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Yasin Malik: सजा मिलने के बाद भी यासीन मलिक के पास कई रास्ते, जानें कितना लंबा होगा सजा पर अमल का रास्ता?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Wed, 25 May 2022 07:39 PM IST
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सार
Yasin Malik Life Imprisonment: दिल्ली की एक विशेष अदालत ने आतंकी फंडिंग के मामले में दोषी करार जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा सुना दी है। हालांकि, NIA ने फांसी की सजा की मांग की थी। ऐसे में अब ये देखना होगा कि दोनों आगे क्या कदम उठाते हैं?
यासीन मलिक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली की एक विशेष अदालत ने आतंकी फंडिंग के मामले में दोषी करार जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा सुना दी है। विशेष न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने यासीन को 19 मई को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत सभी आरोपों का दोषी ठहराया था। यासीन मलिक के पास ऊपरी अदालत में सजा कम कराने के लिए जाने के विकल्प मौजूद हैं।
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दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने यासीन मलिक को दो मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने 10 लाख रुपये का जुर्मान भी लगाया है।
यासीन के पास क्या विकल्प
टेरर फंडिंग के आरोपों का सामना कर रहे जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के अलगाववादी नेता यासीन मलिक ने सुनवाई के दौरान अपने ऊपर लगे आरोपों को कबूल किया था। यासीन ने कहा था, 'सजा पर मैं कुछ नहीं बोलूंगा। जब भी मुझे कहा गया मैंने आत्मसमर्पण किया। अब आपको (कोर्ट) जो भी सजा देनी है, दे दीजिए... मैं कुछ नहीं बोलूंगा। लेकिन ईमानदारी से दीजिएगा।'
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ऐसे में उसने कोर्ट से राहत की उम्मीद की थी। अब चूंकि कोर्ट ने उसे उम्रकैद की सजा दी है ऐसे में यासीन मलिक के पास ऊपरी अदालत यानी हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में जाने का विकल्प मौजूद है।
NIA के पास क्या विकल्प
टेरर फंडिग के मामले में एनआईए यासीन मलिक के लिए फांसी की सजा की मांग कर रही थी। NIA ने यासीन पर लगे एक-एक आरोपों के लिए सबूत पेश किए थे, जिसके बाद यासीन मलिक को अपने गुनाह कबूल करने पड़े थे, लेकिन अदालत द्वारा यासीन को उम्रकैद की सजा दी गई है। ऐसे में NIA भी इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत मतलब हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता है।
गौरतलब है कि कोर्ट ने 19 मई को यासीन मलिक को आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने का दोषी ठहराया था। इस मामले में NIA ने 2017 में एफआईआर दर्ज की थी। एक दर्जन से अधिक लोग आरोपी बनाए गए थे। 18 जनवरी 2018 को NIA ने कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी। NIA ने कोर्ट में कहा था, 'लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन, जेकेएलएफ, जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों ने कश्मीर और देश में बड़े पैमाने पर हमले किए थे।' कोर्ट में यासीन ने अपने ऊपर लगे आरोपों को कबूल भी लिया था। उसने कहा था कि वह इसे चुनौती नहीं देगा।

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