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Explainer: कौन हैं तुकाराम मुंढे? 21 साल में 25 तबादले, अब उनके एक्शन से शाहरुख-अजय और टाइगर पर आई आफत

Thu, 20 Aug 2026 06:16 AM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Thu, 20 Aug 2026 06:16 AM IST
सार

महाराष्ट्र एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे अपनी सख्त प्रशासनिक कार्यशैली के लिए चर्चा में रहते हैं। 21 साल में 25 तबादलों के बावजूद उनके तेवर नहीं बदले। अब खाद्य और दवा सुरक्षा पर कार्रवाई के दौरान शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस दिए जाने से वह फिर सुर्खियों में हैं। आइए उनके बारे में विस्तार से जानते हैं।

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Who is Tukaram Mundhe? 25 Transfers in 21 Yrs, Now His Crackdown Has Put Shah Rukh, Ajay and Tiger in Trouble
तुकाराम मुंढे का सख्त एक्शन - फोटो : Ai

विस्तार

महाराष्ट्र में खाद्य और दवा सुरक्षा को लेकर चल रही सख्त कार्रवाई के बीच एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे चर्चा में हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनके इस अभियान का समर्थन किया है। मिलावट, एक्सपायर्ड सामान और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई के साथ उनका दो दशक से ज्यादा लंबा प्रशासनिक करियर भी काफी चर्चित रहा है। 

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ऐसे में आइए जानते हैं कि कौन हैं तुकाराम मुंढे? क्यों उनकी कार्यशैली को लेकर इतनी चर्चा होती है? महाराष्ट्र में उनके नेतृत्व में अब तक क्या-क्या कार्रवाई हो चुकी है? कौन-कौन इस जांच के घेरे में आ चुका है? क्या इसे लेकर विवाद भी हुआ है? 

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तुकाराम मुंढे का परिचय

तुकाराम हरिभाऊ मुंढे महाराष्ट्र कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। मई 2026 में उन्हें महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी एफडीए के आयुक्त की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस पद पर उनकी जिम्मेदारी राज्य में खाद्य पदार्थों और दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना है। 

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Who is Tukaram Mundhe? 25 Transfers in 21 Yrs, Now His Crackdown Has Put Shah Rukh, Ajay and Tiger in Trouble
तुकाराम मुंढे - फोटो : Amar Ujala

किसान परिवार में बीता बचपन

मुंढे का जन्म 3 जून 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले में एक गरीब कृषक परिवार में हुआ। मराठवाड़ा के इस इलाके में पानी की कमी और कृषि संकट जैसी समस्याएं लंबे समय से रही हैं। मुंढे ने अपने बचपन में इन परेशानियों को करीब से देखा। परिवार खेती पर निर्भर था। वे खुद खेत में काम करते थे और अपने माता-पिता के साथ साप्ताहिक बाजार में सब्जियां भी बेचते थे।

एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने बताया था कि कई बार उन्हें रात करीब दो बजे उठकर खेतों में पानी देना पड़ता था। उनका परिवार मिट्टी के घर में रहता था और खेती काफी हद तक मानसून पर निर्भर थी। वे स्थानीय जिला परिषद स्कूल में पढ़ने के लिए नंगे पैर जाते थे। इन्हीं अनुभवों ने उनके भीतर प्रशासनिक व्यवस्था को समझने और उसमें बदलाव लाने की इच्छा पैदा की।

पढ़ाई से यूपीएससी तक का सफर

मुंढे ने 1996 में सरकारी कला एवं विज्ञान महाविद्यालय, औरंगाबाद से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद 1998 में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया। इसके बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी की और 2005 में यूपीएससी परीक्षा पास की। उन्होंने देशभर में 20वीं रैंक हासिल की और उन्हें महाराष्ट्र कैडर मिला। उनकी खास बात यह रही कि उन्होंने बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान, प्रशासनिक पारिवारिक पृष्ठभूमि या किसी नेटवर्क के यह सफलता हासिल की।

Who is Tukaram Mundhe? 25 Transfers in 21 Yrs, Now His Crackdown Has Put Shah Rukh, Ajay and Tiger in Trouble
तुकाराम मुंढे - फोटो : Amar Ujala

शुरुआती दौर में रेत माफिया के खिलाफ कार्रवाई

अपने शुरुआती प्रशासनिक कार्यकाल में मुंढे ने अवैध रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई की। इस दौरान उन्हें धमकियां मिलने की बात भी सामने आई। सोलापुर में कथित तौर पर रेत माफिया ने उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। मुंढे के मुताबिक, इसके बावजूद वे अगले दिन काम पर लौटे और कार्रवाई जारी रखी।

पुणे में 158 संविदा चालकों पर कार्रवाई

2017-18 में पुणे महानगर परिवहन महामंडल में काम करते हुए मुंढे ने लंबे समय से ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले 158 संविदा चालकों को बर्खास्त कर दिया। इस फैसले के बाद कर्मचारी संगठनों की ओर से विरोध हुआ और राजनीतिक स्तर पर भी प्रतिक्रिया देखने को मिली। यह मामला उनकी सख्त प्रशासनिक शैली के उदाहरणों में गिना जाता है।

स्वास्थ्य विभाग में भी दिखाई सख्ती

2022 में स्वास्थ्य आयुक्त के तौर पर काम करते हुए उन्होंने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी पर जोर दिया। उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रात के समय निरीक्षण शुरू किए। कर्मचारियों की उपस्थिति को बायोमेट्रिक व्यवस्था से जोड़ने की पहल की गई। सरकारी ड्यूटी के समय निजी क्लीनिक चलाने के आरोपों को लेकर डॉक्टरों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की गई। इसके बाद 2023 में उनका तबादला कर दिया गया।

Who is Tukaram Mundhe? 25 Transfers in 21 Yrs, Now His Crackdown Has Put Shah Rukh, Ajay and Tiger in Trouble
तुकाराम मुंढे - फोटो : Amar Ujala

नवी मुंबई में बड़े फैसलों से चर्चा

2016 में मुंढे नवी मुंबई महानगरपालिका के आयुक्त थे। इस दौरान उनके कई फैसले चर्चा में आए। उनके कार्यकाल में करीब 20 करोड़ रुपये की संगमरमर की प्रतिमा और 163 करोड़ रुपये की मोरबे बांध सौर परियोजना से जुड़े फैसलों को रद्द किया गया। मुंढे ने इन परियोजनाओं को जरूरी नहीं माना और धन को नागरिक सुविधाओं और दिव्यांगों के लिए शहर को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में इस्तेमाल करने पर जोर दिया।

मुंढे की कौन सी पहल हुई लोकप्रिय?

नवी मुंबई में मुंढे ने 'आयुक्त के साथ सैर' नाम की पहल शुरू की। इसके तहत वे हर रविवार सुबह नागरिकों के साथ सैर पर निकलते थे। इस दौरान लोग उनसे सीधे अपनी शिकायतें, समस्याएं और सुझाव साझा कर सकते थे। इस पहल को नागरिकों का समर्थन मिला। हालांकि, उनके कई फैसलों को लेकर निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ मतभेद भी सामने आए। कुछ पार्षदों ने उनके खिलाफ बंद का आह्वान किया। दूसरी ओर, नागरिकों ने उनके समर्थन में ऑनलाइन याचिका शुरू की, जिसमें 6,000 से ज्यादा हस्ताक्षर होने का उल्लेख है। इसके बाद 2017 में उनका तबादला कर दिया गया।

बार-बार तबादलों को लेकर भी चर्चा में रहे

तुकाराम मुंढे के प्रशासनिक करियर में तबादले भी लगातार चर्चा का विषय रहे हैं। 21 साल की सेवा में उनका 25 बार तबादला हो चुका है। अबतक उन्होंने किसी भी पद पर सामान्य तीन साल का पूरा कार्यकाल नहीं किया है। कुछ मौकों पर उन्हें बिना पद के भी रखा गया।

किन कामों के लिए मिले सम्मान?

मुंढे को अलग-अलग प्रशासनिक जिम्मेदारियों के दौरान कई पुरस्कार और सम्मान मिला।

  • 2015-16 में उन्हें महाराष्ट्र सरकार का सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी पुरस्कार मिला। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से भी उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया।
  • जल संरक्षण के काम के लिए उन्हें 'महाराष्ट्र के जलपुरुष' के नाम से भी जाना गया।
  • नवी मुंबई में उनके कार्यकाल के दौरान ई-शौचालय और भूकंपरोधी सुधार जैसी पहलों को एसकेओसीएच ऑर्डर ऑफ मेरिट मिला। 2017 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ एकीकृत यातायात प्रबंधन प्रणाली के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।

Who is Tukaram Mundhe? 25 Transfers in 21 Yrs, Now His Crackdown Has Put Shah Rukh, Ajay and Tiger in Trouble
तुकाराम मुंढे - फोटो : Amar Ujala

ताजा मामले में अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई?

  • 13 अगस्त को महाराष्ट्र एफडीए ने ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म के जरिए खाद्य पदार्थ बेचने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाया।
  • राज्यभर में 86 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान एक प्रतिष्ठान को तुरंत कारोबार बंद करने का निर्देश दिया गया और 60 सुधार नोटिस जारी किए गए।
  • 14 खाद्य कारोबार लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित किए गए। दूध और डेयरी उत्पादों की जांच में 698 किलो सामान जब्त किया गया, जिसकी कीमत करीब 34,302 रुपये बताई गई।

गुटखा और पान मसाला के खिलाफ भी कार्रवाई

  • प्रतिबंधित पान मसाला और गुटखा की बिक्री, वितरण और परिवहन से जुड़े मामलों में एफडीए ने 10 प्राथमिकी दर्ज कीं।
  • इन मामलों में नौ लोगों की गिरफ्तारी हुई और करीब 46.76 लाख रुपये का सामान जब्त किया गया।
  • इसके अलावा दूध और डेयरी उत्पाद, बेकरी सामान और खाद्य तेल समेत करीब 1,270 किलो अन्य खाद्य सामग्री भी जब्त की गई।

आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं पर कार्रवाई

  • एफडीए ने राज्य में लाइसेंस प्राप्त 434 आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं का निरीक्षण किया।
  • जांच के बाद 135 निर्माताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। वहीं, 10 निर्माताओं के लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किए गए।
  • यह कार्रवाई दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता से जुड़े कथित गंभीर उल्लंघनों को लेकर की गई।

तीन अभिनेताओं को जारी किया गया नोटिस
एफडीए ने अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल इलायची के विज्ञापन में ब्रांड प्रचारक के तौर पर शामिल होने को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किए। यह मामला तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों के प्रचार तथा परोक्ष विज्ञापन से जुड़े नियमों के संदर्भ में है। बड़े फिल्मी सितारों के नाम सामने आने के कारण यह कार्रवाई काफी चर्चा में रही।

पार्ले एग्रो के खिलाफ कार्रवाई क्यों हुई?
एफडीए ने चेंबूर स्थित पार्ले एग्रो के गोदाम में फ्रूटी और ऐपि फिज का एक्सपायर्ड स्टॉक मिलने के बाद संबंधित लाइसेंस निलंबित किया। इसके अलावा ऑनलाइन खाद्य वितरण से जुड़े कई प्रतिष्ठानों पर भी कार्रवाई की गई। इनमें ब्लिंकिट, जेप्टो और इंस्टामार्ट से जुड़े कुछ खाद्य कारोबार प्रतिष्ठान शामिल हैं। इन प्रतिष्ठानों पर खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए कार्रवाई की गई।

हाईकोर्ट की टिप्पणी से क्यों बढ़ी बहस?

एफडीए की कार्रवाई को कई लोगों ने खाद्य सुरक्षा के लिए जरूरी बताया, लेकिन कुछ मामलों में कार्रवाई के तरीके पर सवाल भी उठे। बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक मामले में एफडीए की कार्रवाई को लेकर ‘मच्छर मारने के लिए तलवार’ जैसी टिप्पणी की। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे ने एफडीए की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभाग के पास सख्त कार्रवाई करने की शक्ति है, लेकिन उसका इस्तेमाल हर मामले में जरूरत से ज्यादा नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि एफडीए कई बार पहले कार्रवाई करता दिखाई देता है और बाद में जांच करता है। अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि अगर ऐसी कठोर कार्रवाई जारी रही तो विभाग पर जुर्माना लगाया जा सकता है।

मुंढे क्या चाहते हैं?

पीटीआई को दिए साक्षत्कार में मुंढे ने कहा कि उनका जोर सिर्फ छापेमारी और दंडात्मक कार्रवाई पर नहीं है। उनका कहना है कि खाद्य और दवा सुरक्षा एक सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए नागरिकों को गड़बड़ी की सूचना देनी होगी, खाद्य कारोबारियों को नियमों का पालन करना होगा और दवा लाइसेंस धारकों को निर्धारित मानकों के अनुसार काम करना होगा। उनका लक्ष्य ऐसी व्यवस्था बनाना है जहां 100 प्रतिशत स्वैच्छिक नियम पालन हो और नियामक को बार-बार कार्रवाई करने की जरूरत न पड़े। मुंढे ने नागरिकों से अपील की है कि अगर उन्हें किसी खाद्य पदार्थ या दवा में गड़बड़ी दिखाई देती है तो उसकी शिकायत करें। उनके मुताबिक, अगर नागरिक, कारोबारी और नियामक मिलकर काम करें तो खाद्य और दवा सुरक्षा को एक बड़े जन आंदोलन का रूप दिया जा सकता है।

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