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Maharastra: महाराष्ट्र के बाद ऑपरेशन लोटस का अगला पड़ाव बिहार! नेताओं की भगदड़ के बीच चर्चा में क्यों है ईडी?

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 03 Jul 2023 03:04 PM IST
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सार
भाजपा सांसद एवं बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने तो साफतौर पर कह दिया कि शरद पवार की पार्टी 'एनसीपी' में जो विद्रोह हुआ है, उसके लिए गत दिनों पटना में हुई विपक्षी दलों की एकता बैठक जिम्मेदार है। विपक्ष, 2024 में राहुल गांधी को प्रोजेक्ट करने की जमीन तैयार कर रहा है। बिहार में भी महाराष्ट्र जैसी स्थिति बन सकती है...
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will Bihar is next focus of Operation Lotus after Maharashtra
Maharastra: Opposition Parties - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

महाराष्ट्र की सियासी उठा-पटक ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। विपक्षी दलों की 'एकता' को किसी की नजर लग गई है। ऐसी संभावना बताई जा रही है कि महाराष्ट्र के बाद 'ऑपरेशन लोटस' की अगली कड़ी में 'बिहार' का नंबर आ सकता है। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने तो इशारा कर दिया है कि 'महाराष्ट्र' का दोहराव, 'बिहार' में भी संभव है। यही वजह है कि सीएम नीतीश कुमार, जेडीयू विधायकों से अलग-अलग (वन-टू-वन) बात कर रहे हैं। एलजेपी सांसद चिराग पासवान ने भी कह दिया है, जेडीयू विधायक कई लोगों के संपर्क में हैं। विपक्षी नेताओं की इस भगदड़ के बीच 'ईडी' फिर से चर्चा में आ गई है। अधिकांश विपक्षी दलों के बयान, इस ओर संकेत कर रहे हैं कि जांच एजेंसी की मदद से चुनी हुई सरकारों को गिराया जा रहा है। गिरफ्तारी का भय दिखाकर नेताओं को भाजपा का समर्थन करने या उसमें शामिल होने का दबाव डाला जा रहा है।

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महाराष्ट्र के लिए विपक्षी दलों की एकता बैठक जिम्मेदार

महाराष्ट्र में एनसीपी नेता अजित पवार, रविवार को भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट की सरकार में डिप्टी सीएम बन गए हैं। अजित ने दावा किया है कि एनसीपी के अधिकांश विधायक हमारे साथ हैं। सोमवार को पार्टी प्रमुख शरद पवार ने कहा, वे दोबारा से पार्टी खड़ी करेंगे। महाराष्ट्र का घटनाक्रम अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि बिहार से कुछ वैसी ही आवाज उठने लगी। भाजपा सांसद एवं बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने तो साफतौर पर कह दिया कि शरद पवार की पार्टी 'एनसीपी' में जो विद्रोह हुआ है, उसके लिए गत दिनों पटना में हुई विपक्षी दलों की एकता बैठक जिम्मेदार है। विपक्ष, 2024 में राहुल गांधी को प्रोजेक्ट करने की जमीन तैयार कर रहा है। बिहार में भी महाराष्ट्र जैसी स्थिति बन सकती है। मोदी ने कहा, बिहार में जदयू के विधायक और सांसद, राहुल गांधी को स्वीकार नहीं करेंगे। उनके लिए तेजस्वी यादव भी मायने नहीं रखते। जदयू में इस वक्त भगदड़ का माहौल बन गया है। सुशील मोदी की बात को एलजेपी सांसद चिराग पासवान ने आगे बढ़ा दिया। उन्होंने कहा, जेडीयू में टूट की संभावना है। इस मामले में जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, केंद्र की भाजपा सरकार, जांच एजेंसियों के सहारे विपक्ष पर वार कर रही है। ये सब भाजपा की बौखलाहट है। विपक्षी गोलबंदी का असर है।

'फादर फिगर' की भूमिका का सही निर्वहन नहीं

'ऑपरेशन लोटस' को लेकर विपक्षी दलों का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों से केंद्रीय जांच एजेंसियों के निशाने पर आए गैर-भाजपाई नेताओं का आंकड़ा तेजी से बढ़ता जा रहा है। जांच एजेंसियों के फेर में केवल राज्यों के कुछ नेता ही नहीं, बल्कि सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लालू प्रसाद यादव, मायावती, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और तेलंगाना के सीएम केसीआर की बेटी एवं भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की नेता के.कविता से लेकर अनेक विपक्षी नेता आ चुके हैं। मौजूदा समय में दर्जनों विपक्षी नेता, जांच एजेंसियों के जाल के बहुत करीब हैं। इनमें से कौन फंसेगा और कौन बचेगा, कुछ नहीं कहा जा सकता। महाराष्ट्र में डिप्टी सीएम की शपथ लेने वाले अजित पवार और उनके परिवार के सदस्य भी जांच एजेंसियों की रडार पर रहे हैं। हालांकि उन्हें कई मामलों में क्लीन चिट भी मिल गई। आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पिछले दिनों कहा था, प्रधानमंत्री किसी भी देश के 'फादर फिगर' की तरह होते हैं। चुनाव के बाद अगर कहीं पर किसी की सरकार बन जाती है तो उसे केंद्र सरकार की ओर से सपोर्ट देने और मिलकर काम करने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की होती है। आज 'फादर फिगर' की भूमिका का सही निर्वहन नहीं हो रहा।  

कई विपक्षी दलों ने पीएम मोदी को लिखा था पत्र

केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाने वाली कई विपक्षी पार्टियों ने कुछ समय पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी थी। इनमें टीएमसी, आप, आरजेडी, नेशनल कांफ्रेंस, केसीआर की पार्टी, सपा और उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) आदि दल शामिल थे। इन सभी दलों के नेता जांच एजेंसियों के निशाने पर रहे हैं। अरविंद केजरीवाल ने कहा, हमारे देश के प्रधानमंत्री ने ठान लिया है कि अगर भाजपा को वोट नहीं दोगे और किसी दूसरी पार्टी को वोट दोगे तो उस सरकार को किसी भी हाल में काम नहीं करने दिया जाएगा। किसी राज्य में दूसरी पार्टी की सरकार बनती है, तो उसके नेताओं के पीछे ईडी और सीबीआई छोड़ दी जाती है। विपक्ष के नेताओं को गिरफ्तार कर उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित करते हैं। किसी राज्य में विपक्षी पार्टी को ही तोड़ देते हैं, तो कहीं सरकार गिरा देते हैं। गोवा और कर्नाटक में ऐसा देखने को मिला है। भाजपा के अलावा किसी अन्य दल की सरकार को काम नहीं करने देने का चलन बहुत ज्यादा खतरनाक है। आप के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन, ईडी केस में जेल जा चुके हैं। पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस के नेता भी निशाने पर हैं। टीएमसी नेताओं से भी पूछताछ हो रही है। एनसीपी और आरजेडी के नेता भी जांच एजेंसियों के फेर में रहे हैं।

इन विपक्षी नेताओं पर है जांच एजेंसियों का जाल

कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के नेता, जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं। कांग्रेस नेता एवं मौजूदा पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से ईडी पूछताछ कर चुकी है। आगे भी पूछताछ संभव है। खरगे ने कहा था, केंद्र सरकार जांच एजेंसियों की मदद से विपक्ष को एकत्रित नहीं होने दे रही। केंद्र सरकार के खिलाफ जो बोलता है, वह टारगेट पर आ जाता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल भी ईडी का सामना कर चुके हैं। पश्चिम बंगाल सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे पार्थ चटर्जी को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया था। शिवसेना के संजय राउत ईडी जांच का सामना कर रहे हैं। वे भी जेल में रह कर आए हैं। टीएमसी सांसद अभिषेक से भी पूछताछ जारी है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से ईडी ने पूछताछ की है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी जांच का सामना कर रहे हैं। शरद पवार के भतीजे अजित पवार पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया गया था। पूर्व मंत्री नवाब मलिक, ईडी मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं। यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव का नाम भी माइनिंग घोटाले में आया था। यह मामला सीबीआई के पास है। पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी से अवैध रेत खनन मामले में ईडी पूछताछ कर चुकी है।

लालू से लेकर चौटाला तक रहे हैं जेल में

चारा घोटाले में सजा होने के बाद लालू प्रसाद यादव पर रेलवे में जमीन लेकर नौकरी देने का मामले की जांच चल रही है। इसमें सीबीआई और ईडी, दोनों जांच एजेंसियां शामिल हैं। छत्तीसगढ़ में पीसीसी कोषाध्यक्ष राम गोपाल अग्रवाल, भिलाई के विधायक देवेंद्र यादव, गिरीश देवांगन, आरपी सिंह, विनोद तिवारी और सन्नी अग्रवाल के निवास एवं कार्यालयों पर ईडी की रेड हो चुकी है। हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के यहां भी जांच एजेंसियों ने दस्तक दी है। पूर्व सीएम ओपी चौटाला भी सलाखों के पीछे रहे हैं। आरजेडी के एमएलसी सुनील सिंह, सांसद अशफाक करीम, फैयाज अहमद और पूर्व एमएलसी सुबोध राय भी जांच एजेंसियों की रडार पर हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भी ईडी की सुई घूम रही हैं। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल के करीबियों पर ईडी छापा मार चुकी है। ममता बनर्जी के खिलाफ चिट फंड मामला है, तो कर्नाटक में डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार भी ईडी के निशाने पर हैं। राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के भाई भी केंद्रीय जांच एजेंसी के रडार पर रहे हैं। ऐसे में कब और किस नेता को जाँच एजेंसी अपनी गिरफ़्त में ले ले, कुछ कहा नहीं जा सकता।

जांच एजेंसी से बचने के लिए भाजपा ज्वाइन की

कांग्रेस नेता अजय माकन के मुताबिक, विपक्ष के जो नेता मुंह बंद कर लेते हैं या भाजपा ज्वाइन कर लेते हैं, वे केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई से बच जाते हैं। उन्होंने इस सूची में असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा, नारायण राणे, रमन सिंह, मुकुल रॉय और सुवेंदु अधिकारी, आदि नेताओं का नाम गिनाया है। बतौर माकन, इन नेताओं के पीछे जांच एजेंसी पड़ी रहती थी। आज उनसे जांच एजेंसी पूछताछ क्यों नहीं कर रही। एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट बताती है कि गत आठ वर्ष में लगभग 225 चुनावी उम्मीदवारों ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी थी। 45 फीसदी नेताओं ने भाजपा ज्वाइन की है। इनमें हार्दिक पटेल, कपिल सिब्बल, अश्विनी कुमार, आरपीएन सिंह, गुलाम नबी आजाद, जयवीर शेरगिल, ज्योतिरादित्या सिंधिया, सुनील जाखड़, जितिन प्रसाद, सुष्मिता देव, कीर्ति आजाद, अदिति सिंह, कैप्टन अमरिंदर सिंह, उर्मिला मातोंडकर, हिमंत बिस्व सरमा, हरक सिंह रावत, जयंती नटराजन, एन बिरेन सिंह और अजित जोगी आदि शामिल हैं। मोदी सरकार में ईडी ने जिन राजनेताओं के यहां पर रेड की है या उनसे पूछताछ की है, उनमें 95 फीसदी विपक्ष के नेता हैं। इसमें सबसे ज्यादा रेड तो कांग्रेस पार्टी के नेताओं के घरों और दफ्तरों पर की गई हैं। पार्टी ने आशंका जताई है कि 2024 से पहले विपक्ष के अनेक नेता, केंद्रीय जांच एजेंसियों के जाल में फंस सकते हैं।

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