायदा नहीं होता, बल्कि नुकसान ही होता है।

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उनका कहना है कि वे रोज करीब 800-900 रुपये की टिकट बेचते हैं, लेकिन कमाई तय नहीं होती। अगर कोई टिकट जीत जाए तभी कुछ फायदा होता है, वरना कुछ नहीं मिलता। उन्होंने यह भी बताया कि इस काम में ज्यादातर गरीब और बेरोजगार लोग ही जुड़े हैं।

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खरीदार भी हो रहे हैं परेशान
ऐसा नहीं है कि लॉटरी सिस्टम से केवल लॉटरी बेचने वाले लोग परेशान है। इससे लॉटरी खरीदने वाले भी अच्छा खासा परेशानी का सामना करना पडड़ रहा है। स्थानीय निवासी दीपक का कहना है कि लॉटरी का सबसे बड़ा ग्राहक खुद दुकानदार ही बन जाता है, क्योंकि अगर टिकट नहीं बिकती तो उसे खुद खरीदनी पड़ती है। उनके भाई ने दुकान खोलकर सिर्फ एक महीने में करीब 1 लाख रुपये गंवा दिए। दीपक ने कहा कि लोग खाने के पैसे न होने के बावजूद लॉटरी खरीदते हैं, इस उम्मीद में कि एक दिन बड़ी रकम जीत जाएंगे, लेकिन अंत में वे और गरीब हो जाते हैं।

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कर्ज और आत्महत्या तक की नौबत
इस लॉटरी के चलते कर्ज और आत्महत्या तक के मामले सामने आए हैं। इस बात की जानकारी स्थानीय निवासी शंकर मजूमदार ने इस विषय में बताया कि गांव में कई युवाओं ने लॉटरी खरीदने के लिए ब्याज पर कर्ज लिया और सब कुछ हार गए। कुछ लोग इस दबाव को सहन नहीं कर पाए और उन्होंने आत्महत्या तक कर ली। उन्होंने कहा कि रोज कमाने वाले मजदूर 200-250 रुपये कमाते हैं, लेकिन उसमें से 100-150 रुपये लॉटरी में खर्च कर देते हैं, जिससे उनके परिवार पर बुरा असर पड़ता है।

लोगों ने सिस्टम को बताया खराब
लॉटरी के सिस्टम को लेकर भी लोगों में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है। स्थानीय निवासी विक्रमादित्य बताते हैं कि लॉटरी सिस्टम पूरी तरह से गलत है, क्योंकि इसमें न बेचने वाले को फायदा होता है, न खरीदने वाले को। लाखों लोग पैसा लगाते हैं, लेकिन जीतने वाला बहुत कम होता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार लॉटरी बंद करे, तो उन लोगों के लिए दूसरी नौकरी का इंतजाम भी करे, जो इस पर निर्भर हैं।

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लंबे समय से खरीद रहे लोग भी निराश
दूसरी ओर इस लॉटरी को लंबे समय तक खरीदने वाले लोगों में भी काफी नाराजगी देखने को मिल रही है। ट्रक ड्राइवर असित देबनाथ बताते हैं कि उन्होंने 3-4 साल में 4-5 लाख रुपये की लॉटरी खरीदी, लेकिन सिर्फ 1-1.5 लाख ही वापस मिले। उन्होंने इसे सीधा जुआ बताया और कहा कि इसे बंद होना चाहिए। इसके साथ ही 30 साल से लॉटरी खरीदने वाले हरे कृष्ण दास ने कहा कि उन्होंने 30 साल में 8-9 लाख रुपये खर्च किए, लेकिन सिर्फ 4-5 लाख ही वापस मिले। उनका कहना है कि यह एक लत बन चुकी है और लोग हर महीने हजारों रुपये इसमें गंवा देते हैं।

चुनाव में बन सकता है बड़ा मुद्दा
देखा जाए तो इस मामले का असर आगामी विधानसभा चुनाव पर भी देखने को मिल रहा है। अब फालाकाटा के लोग चाहते हैं कि सभी राजनीतिक पार्टियां चाहे वह सत्ताधारी हों या विपक्ष इस मुद्दे को अपने चुनावी एजेंडे में शामिल करें। लोगों की मांग कर रहे हैं कि लॉटरी सिस्टम को पूरी तरह बंद किया जाए। इसके साथ ही इससे जुड़े लोगों के लिए दूसरी नौकरी का इंतजाम किया जाए। गौरतलब है कि जो मुद्दा पहले सिर्फ व्यक्तिगत पसंद माना जाता था, अब वह एक बड़ा सामाजिक और आर्थिक मुद्दा बनता जा रहा है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो इससे गरीबों की हालत और खराब हो सकती है।

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