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Srinagar News: ‘मार्कर जीना’ से कारगिल के वीरों को दी श्रद्धांजलि
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श्रीनगर में चिनार बुक फेस्टिवल 2026 का हुआ समापन
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर में चल रहे नौ दिवसीय ‘चिनार बुक फेस्टिवल 2026’ का रविवार को समापन हो गया। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास शिक्षा मंत्रालय श्रीनगर जिला प्रशासन और राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस उत्सव ने कश्मीर घाटी में साहित्य, कला और संस्कृति का नया इतिहास रच दिया। मिलकर पढ़ेंगे, मिलकर बढ़ेंगे के संदेश के साथ आयोजित इस मेले में जहां कार्यदिवसों (वीकडेज) में रोजाना 57 हजार से 73 हजार पाठक पहुंचे। वहीं सप्ताहांत (वीकेंड) में यह आंकड़ा एक लाख का पहुंच गया।
उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण आठवें दिन आयोजित 5के रीडिंग मैराथन रही, जिसे उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने झंडी दिखाकर रवाना किया था। डल झील के किनारे 4,644 से अधिक स्कूली बच्चों ने दौड़कर ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ और ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में नया कीर्तिमान दर्ज कराया।
अंतिम दिन ‘मार्कर जीना’ नाटक से वीरों को नमन
उत्सव के अंतिम दिन कारगिल विजय दिवस के अवसर पर प्रख्यात नाटककार राकेश रोशन भट्ट द्वारा निर्देशित नाटक ‘मार्कर जीना’ का मंचन किया गया। इस भावुक प्रस्तुत ने भारतीय सेना के जवानों के शौर्य और बलिदान को नमन किया, जिसे देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
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दिग्गजों का जमावड़ा और नई पुस्तकों का विमोचन
18 जुलाई को शुरू हुए इस मेले में 200 से अधिक प्रकाशकों ने भाग लिया। अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, अभिनेता राकेश बेदी और जाने-माने फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली ने युवाओं से सीधा संवाद किया।
गोजरी अनुवाद कार्यशाला की 24 द्विभाषी पुस्तकें, ‘राजतरंगिणी संवाद’ के तहत 5 उपन्यास, और ''''विद्या और छोटा भीम: बिग ग्रीन मिशन'''' कॉमिक बुक को 48 भाषाओं में लॉन्च किया गया। स्कॉस्ट-के, आईयूएसटी और कश्मीर विश्वविद्यालय के छात्र इनोवेटर्स ने अपनी पेटेंट तकनीकों और स्टार्टअप्स का प्रदर्शन किया। ऑथर्स कॉर्नर'' में कश्मीर की महिला उद्यमियों, पत्रकारों और प्रशासनिक अधिकारियों ने क्षेत्र में सामाजिक बदलाव पर चर्चा की। बच्चों के लिए सुलेख, कठपुतली शो और ''राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय'' की जानकारी दी गई। शाम को रूफ नृत्य, सूफियाना संगीत और मुशायरे ने समां बांधा। डल झील के खूबसूरत माहौल के बीच संपन्न हुआ यह तीसरा संस्करण अब चौथे संस्करण के वादे के साथ विदा हुआ। इस आयोजन ने साबित कर दिया कि कश्मीर का युवा किताबों और कलम के जरिए प्रगति की नई इबारत लिखने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर में चल रहे नौ दिवसीय ‘चिनार बुक फेस्टिवल 2026’ का रविवार को समापन हो गया। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास शिक्षा मंत्रालय श्रीनगर जिला प्रशासन और राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस उत्सव ने कश्मीर घाटी में साहित्य, कला और संस्कृति का नया इतिहास रच दिया। मिलकर पढ़ेंगे, मिलकर बढ़ेंगे के संदेश के साथ आयोजित इस मेले में जहां कार्यदिवसों (वीकडेज) में रोजाना 57 हजार से 73 हजार पाठक पहुंचे। वहीं सप्ताहांत (वीकेंड) में यह आंकड़ा एक लाख का पहुंच गया।
उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण आठवें दिन आयोजित 5के रीडिंग मैराथन रही, जिसे उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने झंडी दिखाकर रवाना किया था। डल झील के किनारे 4,644 से अधिक स्कूली बच्चों ने दौड़कर ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ और ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में नया कीर्तिमान दर्ज कराया।
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अंतिम दिन ‘मार्कर जीना’ नाटक से वीरों को नमन
उत्सव के अंतिम दिन कारगिल विजय दिवस के अवसर पर प्रख्यात नाटककार राकेश रोशन भट्ट द्वारा निर्देशित नाटक ‘मार्कर जीना’ का मंचन किया गया। इस भावुक प्रस्तुत ने भारतीय सेना के जवानों के शौर्य और बलिदान को नमन किया, जिसे देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
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दिग्गजों का जमावड़ा और नई पुस्तकों का विमोचन
18 जुलाई को शुरू हुए इस मेले में 200 से अधिक प्रकाशकों ने भाग लिया। अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, अभिनेता राकेश बेदी और जाने-माने फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली ने युवाओं से सीधा संवाद किया।
गोजरी अनुवाद कार्यशाला की 24 द्विभाषी पुस्तकें, ‘राजतरंगिणी संवाद’ के तहत 5 उपन्यास, और ''''विद्या और छोटा भीम: बिग ग्रीन मिशन'''' कॉमिक बुक को 48 भाषाओं में लॉन्च किया गया। स्कॉस्ट-के, आईयूएसटी और कश्मीर विश्वविद्यालय के छात्र इनोवेटर्स ने अपनी पेटेंट तकनीकों और स्टार्टअप्स का प्रदर्शन किया। ऑथर्स कॉर्नर'' में कश्मीर की महिला उद्यमियों, पत्रकारों और प्रशासनिक अधिकारियों ने क्षेत्र में सामाजिक बदलाव पर चर्चा की। बच्चों के लिए सुलेख, कठपुतली शो और ''राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय'' की जानकारी दी गई। शाम को रूफ नृत्य, सूफियाना संगीत और मुशायरे ने समां बांधा। डल झील के खूबसूरत माहौल के बीच संपन्न हुआ यह तीसरा संस्करण अब चौथे संस्करण के वादे के साथ विदा हुआ। इस आयोजन ने साबित कर दिया कि कश्मीर का युवा किताबों और कलम के जरिए प्रगति की नई इबारत लिखने के लिए पूरी तरह तैयार है।