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उत्तर भारत में कब पहुंचेगा मानसून?: पहाड़ों पर आफत की बारिश, मैदान गर्मी से बेहाल; इन राज्यों में अलर्ट जारी

Mon, 29 Jun 2026 06:11 AM IST
Pavan अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Mon, 29 Jun 2026 06:11 AM IST
सार

Weather Update: उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और आसपास के इलाकों में भीषण गर्मी और लू का असर जारी है। हालांकि भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) का कहना है कि अगले कुछ दिनों में उत्तर भारत में मानसून के आगे बढ़ने से राहत मिलने की उम्मीद है। पढ़ें, आपके राज्य में कैसा रहेगा मौसम का हाल...

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When will monsoon reach North? rains wreak havoc in hills, plains under heat; alerts issued for these states
पूर्वोत्तर में बारिश, उत्तर-पश्चिम में लू का कहर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

देश में मानसून अब तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ कई राज्यों में तबाही भी देखने को मिल रही है। पूर्वोत्तर भारत में लगातार बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। सिक्किम और असम में पुल बह गए हैं, जबकि अरुणाचल प्रदेश में बादल फटने और भूस्खलन के कारण सात जिलों का सड़क संपर्क टूट गया है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और आसपास के इलाकों में भीषण गर्मी और लू का असर जारी है। हालांकि भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) का कहना है कि अगले कुछ दिनों में उत्तर भारत में मानसून के आगे बढ़ने से राहत मिलने की उम्मीद है। विभाग के अनुसार अगले पांच दिनों तक पूर्वोत्तर भारत तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।
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उत्तरी सिक्किम के जोंगू क्षेत्र में शनिवार रात हुई भारी बारिश के कारण फी खोला पर बना पुल बह गया। इससे फिदांग-सांकलांग मार्ग पर यातायात पूरी तरह बंद हो गया है। दक्षिण सिक्किम के लिंगी क्षेत्र के अपर काव खोला इलाके में भी भारी नुकसान हुआ है। वहीं असम के धेमाजी जिले में केमी और ओयान को जोड़ने वाला तीन सौ मीटर लंबा पुल बह गया। जिससे आवागमन ठप हो गया है। अरुणाचल में 24 घंटों में भारी बारिश से बहुत भारी बारिश हुई, जबकि अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई।
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दो से तीन दिन में आगे बढ़ेगा मानसून
मौसम विभाग के अनुसार अगले दो से तीन दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार तथा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ सकता है। इसके बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और दक्षिण-पूर्व राजस्थान के कुछ क्षेत्रों तक भी मानसून पहुंचने की संभावना है।

उत्तर-पश्चिम भारत में फिलहाल लू का दौर
उत्तर-पश्चिम भारत में फिलहाल लू का असर बना हुआ है। आईएमडी ने 29 जून को उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में लू से लेकर भीषण लू चलने की चेतावनी जारी की है। हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में भी 30 जून तक लू चल सकती है। बिहार में भी 28 और 29 जून को लू की स्थिति रहने की आशंका है। राजस्थान के फलोदी में शनिवार को देश का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 43.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।  हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि 30 जून से उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम बदलने लगेगा। हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी।



मेघालय में 39, बंगाल में 26 सेंटीमीटर बारिश दर्ज
पिछले 24 घंटों के दौरान मेघालय में 39 सेंटीमीटर, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में 26 सेंटीमीटर, अरुणाचल प्रदेश में 15 सेंटीमीटर और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 12 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा पूर्वी मध्य प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, पूर्वी उत्तर प्रदेश, ओडिशा, गोवा, विदर्भ, छत्तीसगढ़, मिजोरम, केरल और तमिलनाडु के कई हिस्सों में भी भारी वर्षा हुई। कई राज्यों में 40 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चलीं। प्रशासन भी लगातार चेतावनी जारी करता रहा।


मध्य भारत में 29 जून से चार जुलाई तक अच्छी बारिश का अनुमान
मध्य भारत में भी अगले सप्ताह बारिश तेज होने के संकेत हैं। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में 28 जून से 4 जुलाई तक व्यापक वर्षा का अनुमान है। पश्चिमी और पूर्वी मध्य प्रदेश में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं गुजरात, कोंकण-गोवा और मध्य महाराष्ट्र में भी एक से चार जुलाई के बीच भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। दक्षिण भारत में केरल, तटीय कर्नाटक, तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश में भी अगले कई दिनों तक अच्छी बारिश होने का अनुमान है।

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किन्नौर कैलाश यात्रा स्थगित ग्लेशियर-भूस्खलन का खतरा
वहीं, तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए किन्नौर कैलाश यात्रा 2026 को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है। जिला प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर ग्लेशियर, अस्थिर चट्टानों और भूस्खलन के गंभीर खतरों को देखते हुए यह निर्णय लिया है। यह फैसला एक विशेष टोही दल की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। इस दल का गठन 21 जून को हुई बैठक के बाद लिया गया था। टोही दल ने अपनी रिपोर्ट में यात्रा मार्ग पर अत्यधिक संवेदनशील और खतरनाक बताया है। संवाद
 
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