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चिंताजनक: बूस्टर की रफ्तार घटी, उच्च जोखिम समूहों में बढ़ा कोरोना का खतरा; डब्ल्यूएचओ ने चेताया
Thu, 31 Jul 2025 07:23 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
परीक्षित निर्भय
परीक्षित निर्भय
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Thu, 31 Jul 2025 07:23 AM IST
सार
डब्ल्यूएचओ रिपोर्ट के मुताबिक टीके की बूस्टर डोज लेने की गति में भारी गिरावट आई है। यह हालात भारत में सबसे ज्यादा गंभीर है क्योंकि यहां साल 2020 और 2021 में कोरोना टीकाकरण 200 करोड़ पार हुआ था, लेकिन उसके बाद इसमें गिरावट आई है।
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- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
कोविड टीके की बूस्टर डोज नहीं लेने वाले उच्च जोखिम समूहों यानी 60 वर्ष से अधिक आयु या पहले से बीमारी से ग्रस्त लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना का खतरा हो सकता है। यह चेतावनी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी वैश्विक कोविड-19 टीकाकरण रिपोर्ट 2024 में दी है।
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डब्ल्यूएचओ रिपोर्ट के मुताबिक टीके की बूस्टर डोज लेने की गति में भारी गिरावट आई है। यह हालात भारत में सबसे ज्यादा गंभीर है क्योंकि यहां साल 2020 और 2021 में कोरोना टीकाकरण 200 करोड़ पार हुआ था, लेकिन उसके बाद इसमें गिरावट आई है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में भी 2024 के अंत तक पहली और दूसरी खुराक का कवरेज 90% से अधिक रहा, लेकिन बूस्टर खुराक लेने में सुस्ती आई। इसके टीकाकरण को लेकर शहरी इलाकों में औसतन 40–45% तक और ग्रामीण इलाकों में इससे भी कम दर्ज किया है। डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी देते हुए कहा है कि संक्रमण की कम दर और महामारी का असर घटने के बावजूद उच्च जोखिम समूहों में कवरेज बनाए रखना अनिवार्य है। डब्ल्यूएचओ का मानना है कि 2025 में भी कोविड टीकाकरण रणनीति लक्षित और जोखिम आधारित होनी चाहिए। संक्रमण दर भले ही कम हो, लेकिन मौसमी उछाल और नए वेरिएंट्स की संभावना को देखते हुए बूस्टर टीकाकरण पर ध्यान देना जरूरी है। दरअसल भारत में अब तक कोरोना के 4.50 करोड़ मामले सामने आए हैं, जिनमें 5,33,800 लोगों की संक्रमण के चलते मौत हुई है। कुल टीकाकरण की बात करें तो लगभग 220.7 करोड़ खुराक साल 2021 से अब तक ली गई हैं, जिसमें बूस्टर यानी एहतियाती खुराक का टीकाकरण भी शामिल है।
वायरस पूरी तरह खत्म नहीं हुआ
डब्ल्यूएचओ की कोविड-19 तकनीकी प्रमुख डॉ. मारिया वैन केरकोव ने कहा, महामारी भले ही शांत हो, लेकिन वायरस पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जोखिम समूहों की सुरक्षा के लिए सभी देशों को बूस्टर टीकाकरण पर ध्यान देना होगा। आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा, भारत में उत्साह कम हुआ है। ऐसे में लक्षित जागरूकता अभियान पर फोकस जरूरी है।
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भारत की शुरुआती दर सबसे ऊंची, भविष्य पर सवाल
डॉ. केरकोव ने कहा है कि भारत में कोरोना टीकाकरण का सबसे बड़ा फायदा यह है कि हमारी शुरुआती कवरेज दर दुनिया में सबसे ऊंची रही। लेकिन यह तभी असरदार रहेगा जब उच्च जोखिम समूह समय पर बूस्टर खुराक लेते रहें। यह सिर्फ व्यक्तिगत सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि सामूहिक प्रतिरक्षा बनाए रखने का भी सवाल है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में कोरोना टीका की एहतियात खुराक के टीकाकरण में कमी के लिए कई कारण हैं, जिनमें संक्रमित मरीजों में कमी आना प्रमुख है। इसकी वजह से लोग बूस्टर को उतना जरूरी नहीं मान रहे।
- इसके अलावा लगातार टीकाकरण अभियानों से लोगों में थकान और उदासीनता बढ़ी है। खासकर युवा वर्ग में यह धारणा बनी कि अब संक्रमण उतना खतरनाक नहीं।