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नौकरी जाएगी, सरकारी योजनाएं भी बंद: बहुविवाह करने वाले अधिकारियों की खैर नहीं, क्या है असम सरकार की तैयारी?
Sat, 11 Jul 2026 04:07 PM IST
राकेश कुमार
एएनआई, गुवाहाटी।
एएनआई, गुवाहाटी।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 11 Jul 2026 04:07 PM IST
सार
असम सरकार ने बहुविवाह के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए सरकारी कर्मचारियों की बर्खास्तगी, सरकारी योजनाओं से वंचित करने और कानून तोड़ने वालों के लिए कड़े दंड का प्रस्ताव किया है। यूसीसी लागू होने के बाद राज्य विवाह संबंधी नियमों को और सख्त बना रहा है।
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हिमंत बिस्वा सरमा, सीएम असम
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
असम सरकार ने बहुविवाह के खिलाफ अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है। सरकार अब बहुविवाह करने वाले सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त करने की तैयारी में है। इसके लिए असम सेवा (अनुशासन और अपील) नियम, 1964 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। वित्त मंत्री जयंत मल्लबरुआ ने बजट भाषण में इसकी घोषणा की। सरकार का कहना है कि यह फैसला महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और जवाबदेह पारिवारिक व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया जा रहा है।
किसे नहीं मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ?
हिमंत बिस्वा सरमा सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, बहुविवाह करने वाले पुरुषों को राज्य की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। इसके साथ ही आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए गए लोगों को भी कई सरकारी योजनाओं से बाहर रखा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे योजनाओं में पारदर्शिता आएगी और कानून के पालन को बढ़ावा मिलेगा।
यूसीसी कानून के बाद सख्त हो रहे नियम?
असम विधानसभा ने मई 2026 में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित किया था। इस कानून का उद्देश्य बहुविवाह और बाल विवाह जैसी प्रथाओं पर रोक लगाना तथा विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के लिए सभी नागरिकों पर समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। राज्य मंत्रिमंडल ने 13 मई को इस विधेयक को मंजूरी दी थी।
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यह भी पढ़ें: West bengal: बारुईपुर लिचिंग मामले में तीन गिरफ्तार, दुष्कर्म के आरोप में शख्स की पीट-पीटकर कर दी गई थी हत्या
असम सरकार के फैसले की पांच बड़ी बातें
बाल विवाह और धोखाधड़ी वाली शादी पर भी सख्ती
नए कानून में बाल विवाह और बिना स्वतंत्र सहमति के हुई शादी पर दो साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है। वहीं, जबरन, धोखे से या पहचान छिपाकर की गई शादी के मामलों में सात साल तक की जेल और जुर्माना लगाया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि इन प्रावधानों का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना तथा अवैध प्रथाओं पर रोक लगाना है।
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किसे नहीं मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ?
हिमंत बिस्वा सरमा सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, बहुविवाह करने वाले पुरुषों को राज्य की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। इसके साथ ही आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए गए लोगों को भी कई सरकारी योजनाओं से बाहर रखा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे योजनाओं में पारदर्शिता आएगी और कानून के पालन को बढ़ावा मिलेगा।
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यूसीसी कानून के बाद सख्त हो रहे नियम?
असम विधानसभा ने मई 2026 में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित किया था। इस कानून का उद्देश्य बहुविवाह और बाल विवाह जैसी प्रथाओं पर रोक लगाना तथा विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के लिए सभी नागरिकों पर समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। राज्य मंत्रिमंडल ने 13 मई को इस विधेयक को मंजूरी दी थी।
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असम सरकार के फैसले की पांच बड़ी बातें
- बहुविवाह करने वाले सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया जाएगा।
- बहुविवाह करने वाले पुरुषों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा।
- आपराधिक मामलों में दोषी पाए गए लोगों को भी कई सरकारी योजनाओं से बाहर किया जाएगा।
- भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के तहत बहुविवाह या द्विविवाह पर सात साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
- विवाह का 60 दिनों के भीतर और लिव-इन रिलेशनशिप का 30 दिनों के भीतर पंजीकरण अनिवार्य होगा।
बाल विवाह और धोखाधड़ी वाली शादी पर भी सख्ती
नए कानून में बाल विवाह और बिना स्वतंत्र सहमति के हुई शादी पर दो साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है। वहीं, जबरन, धोखे से या पहचान छिपाकर की गई शादी के मामलों में सात साल तक की जेल और जुर्माना लगाया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि इन प्रावधानों का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना तथा अवैध प्रथाओं पर रोक लगाना है।