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Udhampur News: पहाड़ी क्षेत्र की महिलाओं के लिए मिसाल बनीं सुषमा, शुरू किया अपना बुटीक
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उधमपुर। कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो पहाड़ों की कठिन राहें भी आसान हो जाती हैं। कैंथगली क्षेत्र की सुषमा देवी ने इसे सच कर दिखाया है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से टेलरिंग का हुनर सीखकर सुषमा ने न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया है बल्कि अब वे अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।
पहाड़ी इलाकों में रोजगार के सीमित अवसरों और कठिन जलवायु के बीच सुषमा देवी हमेशा से कुछ ऐसा करना चाहती थीं, जिससे वे घर बैठे सम्मानजनक आय प्राप्त कर सकें। सुषमा के अनुसार उनके क्षेत्र में मुख्य रूप से सरकारी नौकरी या खेती ही आय के साधन थे। उन्होंने एक ऐसा रास्ता चुना जिसमें मार्केटिंग की अधिक समस्या न हो।
सुषमा को जब एसबीआई के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान द्वारा दी जाने वाली निशुल्क ट्रेनिंग के बारे में पता चला तो उन्होंने 30 दिनों का टेलरिंग कोर्स करने का निर्णय लिया। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने अपने ही गांव में एक बुटीक खोला। आज हर महीने 10 से 15 हजार रुपये कमा रही हैं। उन्हें सबसे बड़ी खुशी इस बात की है कि गांव की अन्य महिलाओं को भी हुनर सिखा रही हैं ताकि वे भी अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।
सशक्तिकरण की ओर बढ़ते कदम
सुषमा देवी का मानना है कि स्वरोजगार केवल पैसा कमाने का जरिया नहीं बल्कि यह महिलाओं को समाज में अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाता है। उनकी यह राह दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और कौशल विकास से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं भी अपनी किस्मत खुद लिख सकती हैं।
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सुषमा को जब एसबीआई के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान द्वारा दी जाने वाली निशुल्क ट्रेनिंग के बारे में पता चला तो उन्होंने 30 दिनों का टेलरिंग कोर्स करने का निर्णय लिया। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने अपने ही गांव में एक बुटीक खोला। आज हर महीने 10 से 15 हजार रुपये कमा रही हैं। उन्हें सबसे बड़ी खुशी इस बात की है कि गांव की अन्य महिलाओं को भी हुनर सिखा रही हैं ताकि वे भी अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।
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सुषमा देवी का मानना है कि स्वरोजगार केवल पैसा कमाने का जरिया नहीं बल्कि यह महिलाओं को समाज में अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाता है। उनकी यह राह दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और कौशल विकास से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं भी अपनी किस्मत खुद लिख सकती हैं।