Amarnath: कम बर्फबारी और बढ़ती गर्मी से पांच दिन में अंतर्ध्यान हुए बाबा बर्फानी, वैज्ञानिकों ने बताए कारण
अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी का हिम शिवलिंग इस वर्ष यात्रा शुरू होने के मात्र पांच दिनों में पिघल गया, जिसका प्रमुख कारण कम बर्फबारी, बढ़ता तापमान और बदलता मौसम बताया गया है।
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बाबा बर्फानी के शिवलिंग का यात्रा शुरू होने के महज पांच दिनों के अंदर ही गायब होने की बात मौसम विज्ञानियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। मौसम विज्ञानी सोनम लोटस ने कहा कि कम बर्फबारी होना ही सबसे बड़ा कारण है। गुफा के आसपास का वातावरण,तापमान लगातार बदल रहा है। बीते वर्ष की तुलना में इस बार ठंड में बर्फबारी भी कम हुई है। बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या ने बाबा बर्फानी की गुफा के आसपास मौसम का मिजाज बदल कर रख दिया है।
मौसम विज्ञानी सोनम लोटस ने बताया कि यात्रा को लेकर लगातार पेड़ों की कटाई,सड़कों,जनसुविधाओं के लिए किए जा रहे निर्माण का कार्य भी बड़ा कारण है। जिससे वहां लगातार तापमान पर असर पड़ रहा है। 24 घंटे जेनरेटर,निर्माण में लगी बड़ी बड़ी मशीनें,निकल रहे धुएं से वहां का प्राकृतिक वातावरण तो खराब हुआ ही है लगातार तापमान में बदलाव नजर आ रहा है। यहां पर दिन में भी 10 से 20 डिग्री सेल्सियस तक तापमान रहता है। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025 में 10 दिनों तक ही बाबा बर्फानी का शिवलिंग दिखाई दिया। इस बार तो महज पांच दिनों में ही बाबा अंतर्ध्यान हो गए। यात्रियों की संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले अधिक दर्ज की गई है। अभी भी यात्री लाइन में लगकर यात्रा में जाने का इंतजार कर रहे हैं। खाने-पीने के स्टॉल,कचरे के कारण बढ़ता प्रदूषण वहां के पारिस्थितकी तंत्र को प्रभावित कर चुका है।
मौसम विज्ञानियेां का कहना,ग्लेशियर लगातार सिकुड़ रहे
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि बाबा अमरनाथ गुफा के आसपास पांच ग्लेशियर हैं। लगातार मौसम में बदलाव के बाद यह सिकुड़ते जा रहे हैं। जिसके कारण यहां का मौसम हर वर्ष बदल रहा है। गर्मी का असर है कि समय से पहले ही बाबा बर्फानी का आकार कम होने के साथ ही कम समय में ही शिवलिंग पिघलना शुरू कर दे रहा है।
अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी का हिम शिवलिंग इस वर्ष यात्रा शुरू होने के मात्र पांच दिनों में पिघल गया, जिसका प्रमुख कारण कम बर्फबारी, बढ़ता तापमान और बदलता मौसम बताया गया है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बढ़ते निर्माण कार्य, श्रद्धालुओं की संख्या, प्रदूषण और सिकुड़ते ग्लेशियरों ने गुफा के आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर हिम शिवलिंग के जल्दी पिघलने की प्रक्रिया तेज कर दी है।