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Donald Trump: 'शानदार समझौते के साथ होगा अंत', शांति वार्ता पर बोले ट्रंप; संघर्षविराम बढ़ाने से किया इनकार

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Tue, 21 Apr 2026 04:59 PM IST
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सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अंतिम चेतावनी देते हुए 22 अप्रैल के बाद संघर्षविराम बढ़ाने से इनकार कर दिया है। ट्रंप ने कहा कि यदि आधी रात तक समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई और बमबारी शुरू कर सकता है। पाकिस्तान में प्रस्तावित शांति वार्ता पर भी अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस वार्ता का शानदार अंत होगा। 
 

Trump Lashes Out at Iran Again Says it Violated Ceasefire Multiple Times Comments on Upcoming Vote in Virginia
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

दुनिया भर की निगाहें इस समय अमेरिका और ईरान के बीच मंडरा रहे युद्ध के बादलों पर टिकी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस तनावपूर्ण माहौल में अपनी स्थिति साफ कर दी है कि शांति की समय सीमा अब समाप्त हो चुकी है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि 22 अप्रैल की आधी रात के बाद वह किसी भी कीमत पर संघर्षविराम को आगे नहीं बढ़ाएंगे। 
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क्या बुधवार के बाद अमेरिका फिर से शुरू करेगा बमबारी?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीएनबीसी को दिए एक साक्षात्कार में बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा है कि कूटनीति के लिए अब और समय देना मुमकिन नहीं है। ट्रंप ने कहा कि हमारे पास इतना समय नहीं है। समय सीमा 22 अप्रैल है और मैं संघर्षविराम को बढ़ाना नहीं चाहता। 
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जब उनसे पूछा गया कि क्या समझौता न होने पर वह फिर से सैन्य कार्रवाई करेंगे, तो ट्रंप ने बिना झिझक कहा कि वह बमबारी की उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि उनका मानना है कि इसी रवैये के साथ आगे बढ़ना बेहतर है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका इस समय वार्ता में बहुत मजबूत स्थिति में है और वह वह काम कर रहे हैं जो पिछले 47 वर्षों में किसी राष्ट्रपति ने नहीं किया।

इस्लामाबाद वार्ता पर क्या हुआ?
इस युद्ध को रोकने के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद में दूसरे दौर की सीधी वार्ता प्रस्तावित थी, लेकिन इसकी सफलता पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ट्रंप ने द न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और सलाहकार जेरेड कुश्नर के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के लिए रवाना हो चुका है, लेकिन उनके वहां पहुंचने को लेकर विरोधाभासी खबरें सामने आ रही हैं। दूसरी ओर, ईरान ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि वह अपना प्रतिनिधिमंडल भेजेगा या नहीं। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने दोटूक कहा है कि उनका देश धमकियों के साये में कोई बातचीत स्वीकार नहीं करेगा।

क्या संघर्षविराम के उल्लंघन ने बढ़ाया तनाव?
दोनों देशों के बीच पिछले कुछ घंटों में आरोपों का दौर तेज हो गया है। ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट कर दावा किया कि ईरान ने कई बार संघर्षविराम की शर्तों का उल्लंघन किया है। वहीं, ईरान ने अमेरिका पर 'सशस्त्र डकैती' का आरोप लगाया है। यह विवाद तब बढ़ा जब अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में ईरानी झंडे वाले एक मालवाहक जहाज पर गोलाबारी की। अमेरिका का कहना है कि वह जहाज नौसैनिक नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था, जबकि ईरान इसे संघर्षविराम का उल्लंघन बता रहा है। ईरान के मेजर जनरल अब्दुल्लाही ने तो ट्रंप को "भ्रमित" बताते हुए यहाँ तक कह दिया कि ईरानी सेना ने इस्राइल और अमेरिका को संघर्षविराम की भीख मांगने पर मजबूर कर दिया है।

क्या होर्मुज पर नियंत्रण की जंग छिड़ेगी?
ट्रंप जहां एक ओर युद्ध जीतने का दावा कर रहे हैं और अमेरिकी सेना की तारीफ कर रहे हैं, वहीं ईरान ने होर्मुज (Hormuz) जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ को लेकर चेतावनी दी है। ईरानी कमांडरों का कहना है कि वे ट्रंप को जमीनी हकीकत के बारे में झूठी कहानी नहीं बनाने देंगे। ईरान ने अमेरिका द्वारा बंदरगाहों की घेराबंदी को एक बड़ी चुनौती माना है। अब पूरी दुनिया की सांसें थमी हुई हैं क्योंकि कुछ ही घंटों में यह तय हो जाएगा कि इस्लामाबाद की कूटनीति कोई रास्ता निकालेगी या फिर खाड़ी क्षेत्र एक भीषण युद्ध की आग में झुलस जाएगा। ट्रंप का रुख साफ है कि या तो समझौता उनकी शर्तों पर होगा, या फिर हथियार अपनी भाषा बोलेंगे।

वर्जीनिया के मतदाताओं से ट्रंप ने क्या विशेष अपील की?
ईरान के मुद्दे के साथ ही ट्रंप ने अमेरिकी घरेलू राजनीति को लेकर वर्जीनिया के लोगों को एक कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि वर्जीनिया, अपने देश को बचाने के लिए 'ना' कहें। ट्रंप की यह अपील वर्जीनिया में होने वाले आगामी मतदान या किसी खास विधायी प्रस्ताव के विरोध में समर्थन जुटाने की कोशिश मानी जा रही है। उन्होंने देश की सुरक्षा और विदेशी चुनौतियों को घरेलू राजनीति से जोड़ते हुए मतदाताओं को सचेत किया है। 

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