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Udhampur News: रामबन में डुग्गर संस्कृति का भव्य संगम, 58 कलाकारों को किया सम्मानित
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उधमपुर। रामबन के निजी पैलेस में डुग्गर सांस्कृतिक संगम कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम दोपहर 12 बजे प्रारंभ हुआ। इसमें जम्मू संभाग के बनिहाल से लेकर कठुआ तक के 10 जिलों से आए 288 कलाकारों ने डुग्गर क्षेत्र की लोककला, संस्कृति और पारंपरिक विरासत की मनोहारी प्रस्तुतियां दीं। 58 कलाकारों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पद्मश्री रुमालो राम और विशिष्ट अतिथि के रूप में जम्मू संभाग के स्कूल शिक्षा निदेशक गुरुदेव कुमार सराजी और रामबन के अतिरिक्त उपायुक्त वरुणजीत सिंह चाढ़क उपस्थित रहे। साथ ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य एवं विकसित भारत 2047 की राष्ट्रीय युवा आइकान त्रिप्ति सैनी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि पद्मश्री रुमालो राम ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हमेशा से ही राष्ट्र की संस्कृति और देश के गौरव को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्यरत है। इस भव्य कार्यक्रम और प्रदेशभर से आए कार्यकर्ताओं का जोश देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा। यदि इस प्रकार के कार्यक्रम निरंतर होते रहेंगे तो डुग्गर संस्कृति को कोई आंच नहीं पहुंचा सकता। वहीं विशिष्ट अतिथि ने कहा कि नशा समाज के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इसे दूर करने में विश्व का सबसे बड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अहम भूमिका निभा रहा है। तृप्ति सैनी, शिक्षा निदेशक गुरुदेव कुमार सराजी ने कहा कि वास्तविक जीवन जीने के लिए हमें मेहनत करनी होगी और अपनी संस्कृति से जुड़े रहना होगा।
कार्यक्रम में ढोल वादन, बांसुरी वादन, थाली नृत्य, रणशिंगा वादन, साफा बांधना, जोड़ी और भाख जैसे डुग्गर की पारंपरिक लोककलाओं की प्रस्तुतियां दी गईं। कलाकारों के उत्साह और पारंपरिक वेशभूषा ने पूरे माहौल को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया।अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा डुग्गर संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 58 कलाकारों को मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पद्मश्री रुमालो राम और विशिष्ट अतिथि के रूप में जम्मू संभाग के स्कूल शिक्षा निदेशक गुरुदेव कुमार सराजी और रामबन के अतिरिक्त उपायुक्त वरुणजीत सिंह चाढ़क उपस्थित रहे। साथ ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य एवं विकसित भारत 2047 की राष्ट्रीय युवा आइकान त्रिप्ति सैनी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
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मुख्य अतिथि पद्मश्री रुमालो राम ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हमेशा से ही राष्ट्र की संस्कृति और देश के गौरव को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्यरत है। इस भव्य कार्यक्रम और प्रदेशभर से आए कार्यकर्ताओं का जोश देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा। यदि इस प्रकार के कार्यक्रम निरंतर होते रहेंगे तो डुग्गर संस्कृति को कोई आंच नहीं पहुंचा सकता। वहीं विशिष्ट अतिथि ने कहा कि नशा समाज के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इसे दूर करने में विश्व का सबसे बड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अहम भूमिका निभा रहा है। तृप्ति सैनी, शिक्षा निदेशक गुरुदेव कुमार सराजी ने कहा कि वास्तविक जीवन जीने के लिए हमें मेहनत करनी होगी और अपनी संस्कृति से जुड़े रहना होगा।
कार्यक्रम में ढोल वादन, बांसुरी वादन, थाली नृत्य, रणशिंगा वादन, साफा बांधना, जोड़ी और भाख जैसे डुग्गर की पारंपरिक लोककलाओं की प्रस्तुतियां दी गईं। कलाकारों के उत्साह और पारंपरिक वेशभूषा ने पूरे माहौल को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया।अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा डुग्गर संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 58 कलाकारों को मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया।

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