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Poonch News: महर्षि पुलस्त्य के तप से प्रकट हुआ था श्री बूढ़ा अमरनाथ
संवाद न्यूज एजेंसी, पुंछ
Updated Sat, 14 Feb 2026 02:35 AM IST
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पुंछ जिले में स्थित भगवान शंकर के पावन थाम श्रीबूढ़ा अमरनाथ मंदिर स्थित स्ंवयभू शिवलिंग
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रावण के दादा महर्षि पुलस्त्य योग साधना के लिए पहुंचे थे इस स्थल पर
महाशिवरात्रि की सभी तैयारियां पूरी, मंदिर में की जाएगी चार प्रहर की पूजा
पुंछ। श्री बूढ़ा अमरनाथ के बारे में प्रचलित कथा के अनुसार देवी पार्वती को अमर कथा सुनाने के कई युगों के बाद रावण के दादा महर्षि पुलस्त्य योग साधना के लिए इस स्थल पर पहुंचे थे। उन्होंने कलकल बहती निर्मल धारा के पास निर्जन वन में एक ही पत्थर की चट्टान पर आसन लगाकर भोलेनाथ की अराधना की। जब भगवान भोलेनाथ प्रकट हुए तो महर्षि पुलस्त्य ने भगवान से इसी स्थान पर विराजमान होने का आग्रह किया।
भगवान शंकर ने महर्षि पुलस्त्य को जहां दर्शन दिए थे वहां पर सफेद पत्थर का चट्टान स्वरूप शिवलिंग प्रकट हुआ। महर्षि पुलस्त्य ने इसकी वर्षों तक पूजा अर्चना की। इस कारण क्षेत्र का नाम पुलस्त्य नगरी और मंदिर के पास बहन वाली नदी का नाम पुलस्त्य गंगा पड़ गया जो आज पुंछ जिले के इतिहास में लिखित है।
रानी चंद्रिका को बूढ़े के रूप में दर्शन देने से पड़ा बूढ़ा अमरनाथ नाम
बूढ़ा अमरनाथ में महर्षि पुलस्त्य के तप के बाद यह स्थान प्राकृतिक उथल पुथल और ईश्वरीय इच्छा से लुप्त हो गया था। कलयुग के पहले चरण में जम्मू कश्मीर की राजधानी बूढ़ा अमरनाथ मंदिर से 10 किलोमीटर दूर लोरन गांव में थी। यहां रानी चंद्रिका का राज था और वह शिवभक्त थी। रानी हर वर्ष श्रावण मास में कश्मीर स्थित अमरनाथ गुफा में जाकर भगवान शंकर का पूजन करने के बाद ही अन्न जल ग्रहण करती थी। एक बार श्रावण मास में मौसम खराब होने और भारी हिमपात के कारण कश्मीर जाने के सभी पैदल रास्ते बंद हो गए और रानी अमरनाथ गुफा तक नहीं जा पाई। इस शोक में रानी ने अन्न जल त्याग कर खुद को महल के एक कक्ष में बंद कर लिया। एक दिन उसने स्वप्न देखा कि एक श्वेत वस्त्रधारी बूढ़ा साधू उसे अपने साथ ले जाने की जिद कर रहा है। यह देखकर रानी की निद्रा टूट गई। तभी महल के बाहर हाथ में त्रिशूल लिए एक बूढ़े साधू ने भिक्षा की याचना की तो रानी की दासियां साधू को भिक्षा देने पहुंची। साधू ने रानी के हाथों भिक्षा लेने की बात कही। जब रानी भिक्षा देने पहुंची तो साधू का स्वरूप स्वप्न में दिखे साधू जैसा था। साधू ने कहा कि देवी तुम्हारे महल से 10 किलोमीटर नीचे अमरनाथ है आओ मैं तुम्हें वहां ले जाने के लिए ही आया हूं। रानी और उसके मंत्री एवं सैनिक साधू के साथ इस स्थान पर पहुंचे। साधू ने रानी के सामने एक स्थान पर हाथ में पकड़े त्रिशूल से निशान लगा कर खुदाई करने के लिए कहा तो यहां पर एक ही चट्टान से बनी हुई छोटी सी गुफा जिसके चार द्वार थे और बीच में सफेद शिवलिंग था। इसे देखकर रानी अचंभित हो गई मगर साधू वहां कहीं नजर नहीं आया।
महाशिवरात्रि पर होगी चार प्रहर की विशेष पूजा : पंडित अरूण शर्मा
जिले के अन्य शिवालयों की ही तरह प्राचीन शिवधाम श्री बूढ़ा अमरनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में जलाभिषेक किया जाएगा। मंदिर में चार प्रहर की विशेष पूजा अर्चना की जाएगी। इसमें मंदिर के पुजारियों के साथ बीएसएफ जवानों एवं मंदिर समिति के कुछ लोग भी परिवार सहित भाग लेंगे।
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महाशिवरात्रि की सभी तैयारियां पूरी, मंदिर में की जाएगी चार प्रहर की पूजा
पुंछ। श्री बूढ़ा अमरनाथ के बारे में प्रचलित कथा के अनुसार देवी पार्वती को अमर कथा सुनाने के कई युगों के बाद रावण के दादा महर्षि पुलस्त्य योग साधना के लिए इस स्थल पर पहुंचे थे। उन्होंने कलकल बहती निर्मल धारा के पास निर्जन वन में एक ही पत्थर की चट्टान पर आसन लगाकर भोलेनाथ की अराधना की। जब भगवान भोलेनाथ प्रकट हुए तो महर्षि पुलस्त्य ने भगवान से इसी स्थान पर विराजमान होने का आग्रह किया।
भगवान शंकर ने महर्षि पुलस्त्य को जहां दर्शन दिए थे वहां पर सफेद पत्थर का चट्टान स्वरूप शिवलिंग प्रकट हुआ। महर्षि पुलस्त्य ने इसकी वर्षों तक पूजा अर्चना की। इस कारण क्षेत्र का नाम पुलस्त्य नगरी और मंदिर के पास बहन वाली नदी का नाम पुलस्त्य गंगा पड़ गया जो आज पुंछ जिले के इतिहास में लिखित है।
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रानी चंद्रिका को बूढ़े के रूप में दर्शन देने से पड़ा बूढ़ा अमरनाथ नाम
बूढ़ा अमरनाथ में महर्षि पुलस्त्य के तप के बाद यह स्थान प्राकृतिक उथल पुथल और ईश्वरीय इच्छा से लुप्त हो गया था। कलयुग के पहले चरण में जम्मू कश्मीर की राजधानी बूढ़ा अमरनाथ मंदिर से 10 किलोमीटर दूर लोरन गांव में थी। यहां रानी चंद्रिका का राज था और वह शिवभक्त थी। रानी हर वर्ष श्रावण मास में कश्मीर स्थित अमरनाथ गुफा में जाकर भगवान शंकर का पूजन करने के बाद ही अन्न जल ग्रहण करती थी। एक बार श्रावण मास में मौसम खराब होने और भारी हिमपात के कारण कश्मीर जाने के सभी पैदल रास्ते बंद हो गए और रानी अमरनाथ गुफा तक नहीं जा पाई। इस शोक में रानी ने अन्न जल त्याग कर खुद को महल के एक कक्ष में बंद कर लिया। एक दिन उसने स्वप्न देखा कि एक श्वेत वस्त्रधारी बूढ़ा साधू उसे अपने साथ ले जाने की जिद कर रहा है। यह देखकर रानी की निद्रा टूट गई। तभी महल के बाहर हाथ में त्रिशूल लिए एक बूढ़े साधू ने भिक्षा की याचना की तो रानी की दासियां साधू को भिक्षा देने पहुंची। साधू ने रानी के हाथों भिक्षा लेने की बात कही। जब रानी भिक्षा देने पहुंची तो साधू का स्वरूप स्वप्न में दिखे साधू जैसा था। साधू ने कहा कि देवी तुम्हारे महल से 10 किलोमीटर नीचे अमरनाथ है आओ मैं तुम्हें वहां ले जाने के लिए ही आया हूं। रानी और उसके मंत्री एवं सैनिक साधू के साथ इस स्थान पर पहुंचे। साधू ने रानी के सामने एक स्थान पर हाथ में पकड़े त्रिशूल से निशान लगा कर खुदाई करने के लिए कहा तो यहां पर एक ही चट्टान से बनी हुई छोटी सी गुफा जिसके चार द्वार थे और बीच में सफेद शिवलिंग था। इसे देखकर रानी अचंभित हो गई मगर साधू वहां कहीं नजर नहीं आया।
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पुंछ जिले में स्थित भगवान शंकर के पावन थाम श्रीबूढ़ा अमरनाथ मंदिर स्थित स्ंवयभू शिवलिंग