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Srinagar News: श्रीनगर में अंगदान-जीवन प्रवाह पर तकनीकी कार्यशाला
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श्रीनगर में 'अंगदान–जीवन प्रवाह' पर तकनीकी कार्यशाला। स्रोत आयोजक
- एसओटीटीओ जेएंडके ने जुटाए विशेषज्ञ, अंगदान को जन-आंदोलन बनाने पर जोर
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में अंगदान और प्रत्यारोपण के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाने और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से शनिवार को श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में एक दिवसीय तकनीकी कार्यशाला का आयोजन किया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वर्षभर चलने वाले राष्ट्रव्यापी अभियान अंगदान करो जुग-जुग जियो के तहत यह कार्यशाला अंगदान-जीवन प्रवाह शीर्षक से स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन जम्मू-कश्मीर द्वारा आयोजित की गई।
इस तकनीकी कार्यशाला में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधि, ट्रांसप्लांट सर्जन और स्वास्थ्य अधिकारी एक मंच पर एकत्र हुए। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में मरणोपरांत अंगदान से जुड़ी चुनौतियों के समाधान, आपसी समन्वय और जागरूकता बढ़ाने की दिशा में ठोस रूपरेखा तैयार करना रहा।
कार्यक्रम का उद्घाटन पारंपरिक दीप प्रज्वलन, राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के साथ हुआ। एसओटीटीओ जम्मू-कश्मीर के नोडल अधिकारी तथा जीएमसी जम्मू में यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. एलियास शर्मा ने स्वागत भाषण दिया और कार्यशाला के उद्देश्यों को रेखांकित किया।
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उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि एवं राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन नई दिल्ली के निदेशक डॉ. अनिल कुमार, स्किम्स सौरा के निदेशक डॉ. एम. अशरफ गनई, रोटो नॉर्थ चंडीगढ़ के नोडल अधिकारी डॉ. विजय टाडिया और स्वास्थ्य सेवा निदेशालय कश्मीर की उपनिदेशक डॉ. सबा वानी ने संबोधित किया। सत्र का समापन एसओटीटीओ जेएंडके की संयुक्त निदेशक डॉ. पूनम महाजन द्वारा अतिथियों के सम्मान और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
कार्यशाला के विभिन्न तकनीकी सत्रों में अंगदान और ट्रांसप्लांटेशन के हर पहलू पर विशेषज्ञों ने विस्तृत व्याख्यान दिए। डॉ. अनिल कुमार ने भारत में अंगदान की मौजूदा स्थिति और नोटो की भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. विजय टाडिया ने पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ में अंगदान व ट्रांसप्लांट के विकास का अनुभव साझा किया। विशेषज्ञों ने ब्रेन-स्टेम डेथ सर्टिफिकेशन की वैज्ञानिक व कानूनी प्रक्रिया, मेडिको-लीगल मामलों के त्वरित निपटारे और अंगदान के समय परिजनों की प्रभावी काउंसलिंग के तौर-तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में अंगदान और प्रत्यारोपण के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाने और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से शनिवार को श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में एक दिवसीय तकनीकी कार्यशाला का आयोजन किया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वर्षभर चलने वाले राष्ट्रव्यापी अभियान अंगदान करो जुग-जुग जियो के तहत यह कार्यशाला अंगदान-जीवन प्रवाह शीर्षक से स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन जम्मू-कश्मीर द्वारा आयोजित की गई।
इस तकनीकी कार्यशाला में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधि, ट्रांसप्लांट सर्जन और स्वास्थ्य अधिकारी एक मंच पर एकत्र हुए। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में मरणोपरांत अंगदान से जुड़ी चुनौतियों के समाधान, आपसी समन्वय और जागरूकता बढ़ाने की दिशा में ठोस रूपरेखा तैयार करना रहा।
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कार्यक्रम का उद्घाटन पारंपरिक दीप प्रज्वलन, राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के साथ हुआ। एसओटीटीओ जम्मू-कश्मीर के नोडल अधिकारी तथा जीएमसी जम्मू में यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. एलियास शर्मा ने स्वागत भाषण दिया और कार्यशाला के उद्देश्यों को रेखांकित किया।
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उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि एवं राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन नई दिल्ली के निदेशक डॉ. अनिल कुमार, स्किम्स सौरा के निदेशक डॉ. एम. अशरफ गनई, रोटो नॉर्थ चंडीगढ़ के नोडल अधिकारी डॉ. विजय टाडिया और स्वास्थ्य सेवा निदेशालय कश्मीर की उपनिदेशक डॉ. सबा वानी ने संबोधित किया। सत्र का समापन एसओटीटीओ जेएंडके की संयुक्त निदेशक डॉ. पूनम महाजन द्वारा अतिथियों के सम्मान और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
कार्यशाला के विभिन्न तकनीकी सत्रों में अंगदान और ट्रांसप्लांटेशन के हर पहलू पर विशेषज्ञों ने विस्तृत व्याख्यान दिए। डॉ. अनिल कुमार ने भारत में अंगदान की मौजूदा स्थिति और नोटो की भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. विजय टाडिया ने पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ में अंगदान व ट्रांसप्लांट के विकास का अनुभव साझा किया। विशेषज्ञों ने ब्रेन-स्टेम डेथ सर्टिफिकेशन की वैज्ञानिक व कानूनी प्रक्रिया, मेडिको-लीगल मामलों के त्वरित निपटारे और अंगदान के समय परिजनों की प्रभावी काउंसलिंग के तौर-तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी।