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Hindi News ›   India News ›   Who was Girish Bharadwaj India's 'Bridge Man' breathes his last at 76 Karnataka CM expresses grief.

कौन थे गिरीश भारद्वाज?: भारत के 'सेतु पुरुष' में 76 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, कर्नाटक CM ने जताया शोक

Tue, 07 Jul 2026 01:29 PM IST
Asmita Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Asmita Tripathi Updated Tue, 07 Jul 2026 01:29 PM IST
सार

पद्मश्री से सम्मानित और 'भारत के सेतु पुरुष' के नाम से मशहूर गिरीश भारद्वाज का 76 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने देशभर में 150 से अधिक कम लागत वाले हैंगिंग फुटब्रिज बनाकर ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बढ़ाई। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने उनके निधन पर शोक जताया।

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Who was Girish Bharadwaj India's 'Bridge Man' breathes his last at 76 Karnataka CM expresses grief.
कौन थे गिरीश भारद्वाज - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित गिरीश भारद्वाज का मंगलवार को कर्नाटक के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 76 वर्ष के थे। उन्होंने 'भारत के सेतु पुरुष' के नाम से जाना जाता था। उनके निधन पर  मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने दुख व्यक्त किया गया है। 

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मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ऑफिस की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर शेयर किए गए पोस्ट में लिखा गया, 'पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित और 'सस्पेंशन ब्रिजों के प्रमुख' के तौर पर मशहूर डॉ. गिरीश भारद्वाज के निधन की दुखद खबर से गहरा दुख हुआ है। उनके जाने से राज्य ने तकनीकी क्षेत्र में एक असाधारण उपलब्धि हासिल करने वाले व्यक्ति को खो दिया है।'

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कौन थे गिरीश भारद्वाज?
गिरीश भारद्वाज ने कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के गांवों में 150 से अधिक पर्यावरण-अनुकूल, कम लागत वाले हैंगिंग फुटब्रिज डिजाइन और निर्मित किए। 1970 के दशक में मांड्या के पीईएस कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की। इसके बाद वे एक निजी कारखाने में काम करने का सपना देखते थे। हालांकि, उनके पिता, जो एक कृषक थे। उन्होंने उन्हें गांवों की समस्याओं का समाधान खोजने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया।

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इसके बाद उन्होंने रैशनल इंजीनियरिंग वर्क्स की स्थापना की, जो सामान्य फैब्रिकेशन कार्य और कृषि मशीनरी का निर्माण करती थी। इसके बाद में सुलिया में अयस्शिल्पा इंडस्ट्रीज की स्थापना की। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण कन्नड़ जिले के सुलिया तालुक के एक दूरस्थ गांव अरम्बुरु के निवासियों ने अपनी कठिनाइयों को दूर करने के लिए भारद्वाज से पैदल पुल बनाने का अनुरोध किया।

पुल निर्माण के लिए क्या किया?
शुरुआत में, उन्होंने ग्रामीणों के इस भोले विश्वास पर हंसा कि सभी इंजीनियर पुल बना सकते हैं। हालांकि, उनकी दुर्दशा को देखने के बाद, उन्होंने चुनौती स्वीकार करने का फैसला किया।अन्य क्षेत्रों के इंजीनियर मित्रों की मदद से और पुल निर्माण पर पुस्तकों का अध्ययन करके उन्होंने कम लागत वाले लटकते पुल का डिजाइन तैयार किया। यह एक सामूहिक निधि से वित्तपोषित परियोजना थी, जिसमें कुछ ग्रामीणों ने श्रमदान भी किया।

उपमुख्यमंत्री ने क्या कहा?
उनके निधन पर कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर लिखा कि 'ब्रिज मैन ऑफ इंडिया' के नाम से मशहूर पद्म श्री पुरस्कार विजेता डॉ. गिरीश भारद्वाज के निधन से मुझे गहरा सदमा लगा है। तकनीकी क्षेत्र के इस महान दूरदर्शी का जाना विज्ञान, तकनीक और समाज सेवा के क्षेत्रों के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती। आगे लिखा, ग्रामीण भारत के विकास और कनेक्टिविटी क्रांति में उनका योगदान बेमिसाल रहा है। देश भर में 140 से ज्यादा पुल बनाकर उन्होंने ग्रामीण प्रगति को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई।

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