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Jammu News: पुरमंडल में फसलों को बर्बाद कर रहे बंदर
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- धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं पर हमला कर छीन रहे सामान, ग्रामीणों की सरकार से गुहार
संवाद न्यूज एजेंसी
पुरमंडल। क्षेत्र में बंदरों का उत्पात बढ़ता जा रह है। ये किसानों की फसलों और सब्जियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं पर हमला कर हाथ से सामान छीन लेते हैं। लोग घरों और खेतों में भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
स्थानीय निवासी राजेश कुमार, हेमराज शर्मा व अमर चंद के अनुसार बंदर खेतों में फसलों व सब्जियों को नष्ट कर देते हैं। गेंहू, धान, लहसुन, हल्दी, सरसों, लौकी, कद्दू, शिमला मिर्च और बैंगन आदि फसलों के तैयार होने से पहले ही बंदर इन्हें बर्बाद कर देते हैं। किसानों को नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों की आय का मुख्य साधन खेती है लेकिन बंदरों के कारण उनकी रोजी रोटी छिनती जा रही है। यदि प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाया तो रोजगार की तलाश में गांव छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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बच्चों पर कर रहे हमला, रसोई
से रोटियां उठा ले जाते हैं
आशा वर्कर नीता कुमारी ने बताया कि मंडल गांव में कई बार बंदर घरों के आंगन में खेलते बच्चों पर हमला कर देते हैं। रसोई से रोटियां उठाकर ले जाते हैं। पुरमंडल और उत्तरवाहिनी के धार्मिक स्थलों में भी बंदरों का आतंक बढ़ गया है। कई बार श्रद्धालुओं को काट लेते हैं और हाथों से प्रसाद व अन्य सामग्री छीन लेते हैं। इससे भय बना हुआ है।
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डर-डरकर स्कूल जाने
के लिए मजबूर विद्यार्थी
पूर्व सरपंच सपना सपोलिया ने बताया कि बंदरों के हमलों का असर स्कूली बच्चों पर भी दिख रहा है जो डर-डरकर स्कूल जाने के लिए मजबूर हैं। कई बार बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग इनके हमले से घायल हो चुके हैं। किसान कुलदीप सिंह, विक्की कुमार और राकेश कुमार ने सरकार से मांग की है कि जंगलों में बंदरों के लिए पीने के पानी और जंगली फलों के पेड़ लगाए जाएं ताकि ये रिहायशी इलाकों में न घुसें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पुरमंडल। क्षेत्र में बंदरों का उत्पात बढ़ता जा रह है। ये किसानों की फसलों और सब्जियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं पर हमला कर हाथ से सामान छीन लेते हैं। लोग घरों और खेतों में भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
स्थानीय निवासी राजेश कुमार, हेमराज शर्मा व अमर चंद के अनुसार बंदर खेतों में फसलों व सब्जियों को नष्ट कर देते हैं। गेंहू, धान, लहसुन, हल्दी, सरसों, लौकी, कद्दू, शिमला मिर्च और बैंगन आदि फसलों के तैयार होने से पहले ही बंदर इन्हें बर्बाद कर देते हैं। किसानों को नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों की आय का मुख्य साधन खेती है लेकिन बंदरों के कारण उनकी रोजी रोटी छिनती जा रही है। यदि प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाया तो रोजगार की तलाश में गांव छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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बच्चों पर कर रहे हमला, रसोई
से रोटियां उठा ले जाते हैं
आशा वर्कर नीता कुमारी ने बताया कि मंडल गांव में कई बार बंदर घरों के आंगन में खेलते बच्चों पर हमला कर देते हैं। रसोई से रोटियां उठाकर ले जाते हैं। पुरमंडल और उत्तरवाहिनी के धार्मिक स्थलों में भी बंदरों का आतंक बढ़ गया है। कई बार श्रद्धालुओं को काट लेते हैं और हाथों से प्रसाद व अन्य सामग्री छीन लेते हैं। इससे भय बना हुआ है।
डर-डरकर स्कूल जाने
के लिए मजबूर विद्यार्थी
पूर्व सरपंच सपना सपोलिया ने बताया कि बंदरों के हमलों का असर स्कूली बच्चों पर भी दिख रहा है जो डर-डरकर स्कूल जाने के लिए मजबूर हैं। कई बार बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग इनके हमले से घायल हो चुके हैं। किसान कुलदीप सिंह, विक्की कुमार और राकेश कुमार ने सरकार से मांग की है कि जंगलों में बंदरों के लिए पीने के पानी और जंगली फलों के पेड़ लगाए जाएं ताकि ये रिहायशी इलाकों में न घुसें।