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Explainer: कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो, विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ चुका नेता कैसे बना छात्र आंदोलन का चेहरा?

Wed, 05 Aug 2026 03:30 PM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Wed, 05 Aug 2026 03:30 PM IST
सार

झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। इस आंदोलन के केंद्र में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो हैं, जो इन दिनों भूख हड़ताल और छात्रों की मांगों को लेकर चर्चा में हैं। ऐसे में जानिए आखिर देवेंद्र नाथ महतो कौन हैं और वे छात्र आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा कैसे बने।

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Who is Devendra Nath Mahto and how did he become the face of Jharkhand's student movement?
झारखंड में विरोध प्रदर्शन का चेहरा - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर कई दिनों से छात्र सड़क पर हैं। आंदोलन, धरना और भूख हड़ताल के बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र ने बुधवार को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से भी फोन पर बातचीत की। 

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ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर देवेंद्र नाथ महतो कौन हैं, उनकी राजनीतिक और आंदोलनकारी पृष्ठभूमि क्या है? वे इन दिनों सुर्खियों में क्यों हैं? पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ? सरकार ने क्या कदम उठाए?

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अभी चर्चा में क्यों हैं देवेंद्र नाथ महतो?

देवेंद्र नाथ महतो इन दिनों 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा और अन्य भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने 25 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना शुरू किया और 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। उनका कहना था कि जब तक सरकार छात्रों की मांगों पर कार्रवाई नहीं करती, तब तक वे भोजन ग्रहण नहीं करेंगे। 

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करीब चार दिन तक भूख हड़ताल पर रहने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अपील और आंदोलन को समर्थन देने के आश्वासन पर उन्होंने आज केवल पानी और नमक लेकर अपना अनशन समाप्त किया। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि झारखंड के छात्रों को न्याय मिलने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। वे कहते हैं कि पिछले 26 वर्षों से झारखंड के युवा भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों से परेशान हैं। नौकरियां बेची जा रही हैं और लगभग हर परीक्षा का पेपर लीक हो रहा है। 

Who is Devendra Nath Mahto and how did he become the face of Jharkhand's student movement?
देवेंद्र नाथ महतो - फोटो : Amar Ujala

देवेंद्र नाथ महतो कौन हैं?

देवेंद्र नाथ महतो झारखंड के रांची जिले के राहे प्रखंड के कापीडीह गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता बिशम्भर महतो सेवानिवृत्त सरकारी शिक्षक हैं। उन्होंने रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (SPMU) से स्नातक किया और बाद में कुरमाली भाषा में पोस्ट ग्रेजुएशन तथा बीएड की पढ़ाई की। चुनावी शपथपत्र के अनुसार उनका पेशा छात्र और खेती है व वे सिल्ली विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं।

छात्र नेता कैसे बने?

देवेंद्र नाथ महतो कॉलेज के दिनों से ही छात्र हितों के मुद्दे उठाते रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2015 में तत्कालीन रघुवर दास सरकार की नियोजन नीति के खिलाफ आंदोलन किया। इसके बाद 2016 में छात्रवृत्ति में कटौती के विरोध में प्रदर्शन किया। वर्ष 2019 में जेपीएससी भर्ती में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ बड़े छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसके बाद वे पूरे राज्य में छात्र नेता के रूप में पहचान बनाने लगे। उनके साथियों का दावा है कि उनके नेतृत्व में हुए आंदोलनों के बाद जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और जैक की मैट्रिक परीक्षा भी रद्द करनी पड़ी थी।

Who is Devendra Nath Mahto and how did he become the face of Jharkhand's student movement?
देवेंद्र नाथ महतो - फोटो : Amar Ujala

चुनावी राजनीति में कैसे रखा कदम?

देवेंद्र नाथ महतो ने छात्र आंदोलन के साथ चुनावी राजनीति में भी किस्मत आजमाई।

  • 2019 झारखंड विधानसभा चुनाव: सिल्ली सीट से निर्दलीय (IND) उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। उस समय उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं था और उन्होंने ₹7,000 की संपत्ति घोषित की।
  • 2024 लोकसभा चुनाव: रांची सीट से निर्दलीय (IND) उम्मीदवार बने। चुनावी शपथपत्र में ₹1.66 लाख की संपत्ति, कोई देनदारी नहीं और 11 आपराधिक मामलों का उल्लेख है। जेल से चुनाव लड़ने के बावजूद उन्हें करीब 1.48 लाख वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे।
  • 2024 झारखंड विधानसभा चुनाव: सिल्ली सीट से झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के उम्मीदवार बने। इस चुनाव में उन्हें लगभग 44 हजार वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे। शपथपत्र में ₹2.90 लाख की संपत्ति और 12 आपराधिक मामलों का जिक्र है।

Who is Devendra Nath Mahto and how did he become the face of Jharkhand's student movement?
चुनावी सफर - फोटो : Amar Ujala

कैसे शुरू हुआ ताजा विवाद?

पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025 की प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित किया। आयोग ने 103 रिक्त पदों के लिए 2,204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया। 

सबसे पहले अभ्यर्थियों ने आयोग से श्रेणीवार कट-ऑफ जारी करने की मांग की। उनका कहना था कि परिणाम घोषित कर दिया गया, लेकिन कट-ऑफ सार्वजनिक नहीं की गई। इसके बाद मेरिट सूची पर भी सवाल उठे। कई अभ्यर्थियों ने दावा किया कि प्रकाशित मेरिट सूची पर आयोग के संवैधानिक सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए।

इसी दौरान सोशल मीडिया पर कुछ कथित ओएमआर शीट वायरल हुईं। इनमें दावा किया गया कि एक अभ्यर्थी ने पेपर-1 में केवल 48 प्रश्न हल किए थे, फिर भी उसे मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित कर दिया गया। इसी तरह बैकलॉग भर्ती परीक्षा को लेकर भी ऐसे आरोप लगाए गए। हालांकि वायरल ओएमआर शीटों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन्हीं दावों ने छात्रों के बीच असंतोष को ओर बढ़ा दिया।

विरोध प्रदर्शन कैसे बढ़ा?

ओएमआर शीटों से जुड़े दावों के बाद छात्र जेपीएससी कार्यालय के बाहर जुटने लगे। धीरे-धीरे प्रदर्शन बड़ा होता गया और आंदोलन रांची के मोराबादी स्थित बापू वाटिका, अल्बर्ट चौक से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंच गया। इसके बाद यह विरोध राज्यव्यापी छात्र आंदोलन का रूप लेने लगा।

छात्रों का कहना है कि यह केवल एक परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि कई वर्षों से भर्ती परीक्षाओं में सामने आ रही गड़बड़ियों के खिलाफ उनका आक्रोश है। आंदोलन के दौरान छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को सौंपे गए मांगपत्र पर कार्रवाई होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने, टीडीपीएल एजेंसी के माध्यम से हुई परीक्षाओं की समीक्षा कराने और जेपीएससी व जेएसएससी की भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग की।

छात्र क्या मांग कर रहे हैं?

  • 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा रद्द की जाए।
  • निष्पक्ष तरीके से दोबारा परीक्षा कराई जाए।
  • जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएं।
  • टीडीपीएल के माध्यम से हुई सभी परीक्षाओं की समीक्षा हो।
  • पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जाए।
  • दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
  • शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय की जाए।

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सीआईडी ने क्या कार्रवाई की? - फोटो : Amar Ujala

सरकार ने क्या कहा?

छात्र आंदोलन के बीच सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की मांगों का समर्थन किया है। पार्टी के महासचिव और राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद पांडेय ने कहा कि राज्य सरकार छात्रों की मांगों पर विचार के लिए एक से दो दिन के भीतर उच्चस्तरीय समिति का गठन करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर दो से तीन दिनों के भीतर दोषियों के खिलाफ उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, सरकार की ओर से समिति के गठन और उसकी कार्यप्रणाली का विस्तृत विवरण अभी जारी नहीं किया गया है। वहीं राज्य  के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आश्वसान दिया है कि सराकर के दरवाजे छात्रों के लिए खुले हैं और उनके मुद्दें को गंभीरता से लिया जाएगा।

अब तक क्या-क्या हो चुका है?

14वीं जेपीएससी संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा-2025 में अनियमितताओं के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को सौंप दी। सीआईडी ने कांड संख्या 16/2026 दर्ज कर विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया और लोगों से परीक्षा से जुड़े दस्तावेज व सबूत साझा करने की अपील की। जांच के दौरान पूर्व जेपीएससी उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया और उनसे पुलिस रिमांड पर पूछताछ की गई। 29 जुलाई को सीआईडी ने 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में सफल सभी अभ्यर्थियों से ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी जमा करने का नोटिस जारी किया। 

इसी बीच 22 जुलाई 2026 को जेपीएससी ने संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा सहित नौ भर्ती परीक्षाएं अगली सूचना तक स्थगित कर दीं। कथित अनियमितताओं के बीच उसी दिन तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया। 

दूसरी ओर, परीक्षा को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं दी, आयोग से चार सप्ताह में जवाब मांगा और अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 तय की। हालांकि, आंदोलन कर रहे छात्र पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।

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