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बांदीपोरा जिला अस्पताल में नवजात की मौत: परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप, जांच के आदेश
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बांदीपोरा। उतरी कश्मीर के बांदीपोरा जिला अस्पताल में प्रसव के बाद एक नवजात शिशु की मौत का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और डॉक्टरों पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने तथा समय रहते उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर न करने का आरोप लगाया।
परिजनों के अनुसार बांदीपोरा निवासी इरफान अहमद शेख की 28 वर्षीय पत्नी परवीना को 26 अगस्त की सुबह करीब 10 बजे प्रसव के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यह उनकी पहली डिलीवरी थी। परिजनों का आरोप है कि प्रसव के दौरान जच्चा और बच्चा दोनों की स्थिति ऐसी थीं कि उन्हें तत्काल विशेषज्ञ देखभाल की जरूरत थी। जब स्थिति बिगड़ने लगी तो मरीज को समय पर किसी बड़े अस्पताल रेफर क्यों नहीं किया गया।
नवजात की मौत के बाद अस्पताल पहुंचे परिजनों और रिश्तेदारों ने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार स्टाफ की जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि भर्ती के समय से लेकर प्रसव तक दिए गए पूरे उपचार, उस दौरान लिए गए चिकित्सीय फैसलों और रेफरल में हुई देरी की बारीकी से जांच की जाए।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला अस्पताल बांदीपोरा के चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) ने बताया कि पूरे मामले की जांच और तथ्यों का पता लगाने के लिए एक विशेष जांच टीम गठित की जाएगी। यह जांच टीम मरीज के भर्ती होने से लेकर नवजात की मौत तक की पूरी प्रक्रिया और इलाज में हुई कथित देरी की पड़ताल करेगी।
इस घटना के बाद से स्थानीय नागरिकों में जिला अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं और रेफरल व्यवस्था को लेकर गहरा रोष है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और गंभीर मरीजों के लिए अस्पताल में 24 घंटे विशेषज्ञ डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और पुख्ता आपातकालीन व्यवस्था की सख्त जरूरत है। इसके साथ ही लोगों ने मांग की कि नियमों के तहत योग्य स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति कर अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी को जल्द से जल्द दूर किया जाए।
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परिजनों के अनुसार बांदीपोरा निवासी इरफान अहमद शेख की 28 वर्षीय पत्नी परवीना को 26 अगस्त की सुबह करीब 10 बजे प्रसव के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यह उनकी पहली डिलीवरी थी। परिजनों का आरोप है कि प्रसव के दौरान जच्चा और बच्चा दोनों की स्थिति ऐसी थीं कि उन्हें तत्काल विशेषज्ञ देखभाल की जरूरत थी। जब स्थिति बिगड़ने लगी तो मरीज को समय पर किसी बड़े अस्पताल रेफर क्यों नहीं किया गया।
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नवजात की मौत के बाद अस्पताल पहुंचे परिजनों और रिश्तेदारों ने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार स्टाफ की जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि भर्ती के समय से लेकर प्रसव तक दिए गए पूरे उपचार, उस दौरान लिए गए चिकित्सीय फैसलों और रेफरल में हुई देरी की बारीकी से जांच की जाए।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला अस्पताल बांदीपोरा के चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) ने बताया कि पूरे मामले की जांच और तथ्यों का पता लगाने के लिए एक विशेष जांच टीम गठित की जाएगी। यह जांच टीम मरीज के भर्ती होने से लेकर नवजात की मौत तक की पूरी प्रक्रिया और इलाज में हुई कथित देरी की पड़ताल करेगी।
इस घटना के बाद से स्थानीय नागरिकों में जिला अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं और रेफरल व्यवस्था को लेकर गहरा रोष है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और गंभीर मरीजों के लिए अस्पताल में 24 घंटे विशेषज्ञ डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और पुख्ता आपातकालीन व्यवस्था की सख्त जरूरत है। इसके साथ ही लोगों ने मांग की कि नियमों के तहत योग्य स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति कर अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी को जल्द से जल्द दूर किया जाए।