Gorkha recruitment: क्या फिर शुरू होगी गोरखा भर्ती, सेना प्रमुख ने पूर्व गोरखा सैनिकों को क्या भरोसा दिया?
भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने नेपाल में रह रहे पूर्व गोरखा सैनिकों को भरोसा दिया है कि भारत उनका साथ कभी नहीं छोड़ेगा। पोखरा में पूर्व सैनिकों ने नेपाली युवाओं की भारतीय सेना में भर्ती फिर शुरू करने की मांग भी उठाई। यह भर्ती 2022 से रुकी हुई है। ऐसे में सवाल है कि क्या नेपाल के युवाओं के लिए भारतीय सेना में भर्ती का रास्ता फिर खुलेगा और इस मांग पर आगे क्या कदम उठाया जाएगा।
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नेपाल में भारतीय सेना के पूर्व गोरखा सैनिकों को भारत ने साथ बनाए रखने का भरोसा दिया है। भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने पोखरा में पेंशन शिविर के दौरान पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना में सेवा कर चुके गोरखा सैनिक भारत और नेपाल के रिश्तों की मजबूत और जीवंत कड़ी हैं। उन्होंने साफ कहा कि भारत उनका साथ कभी नहीं छोड़ेगा। साथ ही नेपाल में रह रहे पूर्व भारतीय गोरखा सैनिकों के कल्याण, स्वास्थ्य सेवाओं और दूसरी सुविधाओं के विस्तार की प्रतिबद्धता भी जताई।
क्या नेपाली युवाओं की भारतीय सेना में भर्ती फिर शुरू करने की मांग उठी?
जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा के दौरान पोखरा में पूर्व गोरखा सैनिकों ने नेपाली युवाओं की भारतीय सेना में भर्ती का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। भारतीय पूर्व सैनिक कल्याण संघ नेपाल के सह-अध्यक्ष कैप्टन गज बहादुर थापा ने कहा कि नेपाली युवाओं की भारतीय सेना में भर्ती लंबे समय से बंद है। उन्होंने इसे फिर शुरू कराने के लिए प्रयास करने की मांग की। उन्होंने सेना प्रमुख से इस मुद्दे को नेपाल सरकार के सामने उठाने का अनुरोध भी किया।
2022 से क्यों रुकी हुई है नेपाली युवाओं की भर्ती?
भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की भर्ती 2022 से रुकी हुई है। दी गई जानकारी के अनुसार, भारत में अग्निपथ योजना लागू होने के बाद यह भर्ती रोक दी गई थी। इसके बाद से नेपाली युवाओं की भारतीय सेना में भर्ती फिर शुरू नहीं हुई है। पूर्व गोरखा सैनिक अब इस मुद्दे को दोबारा उठा रहे हैं और चाहते हैं कि नेपाली युवाओं को भारतीय सेना में सेवा का अवसर फिर मिले।
पूर्व गोरखा सैनिकों के लिए सेना प्रमुख ने क्या कहा?
पोखरा के पेंशन शिविर में सेना प्रमुख ने पूर्व गोरखा सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर भरोसा दिया। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य सुविधाओं के विस्तार की प्रतिबद्धता जताई। उनके बयान से यह स्पष्ट है कि भारतीय सेना पूर्व गोरखा सैनिकों के साथ अपने संबंध को महत्वपूर्ण मानती है। वहीं, भर्ती दोबारा शुरू करने की मांग अब नेपाल में रह रहे पूर्व सैनिकों की ओर से प्रमुखता से सामने आई है।