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Srinagar News: लेह में हिमालयी बौद्ध धर्म पर करवाया अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
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भिक्षु संघसेना अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू का अभिवादन करते हुएस्रोत - सूचना विभाग
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संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ ने महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर के सहयोग से 2569वें वैशाख बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर हिमालयी बौद्ध धर्म का भारत एवं परे आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत में योगदान विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया।
लेह के महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर में आयोजित इस सम्मेलन में भारत और विदेशों से विद्वानों, आध्यात्मिक नेताओं, नीति निर्माताओं तथा अभ्यासियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत भिक्षुओं की ओर से पारंपरिक मंगलपाठ से हुई। उसके बाद धार्मिक दीप प्रज्वलन तथा आईबीसी के वृत्तचित्र लद्दाख हाई पासेस की भूमि का विमोचन किया गया।
मुख्य अतिथि अरुणाचल प्रदेश के सीएम पेमा खांडू ने अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश तथा लद्दाख जैसे क्षेत्रों में हिमालयी बौद्ध धर्म की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्वपूर्णता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन हिमालयी समुदायों के बीच संबंधों को मजबूत करते हैं। शांति, सद्भाव और एकता को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने दलाई लामा के करुणा और एकता को पोषित करने में स्थायी प्रभाव की भी सराहना की।
माननीय अतिथि थुकसे रिन्पोछे ने आधुनिक विश्व में बौद्ध शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर विचार रखे। भावी पीढ़ियों के लिए हिमालयी बौद्ध परंपराओं को संरक्षित करते हुए आंतरिक शांति विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
लद्दाख बौद्ध संघ के अध्यक्ष त्सेरिंग लाक्रुक ने सिल्क रूट के माध्यम से लद्दाख में बौद्ध धर्म के ऐतिहासिक प्रसार पर प्रकाश डाला तथा मठों को शिक्षा, ध्यान और संघर्ष समाधान के केंद्रों के रूप में उनकी भूमिका को रेखांकित किया। इस अवसर पर थुपस्तन नोरबू और ल्हुंडुप ग्याल्पो द्वारा संकलित पुस्तक तथागत की जीवंत विरासत का लद्दाख संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन द्वारा विमोचन किया गया।
सम्मेलन में प्राचीन विरासत के संरक्षण, सांस्कृतिक एवं कलात्मक नवाचार तथा बौद्धिक एवं नैतिक प्रणालियों पर विषयगत सत्र भी आयोजित किए गए जिसमें कई देशों के विद्वानों ने भाग लिया।
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लेह। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ ने महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर के सहयोग से 2569वें वैशाख बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर हिमालयी बौद्ध धर्म का भारत एवं परे आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत में योगदान विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया।
लेह के महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर में आयोजित इस सम्मेलन में भारत और विदेशों से विद्वानों, आध्यात्मिक नेताओं, नीति निर्माताओं तथा अभ्यासियों ने भाग लिया।
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कार्यक्रम की शुरुआत भिक्षुओं की ओर से पारंपरिक मंगलपाठ से हुई। उसके बाद धार्मिक दीप प्रज्वलन तथा आईबीसी के वृत्तचित्र लद्दाख हाई पासेस की भूमि का विमोचन किया गया।
मुख्य अतिथि अरुणाचल प्रदेश के सीएम पेमा खांडू ने अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश तथा लद्दाख जैसे क्षेत्रों में हिमालयी बौद्ध धर्म की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्वपूर्णता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन हिमालयी समुदायों के बीच संबंधों को मजबूत करते हैं। शांति, सद्भाव और एकता को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने दलाई लामा के करुणा और एकता को पोषित करने में स्थायी प्रभाव की भी सराहना की।
माननीय अतिथि थुकसे रिन्पोछे ने आधुनिक विश्व में बौद्ध शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर विचार रखे। भावी पीढ़ियों के लिए हिमालयी बौद्ध परंपराओं को संरक्षित करते हुए आंतरिक शांति विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
लद्दाख बौद्ध संघ के अध्यक्ष त्सेरिंग लाक्रुक ने सिल्क रूट के माध्यम से लद्दाख में बौद्ध धर्म के ऐतिहासिक प्रसार पर प्रकाश डाला तथा मठों को शिक्षा, ध्यान और संघर्ष समाधान के केंद्रों के रूप में उनकी भूमिका को रेखांकित किया। इस अवसर पर थुपस्तन नोरबू और ल्हुंडुप ग्याल्पो द्वारा संकलित पुस्तक तथागत की जीवंत विरासत का लद्दाख संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन द्वारा विमोचन किया गया।
सम्मेलन में प्राचीन विरासत के संरक्षण, सांस्कृतिक एवं कलात्मक नवाचार तथा बौद्धिक एवं नैतिक प्रणालियों पर विषयगत सत्र भी आयोजित किए गए जिसमें कई देशों के विद्वानों ने भाग लिया।
