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Udhampur News: आवास न भोजन, छात्राओं से शिक्षा हो रही दूर, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय घोरड़ी में दो वर्षों से योजना ठप
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- 2023 में 100 बच्चियां थीं पढ़ती, सुविधा बंद होने से 47 बच्चियां छोड़ गईं पढ़ाई
उधमपुर। ब्लॉक घोरड़ी में केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना कागजों में सिमटती नजर आ रही है। योजना का उद्देश्य गरीब और दूरदराज क्षेत्रों की बालिकाओं को शिक्षा के साथ सुरक्षित आवास व भोजन उपलब्ध कराना है। इसके उलट कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में करीब दो साल से छात्राओं को सुविधा नहीं मिल पाई।
वार्डन और चौकीदार की भी नियुक्ति नहीं हो पाई। रसोइया मेडिकल अवकाश पर है। ऐसी अव्यवस्था पर अभिभावकों और ग्रामीणों में गहरा रोष है। उनका कहना है कि 2024 से आवासीय सुविधा बंद कर दी गई, जिससे गरीब और दूरदराज क्षेत्रों से आने वाली बच्चियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। 2023 में विद्यालय में 100 बच्चियां पढ़ती थीं लेकिन भोजन और आवासीय सुविधा बंद होने के बाद 47 बच्चियां मजबूरी में पढ़ाई छोड़ चुकी हैं।
पंचायत हरतयान के पूर्व पंच विक्रम सिंह, बिट्टू राम, राजकुमार का आरोप है कि स्टाफ प्रतिदिन छात्राओं को घर भेज रहा है। जबकि कई छात्राओं के घर स्कूल से कई किलोमीटर दूर है। ऐसे में रोजाना किराया देकर बच्चों को स्कूल भेजना गरीब परिवारों के लिए संभव नहीं है।
अभिभावकों ने आरोप लगाया कि विद्यालय में पर्याप्त राशन उपलब्ध होने के बावजूद छात्राओं को भोजन नहीं दिया जा रहा है। इससे न केवल बच्चियों की सेहत पर असर पड़ रहा है, बल्कि उनकी चिंता भी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना की भावना के खिलाफ स्टाफ कार्य कर रहा है। कुछ माह पूर्व ग्रामीणों ने मुख्य शिक्षा अधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद सीईओ मौके पर पहुंचे और स्टाफ को नियमों के अनुसार छात्राओं को आवास व भोजन की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्देश के बावजूद आज तक जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हुआ है।
उपायुक्त कार्यालय के बाहर बड़े स्तर पर करेंगे प्रदर्शन
ग्रामीणों और अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा विभाग ने शीघ्र ही बेटियों के लिए आवास और भोजन की सुविधा बहाल नहीं की तो वे छात्राओं को साथ लेकर जिला उपायुक्त कार्यालय के बाहर बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। प्रशासन से मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
मौके पर जांच की गई है। सभी समस्याओं को दूर कर विद्यालय को क्रियाशील बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वार्डन की नियुक्त के संबंध में एसपीडी समग्र को लिखा गया है।
-कल्पना जसरोटिया, डिप्टी सीईओ, उधमपुर ।
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उधमपुर। ब्लॉक घोरड़ी में केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना कागजों में सिमटती नजर आ रही है। योजना का उद्देश्य गरीब और दूरदराज क्षेत्रों की बालिकाओं को शिक्षा के साथ सुरक्षित आवास व भोजन उपलब्ध कराना है। इसके उलट कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में करीब दो साल से छात्राओं को सुविधा नहीं मिल पाई।
वार्डन और चौकीदार की भी नियुक्ति नहीं हो पाई। रसोइया मेडिकल अवकाश पर है। ऐसी अव्यवस्था पर अभिभावकों और ग्रामीणों में गहरा रोष है। उनका कहना है कि 2024 से आवासीय सुविधा बंद कर दी गई, जिससे गरीब और दूरदराज क्षेत्रों से आने वाली बच्चियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। 2023 में विद्यालय में 100 बच्चियां पढ़ती थीं लेकिन भोजन और आवासीय सुविधा बंद होने के बाद 47 बच्चियां मजबूरी में पढ़ाई छोड़ चुकी हैं।
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पंचायत हरतयान के पूर्व पंच विक्रम सिंह, बिट्टू राम, राजकुमार का आरोप है कि स्टाफ प्रतिदिन छात्राओं को घर भेज रहा है। जबकि कई छात्राओं के घर स्कूल से कई किलोमीटर दूर है। ऐसे में रोजाना किराया देकर बच्चों को स्कूल भेजना गरीब परिवारों के लिए संभव नहीं है।
अभिभावकों ने आरोप लगाया कि विद्यालय में पर्याप्त राशन उपलब्ध होने के बावजूद छात्राओं को भोजन नहीं दिया जा रहा है। इससे न केवल बच्चियों की सेहत पर असर पड़ रहा है, बल्कि उनकी चिंता भी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना की भावना के खिलाफ स्टाफ कार्य कर रहा है। कुछ माह पूर्व ग्रामीणों ने मुख्य शिक्षा अधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद सीईओ मौके पर पहुंचे और स्टाफ को नियमों के अनुसार छात्राओं को आवास व भोजन की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्देश के बावजूद आज तक जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हुआ है।
उपायुक्त कार्यालय के बाहर बड़े स्तर पर करेंगे प्रदर्शन
ग्रामीणों और अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा विभाग ने शीघ्र ही बेटियों के लिए आवास और भोजन की सुविधा बहाल नहीं की तो वे छात्राओं को साथ लेकर जिला उपायुक्त कार्यालय के बाहर बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। प्रशासन से मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
मौके पर जांच की गई है। सभी समस्याओं को दूर कर विद्यालय को क्रियाशील बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वार्डन की नियुक्त के संबंध में एसपीडी समग्र को लिखा गया है।
-कल्पना जसरोटिया, डिप्टी सीईओ, उधमपुर ।