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'हम आपको जनता के सामने बेनकाब कर देंगे': महाराष्ट्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार, जानें पूरा मामला

Sat, 11 Jul 2026 03:30 PM IST
Pavan पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Sat, 11 Jul 2026 03:30 PM IST
सार

Supreme Court Slams Maharashtra Govt: सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को जमानत याचिकाओं का विरोध करने लेकिन ट्रायल में देरी करने पर फटकार लगाई। अदालत ने इस दौरान चेतावनी दी कि अगर स्थिति नहीं सुधरी तो राज्य को सार्वजनिक रूप से बेनकाब किया जाएगा। पढ़ें, सुप्रीम कोर्ट ने और क्या कुछ कहा...

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Will expose you in public: SC slams Maharashtra for opposing bail plea of foreign national
महाराष्ट्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने एक आपराधिक मामले में विदेशी नागरिक की जमानत याचिका का विरोध करने पर महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार का यही ढर्रा रहा, तो वे उसे जनता के सामने बेनकाब कर देंगे। बता दें कि, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की पीठ एक विदेशी नागरिक की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के काम करने के तरीके पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा, 'हमें हर दिन महाराष्ट्र से ऐसे मामले मिलते हैं। आप लोग जमानत का तो पूरी ताकत से विरोध करते हैं, लेकिन मुकदमों को तेजी से पूरा करने के लिए कोई कदम नहीं उठाते। जब हम मामले की जांच करते हैं, तो पता चलता है कि सबूत बहुत कमजोर हैं। हम आपको जनता के सामने बेनकाब कर देंगे'।
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क्या है पूरा मामला?
चार साल से जेल में बंद: अपहरण और हत्या के मामले में गिरफ्तार किए गए इस विदेशी नागरिक ने कोर्ट को बताया कि वह पिछले चार साल से जेल में है।

86 बार तारीख, 53 बार पेशी नहीं: आरोपी के वकील ने बताया कि निचली अदालत में उसके मामले की 86 बार सुनवाई की तारीख पड़ी, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने उसे 53 बार कोर्ट में पेश ही नहीं किया।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को बेहद गंभीर माना और कहा कि आरोपी को समय पर कोर्ट में पेश न करना महाराष्ट्र सरकार और प्रशासन की एक बहुत बड़ी लापरवाही है।

'हमें शर्मिंदगी महसूस हो रही है'
संविधान द्वारा नागरिकों को दिए गए 'जल्दी इंसाफ पाने के अधिकार' का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'हमें शर्मिंदगी महसूस हो रही है। चार वर्षों में 34 गवाहों में से केवल दो गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। यह बात पिछले कुछ समय से कोर्ट को परेशान कर रही है'। इस दौरान पीठ ने साफ किया कि अगर राज्य सरकार किसी की जमानत का पुरजोर विरोध करती है, तो उसकी यह भी जिम्मेदारी बनती है कि वह मुकदमे की सुनवाई को बिना किसी रुकावट के तेजी से चलाए, लेकिन महाराष्ट्र सरकार इसमें पूरी तरह नाकाम रही है।

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कोर्ट का सख्त आदेश
मामले की सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार के वकील ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि अब राज्य सरकार सभी आरोपियों को हर सुनवाई पर कोर्ट में पेश कर रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों को मुकदमों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए एक स्पष्ट नीति बनानी होगी। वहीं कोर्ट ने आदेश दिया कि इस मामले में हर हफ्ते कम से कम चार गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं और इस आदेश का रिकॉर्ड निचली अदालत के सामने रखा जाए। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर भविष्य में भी ऐसा कोई मामला सामने आया, तो राज्य सरकार के खिलाफ इससे भी ज्यादा सख्त आदेश पारित किए जाएंगे।
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