पहले बसाया, फिर बुलडोजर चलाया: वन भूमि पर कब्जे का बड़ा खुलासा, चुपके से बनाईं झुग्गियां; फिर कर दिया पक्का
जम्मू के पहाड़ी इलाकों में वन भूमि पर भू-माफिया द्वारा सुनियोजित तरीके से अवैध कब्जे का मामला सामने आया है, जिसमें पहले झुग्गियां बनाकर बाद में पक्का निर्माण किया गया। इससे न केवल हरित क्षेत्र घट रहा है बल्कि भूस्खलन और सुरक्षा से जुड़े गंभीर खतरे भी बढ़ रहे हैं।
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पहाड़ी इलाकों में वन भूमि पर अवैध कब्जे का बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। वन विभाग की नाक के नीचे भू-माफिया और अतिक्रमणकारियों ने सोची-समझी साजिश के तहत घने जंगलों को निशाना बनाना शुरू किया है। प्रशासनिक अधिकारियों की गोपनीय रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इन लोगों ने पहले जंगलों में चुपके से अस्थायी झुग्गी-झोपड़ियां रखीं और फिर मौका देखकर पक्का निर्माण कर जमीन पर कब्जा जमा लिया।
अवैध गतिविधियों के कारण न सिर्फ हरित क्षेत्र में कमी आई है बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है। रिपोर्ट के अनुसार माफिया शुरुआत में पहाड़ी वादियों के शांत इलाकों में झुग्गियां डालकर आसपास की जमीन हथियाते हैं और प्रशासन की ढिलाई का फायदा उठाकर रातों-रात कंक्रीट का निर्माण खड़ा कर देते हैं। आईएफएस एसके आनंद के अनुसार वन विभाग की सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए प्रशासनिक स्तर पर मंथन हो चुका है और किसी भी सूरत में अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जम्मू के कई पहाड़ी इलाके सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हैं। घने जंगलों के बीचो-बीच इस तरह के अवैध पक्के निर्माण और अज्ञात लोगों की रिहायश ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। आशंका जताई जा रही है कि घने जंगलों में बने अवैध ठिकाने राष्ट्रविरोधी तत्वों के लिए पनाहगाह बन सकते हैं।
अतिक्रमण मुक्त जमीन पर बनेगा हरा-भरा पार्क
रायका बांदी में तीन एकड़ जमीन अतिक्रमण मुक्त होने के बाद वन विभाग ने भविष्य की योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है। डीएफओ शहरी ने फॉरेस्ट कंजर्वेटर प्रदीप को लीगल क्लोजर रिपोर्ट सौंपी है जिसमें पौधरोपण के साथ पार्क विकसित किया जाएगा। डीएफओ अश्वनी कुमार ने बताया कि प्राथमिक चरण में मानसून सीजन में पौधरोपण किया जाएगा, तारबाड़ के साथ ही खूबसूरत पार्क विकसित किया जाएगा। लोग यहां आकर परिवार के साथ समय बिता सकेंगे।
सैटेलाइट मैपिंग और ड्रोन सर्वे की तैयारी कब्जों के संकट से निपटने के लिए वन विभाग अब वन्य क्षेत्रों का सैटेलाइट मैपिंग और ड्रोन सर्वे कराने की तैयारी में है। रणनीति के तहत पहले सभी अतिक्रमणों को हटाकर जमीन को कब्जा मुक्त कराया जाएगा। इसके बाद विभाग इन जमीनों पर पौधरोपण करेगा और नियमित निगरानी के लिए स्टाफ की तैनाती की जाएगी।
पहले बसाया, फिर बुलडोजर चलाया
सिद्दड़ा के रायका बांदी वन क्षेत्र में अतिक्रमण विरुद्ध कार्रवाई के बाद उजड़े घरों और मलबे के बीच बैठे परिवारों की आंखों में दर्द के साथ सिस्टम और सियासत को लेकर गुस्सा है। सवाल साफ है कि जिन लोगों को वर्षों तक बिजली-पानी जैसी सुविधाएं देकर आबाद किया गया, उन्हीं को मंगलवार को अचानक बेदखल कर दिया गया।
कार्रवाई के तीसरे दिन वीरवार को पूरा इलाका मलबे में तब्दील नजर आया। महिलाएं टूटे घरों के पास बर्तन और कपड़े समेटती दिखीं। बच्चे किताबें और खिलौने तलाशते रहे। कई परिवार खुले आसमान के नीचे बैठे रहे। करीब 80 वर्षीय अब्दुल राजाद मूल रूप से कोकरनाग कश्मीर के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि विस्थापन के दौर में वे जम्मू आए थे और उसी दौरान यहां बसे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रशासन ने बिजली-पानी के कनेक्शन दिए, तब जमीन अवैध क्यों नहीं थी। अब बुढ़ापे में उन्हें सड़क पर कर दिया गया। पीड़ित महिला परवीन ने कहा कि उनकी बेटी की शादी के लिए जुटाया गया सामान मलबे में दब गया। चुनावों के दौरान नेता बस्ती में आकर बड़े-बड़े वादे करते थे, लेकिन कार्रवाई के वक्त कोई मदद के लिए सामने नहीं आया।
दिहाड़ी मजदूर मोहम्मद आजम ने बताया कि उन्होंने वर्षों की मेहनत से छोटा सा घर बनाया था। अब घर टूटने के बाद परिवार के साथ पेड़ के नीचे रात बितानी पड़ रही है। उनका कहना था कि अगर हटाना ही था, तो पहले रहने की व्यवस्था करनी चाहिए थी। पूर्व पार्षद शामा अख्तर ने कहा कि प्रशासन को कार्रवाई से पहले पुनर्वास की स्पष्ट नीति बनानी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों तक विभिन्न विभागों की अनदेखी और राजनीतिक संरक्षण के कारण ही यहां बस्तियां बढ़ती रहीं। अब अचानक गरीब परिवारों पर कार्रवाई कर देना मानवीय दृष्टि से गलत है।
पीछे घरों को छोड़ आगे के तोड़ दिए
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान कई स्थानों पर पीछे बने मकानों को छोड़कर सामने के घरों पर बुलडोजर चलाया गया। लोगों का कहना है कि इससे कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराने की मांग उठाई है।
30 से अधिक मकान टूटे, 25 परिवारों को ही मिले टेंट
रायका वन क्षेत्र में कार्रवाई के दौरान 30 से अधिक मकानों को तोड़ा गया, लेकिन राहत के नाम पर केवल करीब 25 परिवारों के लिए ही टेंट की व्यवस्था की गई। कई परिवार अब भी खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। पीड़ितों ने सरकार से सभी प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की मांग की है।
रायका बांदी से कब्जा हटाने पर एनसी व पीडीपी आमने-सामने
जम्मू के रायका बांदी में कब्जा हटाने की गूंज जम्मू संभाग से कश्मीर तक सुनाई देने लगी है। इस मामले में नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी आमने-सामने आ गई हैं। दोनों दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। सियासी गलियारों में वीरवार को इसी मुद्दे की गूंज सुनाई देती रही है।
पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा, पीडीपी ने 5 या 10 मरला जमीन वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए देने की बात कही थी। उनकी पार्टी ने राज्य की जमीन के छोटे-छोटे टुकड़ों पर रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए विधानसभा में एक बिल पेश किया था लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार ने उसे रोक दिया।
महबूबा ने आरोप लगाया कि बीते कुछ वर्षों से तोड़फोड़ अभियान के लिए अलग-अलग बहाने बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू के सिद्धड़ा के रायका बांदी इलाके में चलाया गया तोड़फोड़ अभियान सही नहीं है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में जम्मू में लगभग 60 घरों को इस आधार पर तोड़ दिया गया कि उनमें रहने वाले लोग राज्य की जमीन पर थे।
जमीन देने का नहीं, बेघर करने का था आदेश : एनसी
नेकां प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कहा, पीडीपी विधानसभा में जमीन बचाने का नहीं, बेघर और खाली करने का आदेश लाई थी। 2015 में पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद और भाजपा समर्थित सरकार ने कब्जे हटाने का आदेश दिया था। पहले दिन भाजपा के विधायक हंगामा करते हैं और दूसरे दिन कार्रवाई हो जाती है। जब तक नेकां सरकार है लोगों को बेघर नहीं होने दिया जाएगा।
बड़े कब्जाधारकों से खाली करवाएं जमीन : इत्तू
शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू ने कहा कि इन मकानों को तोड़ने से क्या मिलेगा। जिन्होंने करोड़ों की जमीन पर कब्जा किया है उन्हें खाली करवाया जाए। गरीब लोगों के परिवारों को दर-ब-दर कर रहे हैं। पीडीपी ने करोड़ों रुपये लेकर अपने रिश्तेदारों को नौकरी दी थी। आज भी जांच की जाए तो यह बात सामने आ जाएगी। पीडीपी को इसका जवाब देना चाहिए।