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Srinagar News: मंडलायुक्त ने दिया भरोसा, ईरान से छात्रों को निकालने के प्रयास जारी

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Srinagar, Divisional Commisonner, Anshul Garg, Gave Surety, Student Parents, Iran war
श्रीनगर के लाल चौक ​स्थित प्रेस एन्क्लेव में जमा ईरान में पढ़ने वाले छात्रों के अ​भिभावक। संवाद
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- सुरक्षा चिंताओं के बीच छात्रों के अभिभावकों श्रीनगर में डिवकॉम अंशुल गर्ग से की मुलाकात, बच्चों की सकुशल वापसी की मांग की
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। ईरान में पढ़ रहे छात्रों के अभिभावकों ने शनिवार को कश्मीर के मंडलायुक्त (डिवकॉम) अंशुल गर्ग से मुलाकात की। उन्होंने बढ़ते तनाव और सुरक्षा चिंताओं के बीच अपने बच्चों को तुरंत वहां से निकालने की मांग की। मंडलायुक्त ने भरोसा दिलाया कि अधिकारी प्राथमिकता से काम कर रहे हैं। हालांकि इस प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है।
बाद में कई अभिभावक श्रीनगर की प्रेस कॉलोनी में इकट्ठा हुए और केंद्र सरकार से ईरान से छात्रों को पूरी तरह से सुरक्षित निकालने की अपील की। अभिभावकों ने ईरान के शहरों में बिगड़ते हालात का हवाला देते हुए कहा कि बच्चों को निकालने की प्रक्रिया पूरी तरह से भारत सरकार की देखरेख में होना चाहिए। उन्होंने बताया कि बढ़ते तनाव के बीच अजरबैजान समेत कुछ देशों ने पहले ही ईरान से अपने नागरिकों को निकाल लिया है।
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शिराज में अभी पढ़ रहे छात्रों ने कहा कि उन्होंने हाल ही में शहर में अस्पताल और एक पासपोर्ट ऑफिस के पास लगातार धमाके सुने जिससे उन्हें सुरक्षा के लिए अंडरग्राउंड रहना पड़ा। तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के छात्रों ने भी बताया कि इलाके में धमाकों की आवाज सुनाई देने के बाद कोम शहर को रेड अलर्ट पर रखा गया है। इससे पहले उर्मिया और कोम के छात्रों से उन लोगों की लिस्ट बनाने के लिए कहा गया था जो निकलने के रास्ते के तौर पर आर्मेनिया से होकर जाने को तैयार थे। हालांकि कई छात्रों ने अकेले जाने में हिचकिचाहट दिखाई और इसके बजाय ईरान में भारतीय दूतावास के जरिए निकालने का इंतजाम करने की अपील की।
हमें भारत सरकार पर पूरा भरोसा है : सुहेल
एक अभिभावक सुहेल कादरी ने कहा कि बीच-बीच में बच्चों से बात हो जाती है। हर रोज बात नहीं हो पा रही। यहां से कॉल भी नहीं कर सकते। भारत की एंबेसी हमारे बच्चों का भरपूर ख्याल रख रही है। हमें भारत सरकार पर पूरा भरोसा है। सरकार बच्चों को वहां से निकालने की पूरी कोशिश कर रही है। एंबेसी ने बच्चों को तेहरान से निकालकर दूसरे शहर कोम में शिफ्ट किया है। सरकार से हमारी मांग है कि हमारे बच्चों को जितनी जल्दी हो सके वहां से निकाला जाए। जम्मू-कश्मीर सरकार भी केंद्र के साथ लगातार संपर्क में है। मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल की कोशिशें भी जारी हैं। मुख्यमंत्री ने हमें आश्वासन दिया है कि वे इस संबंध में विदेश मंत्रालय के साथ लगातार बात कर रहे हैं। ईरान की सरकार भी पूरा सहयोग दे रही है।
फिलहाल हमें 12 मार्च तक का समय दिया गया है : आसिफा
एक अन्य अभिभावक आसिफा ने कहा कि हम सरकार से अनुरोध कर रहे हैं कि हमारे बच्चों को ईरान से निकाला जाए। वहां के हालात काफी खराब हैं। हम मुख्यमंत्री जी से लेकर सांसद रुहुल्लाह मेहदी और कश्मीर के मंडलायुक्त से भी मिले। उन्होंने हमारी परेशानियों को सुना। सरकार पूरी कोशिश कर रही है। हमें भरोसा है कि बहुत जल्द कोई समाधान निकाला जाएगा। हम मीडिया का भी धन्यवाद करते हैं जो इस कठिन समय में हमारी आवाज बन रहा है। बच्चों को तेहरान से निकालकर कोम ले जाया गया है क्योंकि तेहरान के हालात काफी खराब थे। उर्मिया और किरमान में पढ़ने वाले बच्चे वहीं पर हैं। फिलहाल हमें 12 मार्च तक का समय दिया गया है।
भारत में ईरान के एंबेसडर से मुलाकात की है : उपाध्यक्ष
ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएमएसए) के उपाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मोमिन खान ने भारत में ईरान के एंबेसडर मोहम्मद फतहली से मुलाकात की है। उनसे ईरान में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षित वापसी में मदद करने की अपील की है। एआईएमएसए और परेशान माता-पिता ने विदेश मंत्रालय से अपील की है कि छात्रों को जल्द से जल्द निकालने की पहल की जाए।

महबूबा ने प्रधानमंत्री से की दखल देने की मांग


पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को ईरान में फंसे जम्मू-कश्मीर के छात्रों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दखल देने की मांग की। एक्स पर किए गए पोस्ट में महबूबा ने कहा कि ईरान में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं इसलिए वहां पढ़ रहे केंद्र शासित प्रदेश के हजारों छात्र अभी फंसे हुए हैं। मुफ्ती ने कहा, पीएम नरेंद्र मोदी से व्यक्तिगत तौर पर दखल देने की अपील करती हूं ताकि छात्रों के सुरक्षित घर पहुंचने में मदद मिल सके। विदेश मंत्रालय और विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से भी जल्द से जल्द छात्रों को निकालने की कोशिशें शुरू करने की अपील करती हूं।
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