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Poonch News: पुंछ के कल्लर मोड़ा का लाल नगालैंड में बलिदान, शोक में डूबा पूरा गांव
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असम राइफल्स में बतौर चालक तैनाती थी हवलदार मोहम्मद इकबाल की, आईईडी विस्फोट में ड्यूटी निभाते हुए गई जान
संवाद न्यूज एजेंसी
पूंछ। पूर्वोत्तर के नगालैंड में आतंकियों के द्वारा किए गए आईईडी विस्फोट में पुंछ के उपजिला मेंढर के गांव कल्लर मोड़ा का लाल हवलदार मोहम्मद इकबाल बलिदान हो गया। इकबाल भारतीय सेना की असम राइफल्स में बतौर चालक तैनात था। ड्यूटी के दौरान वाहन लेकर नागालैंड के चुमौकेदिमा जिले जा रहा था। इम्प्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस विस्फोट ने उसकी जान लेली। सेना अध्यक्ष सहित सभी सैन्य अधिकारियों ने इकबाल को सैल्यूट किया है। वहीं गांव में बलिदान की सूचना मिलते ही शोक की लहर दौड़ गई है। बड़ी संख्या में रिश्तेदार एवं ग्रामीण हवलदार इकबाल के घर पर एकत्र हो गए हैं।
तीन दशकों से अधिक समय तक आतंकवाद की मार झेलने वाले पुंछ जिले के गांव कल्लर मोड़ा निवासियों एवं इकबाल के परिजनों का कहना है कि देश के आतंकवाद का पूरी तरह सफाया होना चाहिए। हम कब तक इस तरह आतंकवाद से लड़ते हुए अपने बच्चों, भाइयों एवं पिताओं को खोते रहेंग। सरकार को आतंकवाद को कुचलने के लिए ओर कड़े कदम उठाने होंगे जिसके के लिए हम सरकार के साथ हैं और आगे भी रहेंगे। शहीद के रिश्तेदार मुशताक हुसैन और मोहम्मद सैयहद का कहना है कि मोहम्मद इकबाल ने अपनी शहादत देकर गांव का नाम रोशन कर दिया है। हम उसे कभी भी भुला नहीं सकेंगे। वह इतना मिलनसार था कि जब भी छुट्टी आता गांव के हर घर में मिलने जाता। रिश्तेदारों के यहां उठता बैठता था। छुट्टी के आधे से ज्यादा दिन तो वह हमारे साथ ही बिता देता था। हम चाहते हैं कि शहीद के गांव घर तक सड़क का निर्माण किया जाए और उसक नाम पर गांव में स्टेडियम बनाया जाए ताकि गांव के युवा खेलों में आगे बढ़कर सेना में जा सकें।
बोले पिता- मुझे बेटे की शहादत पर गर्व
शहीद हवलदार के पिता हाजी मोहम्मद कालू का कहना है कि मोहम्मद इकबाल डेढ़ महीना पहले छुट्टी आया था। कल रात हमें बेटे के साथ ड्यूटी करने वाले गांव के एक लड़के ने बताया कि इकबाल देश के लिए बलिदान हो गया। हमें बेटे की शहादत पर गर्व है कि उसने देश के लिए शहादत दी जो एक फौजी का काम होता है। इकबाल हमारे पूरे परिवार का सहारा था। उसके तीन बेटे हैं, एक छोटा भाई है हम उसके बूढ़े मां-बाप हैं, हम सबका वही सहारा था। वही पूरा परिवार चलाता था। अब हमारा क्या होगा बस इस बात की चिंता है।
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बोला बेटा फैजल- मैं देशद्रोहियों से बदला लेने को तैयार
शहीद के बड़े बेटे फैजल इकबाल का कहना है कि रविवार को पापा ने फोन किया था मैं जम्मू में पढ़ाई कर रहा था उस दिन मेरा टैस्ट था तो उन्होंने पढ़ाई के साथ साथ मेरी सेहत के बारे में बात की थी। उसके बाद उन्होंने घर पर दादू और पूरे परिवार से बात की थी। सोमवार को उनके बलिदान होने की खबर आ गई। मुझे अपने पापा की शहादत पर गर्व है जो वह देश के लिए कुर्बान हो गए हैं। मैं भी आगे चल कर सेना में अधिकारी बन कर देश की सेवा करूंगा और देश द्रोहियों से बदला लूंगा।
हवलदार मोहम्मद इकबाल को दी अंतिम विदाई, आज गांव पहुंचेगा शव
कोहिमा। नगालैंड के चुमौकेदिमा जिले के सुखोवी में आईईडी विस्फोट में बलिदान हुए 28 असम राइफल्स के हवलदार मोहम्मद इकबाल को मंगलवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। सुखोवी स्थित असम राइफल्स ट्रेनिंग सेंटर एंड स्कूल में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में असम राइफल्स के वरिष्ठ अधिकारियों, जवानों और अन्य सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। अधिकारी ने बताया कि हवलदार मोहम्मद इकबाल का पार्थिव शरीर वायु मार्ग से पहले दिल्ली ले जाया जाएगा। इसके बाद उसे उनके गृह जम्मू-कश्मीर भेजा जाएगा, जहां पुंछ जिले के कल्लर मोड़ा गांव में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पूंछ। पूर्वोत्तर के नगालैंड में आतंकियों के द्वारा किए गए आईईडी विस्फोट में पुंछ के उपजिला मेंढर के गांव कल्लर मोड़ा का लाल हवलदार मोहम्मद इकबाल बलिदान हो गया। इकबाल भारतीय सेना की असम राइफल्स में बतौर चालक तैनात था। ड्यूटी के दौरान वाहन लेकर नागालैंड के चुमौकेदिमा जिले जा रहा था। इम्प्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस विस्फोट ने उसकी जान लेली। सेना अध्यक्ष सहित सभी सैन्य अधिकारियों ने इकबाल को सैल्यूट किया है। वहीं गांव में बलिदान की सूचना मिलते ही शोक की लहर दौड़ गई है। बड़ी संख्या में रिश्तेदार एवं ग्रामीण हवलदार इकबाल के घर पर एकत्र हो गए हैं।
तीन दशकों से अधिक समय तक आतंकवाद की मार झेलने वाले पुंछ जिले के गांव कल्लर मोड़ा निवासियों एवं इकबाल के परिजनों का कहना है कि देश के आतंकवाद का पूरी तरह सफाया होना चाहिए। हम कब तक इस तरह आतंकवाद से लड़ते हुए अपने बच्चों, भाइयों एवं पिताओं को खोते रहेंग। सरकार को आतंकवाद को कुचलने के लिए ओर कड़े कदम उठाने होंगे जिसके के लिए हम सरकार के साथ हैं और आगे भी रहेंगे। शहीद के रिश्तेदार मुशताक हुसैन और मोहम्मद सैयहद का कहना है कि मोहम्मद इकबाल ने अपनी शहादत देकर गांव का नाम रोशन कर दिया है। हम उसे कभी भी भुला नहीं सकेंगे। वह इतना मिलनसार था कि जब भी छुट्टी आता गांव के हर घर में मिलने जाता। रिश्तेदारों के यहां उठता बैठता था। छुट्टी के आधे से ज्यादा दिन तो वह हमारे साथ ही बिता देता था। हम चाहते हैं कि शहीद के गांव घर तक सड़क का निर्माण किया जाए और उसक नाम पर गांव में स्टेडियम बनाया जाए ताकि गांव के युवा खेलों में आगे बढ़कर सेना में जा सकें।
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बोले पिता- मुझे बेटे की शहादत पर गर्व
शहीद हवलदार के पिता हाजी मोहम्मद कालू का कहना है कि मोहम्मद इकबाल डेढ़ महीना पहले छुट्टी आया था। कल रात हमें बेटे के साथ ड्यूटी करने वाले गांव के एक लड़के ने बताया कि इकबाल देश के लिए बलिदान हो गया। हमें बेटे की शहादत पर गर्व है कि उसने देश के लिए शहादत दी जो एक फौजी का काम होता है। इकबाल हमारे पूरे परिवार का सहारा था। उसके तीन बेटे हैं, एक छोटा भाई है हम उसके बूढ़े मां-बाप हैं, हम सबका वही सहारा था। वही पूरा परिवार चलाता था। अब हमारा क्या होगा बस इस बात की चिंता है।
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बोला बेटा फैजल- मैं देशद्रोहियों से बदला लेने को तैयार
शहीद के बड़े बेटे फैजल इकबाल का कहना है कि रविवार को पापा ने फोन किया था मैं जम्मू में पढ़ाई कर रहा था उस दिन मेरा टैस्ट था तो उन्होंने पढ़ाई के साथ साथ मेरी सेहत के बारे में बात की थी। उसके बाद उन्होंने घर पर दादू और पूरे परिवार से बात की थी। सोमवार को उनके बलिदान होने की खबर आ गई। मुझे अपने पापा की शहादत पर गर्व है जो वह देश के लिए कुर्बान हो गए हैं। मैं भी आगे चल कर सेना में अधिकारी बन कर देश की सेवा करूंगा और देश द्रोहियों से बदला लूंगा।
हवलदार मोहम्मद इकबाल को दी अंतिम विदाई, आज गांव पहुंचेगा शव
कोहिमा। नगालैंड के चुमौकेदिमा जिले के सुखोवी में आईईडी विस्फोट में बलिदान हुए 28 असम राइफल्स के हवलदार मोहम्मद इकबाल को मंगलवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। सुखोवी स्थित असम राइफल्स ट्रेनिंग सेंटर एंड स्कूल में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में असम राइफल्स के वरिष्ठ अधिकारियों, जवानों और अन्य सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। अधिकारी ने बताया कि हवलदार मोहम्मद इकबाल का पार्थिव शरीर वायु मार्ग से पहले दिल्ली ले जाया जाएगा। इसके बाद उसे उनके गृह जम्मू-कश्मीर भेजा जाएगा, जहां पुंछ जिले के कल्लर मोड़ा गांव में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।