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Amitabh Mulayam: अमिताभ का जन्मदिन छोड़ सैफई क्यों पहुंचे अभिषेक-जया? यहां समझें दोनों परिवारों के रिश्ते

Tue, 11 Oct 2022 06:44 PM IST
कुमार सम्भव जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार सम्भव जैन Updated Tue, 11 Oct 2022 06:44 PM IST
सार

अमिताभ बच्चन का जन्मदिन होने के बाद भी अभिषेक और जया बच्चन सैफई क्यों पहुंचे? कितनी मजबूत है यादव और बच्चन परिवार की दोस्ती? अगर आपके मन में भी यही सवाल हैं तो यह रिपोर्ट जरूर पढ़ें...

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Why Abhishek Bachchan and Jaya Bachchan reached Saifai for Mulayam Singh funeral know both family relations
जब हरिवंश राय बच्चन को यश भारती सम्मान देने मुंबई पहुंच गए थे मुलायम सिंह - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

देश की दो दिग्गज शख्सियत आज सुर्खियों में रहीं। पहले (मुलायम सिंह) का आज (11 अक्तूबर)  अंतिम संस्कार हुआ। वहीं, दूसरे (अमिताभ बच्चन) ने आज ही के दिन उम्र के 80वें पड़ाव को पार कर लिया। दोनों का जिक्र इसलिए कि वे बेहद करीबी दोस्त रहे। यहां तक कि उनके परिवार भी एक-दूसरे की खुशियों और गम में शरीक होते रहे। शायद यही वजह रही कि अमिताभ का जन्मदिन होने के बाद भी अभिषेक-जया बच्चन सैफई पहुंचे और मुलायम सिंह की अंतिम यात्रा में नजर आए। इस पर तमाम सवाल उठे, जिनके जवाब हम इस रिपोर्ट में दोनों परिवारों के रिश्ते से जुड़े हर उस पहलू से देंगे, जिसमें उन्होंने अपनी खुशियां ही नहीं, बल्कि गम भी एक कर लिए थे। 

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ऐसे शुरू हुई थी अमिताभ-मुलायम की दोस्ती

इस किस्से की शुरुआत होती है साल 1993 से। बॉलीवुड के रुपहले पर्दे पर धमाल मचाने के मकसद से अमिताभ ने करीब 60 करोड़ रुपये खर्च करके एक कंपनी खोली थी, जिसका नाम था एबीसीएल यानी अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड। पहले साल करीब 16 करोड़ का मुनाफा कमाने वाली यह कंपनी जल्द ही करीब 70 करोड़ के घाटे में आ गई और अमिताभ दिवालिया घोषित कर दिए गए। लेनदारों की लाइनें उनके बंगले जलसा के बाहर लगने लगीं। यही वह दौर था, जब अमिताभ-मुलायम एक-दूसरे के संपर्क में आए और दोस्ती के इस रिश्ते की बुनियादी अमर सिंह ने रखी। 

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'यश भारती' से मजबूत हुआ रिश्ता

साल 1994 आ चुका था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर मुलायम सिंह का दूसरा कार्यकाल चल रहा था। उस वक्त उन्होंने यश भारती सम्मान अवॉर्ड की शुरुआत की और अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंश राय बच्चन को इससे नवाजा। हरिवंश राय उस वक्त बेहद बीमार थे और लखनऊ आने की हालत में नहीं थे। ऐसे में मुलायम खुद मुंबई पहुंच गए और अमिताभ बच्चन के घर जाकर हरिवंश राय बच्चन को सम्मानित किया। मुलायम के इस कदम ने दोनों परिवारों के रिश्ते में मजबूती लाने की शुरुआत कर दी। इसके बाद दोनों परिवारों के सदस्य एक-दूसरे के पारिवारिक कार्यक्रमों में भी नजर आने लगे। 

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बिग बी को भी दिया बड़ा तोहफा

बात साल 1997 की है। मुलायम सिंह यादव इंद्र कुमार गुजराल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में रक्षा मंत्री थे। मुलायम ने अपने पैतृक गांव सैफई में एक राजकीय इंटर कॉलेज खुलवाया, जिसे अमिताभ बच्चन का नाम दिया गया। इस कॉलेज के उद्घाटन समारोह में अमिताभ बच्चन और जया बच्चन भी शरीक हुए थे। मुलायम के इस कदम ने बच्चन और यादव परिवार की दोस्ती की जड़ें और गहरी कर दीं।

जया बच्चन को बना दिया सांसद

साल 2004 आ चुका था। मुलायम-अमिताभ की दोस्ती लगातार मजबूत होती जा रही थी। इसी दौर में जया बच्चन ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता लेकर एक नए रिश्ते की शुरुआत कर दी। सपा के टिकट पर जया उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद चुनी गईं और मार्च 2006 तक इस पद पर रहीं। इसके बाद जून 2006 में जया का दूसरा कार्यकाल शुरू हुआ, लेकिन लाभ के पद के आरोप में जुलाई 2010 में उनकी राज्यसभा सदस्यता रद्द कर दी गई। 

लगातार परवान चढ़ती रही दोनों की दोस्ती

अब दौर 2007 का था। मुलायम सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और राज्य में विधानसभा चुनाव की लहर चल रही थी। मुलायम सिंह ने अमिताभ बच्चन को उत्तर प्रदेश का ब्रांड एंबेसडर बना दिया। कहा जाता है कि बिग बी देश की पहली ऐसी हस्ती थे, जिन्हें भारत के किसी राज्य का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया था। कहा जाता है कि मुलायम ने यह कदम अमर सिंह के कहने पर उठाया था। अमिताभ ने भी दोस्ती के लिए हर मुमकिन कोशिश की और समाजवादी पार्टी के लिए जमकर प्रचार किया। हालांकि, मुलायम सिंह को इसका फायदा नहीं मिला और वह चुनाव हार गए। 

अमर सिंह की वजह से रिश्तों में आई खटास

मुलायम 2007 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव हार चुके थे और इसका ठीकरा धीरे-धीरे उन अमर सिंह पर फोड़ा जाने लगा, जो कभी यादव परिवार की रीढ़ की हड्डी माने जाते थे। वह वोट के लिए कैश देने के मामले में फंस गए, जिसके बाद रिश्ते बच्चन परिवार से भी उनके रिश्ते बिगड़ने लगे। अमर सिंह ने आरोप लगाया था कि जब उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब अमिताभ ने उन्हें धोखा दिया। दरअसल, वह चाहते थे कि सपा से निकाले जाने के मामले में अमिताभ उनकी मदद करते। हालांकि, इस पूरे मामले से बच्चन और यादव परिवार में भी खटास आ गई। अमर सिंह ने अमिताभ पर कई आरोप लगाए, लेकिन बिग बी ने कोई जवाब नहीं दिया। अपने आखिरी दिनों में अमर सिंह ने अपने तमाम बयानों के लिए अमिताभ से माफी भी मांगी थी। 

धीरे-धीरे दूर हो गई कड़वाहट

अमर सिंह का एपिसोड खत्म होने के बाद यादव और बच्चन परिवार के बीच की दूरियां भी मिटने लगीं। इसका नतीजा यह रहा है कि 2012 में जया बच्चन तीसरी बार राज्यसभा सांसद बनीं। इसके अलावा 2018 में समाजवादी पार्टी ने जया बच्चन को चौथी बार राज्यसभा भेजा। अब अमिताभ का 80वां जन्मदिन होने के बावजूद मुलायम सिंह के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में जया बच्चन और अभिषेक बच्चन के नजर आने पर यह बात तो तय हो गई कि इन दोनों परिवारों के रिश्ते सिर्फ सियासी नहीं हैं। 

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